Hindu Nav Varsh 2026: इस बार नववर्ष का आरंभ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में होगा और उस समय शुक्ल योग के साथ मीन लग्न रहेगा. पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर जोधपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य डा. अनीष व्यास ने बताया कि ‘रौद्र’ शब्द का अर्थ तीव्र या उग्र प्रवृत्ति से जुड़ा माना जाता है.
इसी आधार पर यह अनुमान लगाया जाता है कि वर्ष के दौरान प्राकृतिक, सामाजिक या राजनीतिक स्तर पर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकते हैं. यह देश और दुनिया में नरसंहार लेकर आएगा. मध्य एशिया में युद्ध जारी है और अब यह दक्षिण एशिया में भी देखा जाएगा. इस दौरान मौसम में भारी बदलाव होगा और किसी बड़े भूकंप के आने या ज्वालामुखी फटने के संकेत भी मिलते हैं. ज्योतिष शास्त्र के मुताबिक, राजा गुरु होने से धार्मिक कार्यों और ज्ञान में वृद्धि होगी. लेकिन मंत्री मंगल होने के कारण समाज में थोड़ा उग्र स्वभाव और साहसी निर्णय भी देखने को मिल सकते हैं.
19 मार्च 2026 को प्रारंभ बार्हस्पत्यमान से रुद्रविंशति के अन्तर्गत एकादश युग के चतुर्थ रौद्र नाम (54याँ) संवत्सर होगा. यह विक्रम् संवत् 2083 होगा. चैत्र शुक्ल प्रतिपदा को रौद्र नामक संवत्सर होने से विक्रम् संवत् का प्रवेश 19 मार्च 2026, गुरुवार को उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, शुक्ल योग, नाग करण एवं मीनल में होगा. परंपरा के अनुसार नव-सर्वत् का प्रारंभ तथा संवत् के राजा का निर्णय चैत्रशुक्ल प्रतिपदा के बार अनुसार ही किया जाता है. इस वर्ष ‘गुरुवार’ से नव संवत् का प्रारंभ हो रहा है, अतः इस वर्ष का राजा ‘गुरु’ होगा. बसंत नवरात्र का प्रारंभ 19 मार्च 2026 को होगा, इसी दिन से पूजा-पाठ, अनुष्ठान, दान-यज्ञ, व्रतादि में संकल्प में ‘रौद्र’ नामक सम्वत्सर का उच्चारण किया जाएगा.
रौद्रेब्वे नृपसंभूत क्षोभक्लेश समन्विते ।
सततं त्वखिलालोका मध्य सस्यार्घवृष्टयः ।।
“रौद्र” नाम का संवत्सर होने से राजाओं व शासकों में उत्तेजना-झल्लाहट की वृद्धि होगी, जिससे आपसी वैर-विरोध बढ़ेंगे. प्रजा हित के विकास कार्यों में कमी आएगी. वर्षा की न्यूनता, धान्यादि के उत्पादन को प्रभावित करेगी.
संवत्सर संहिता के अनुसार “रौद्र” नामक संवत्सर का फल इस प्रकार है:-
अल्पतोयप्रदा मेघा अल्पसस्या च मेदिनी ।
निष्ठुराः पार्थिवा लोके दावो रौद्रे प्रजायते ।।
“रौद्र” नाम संवत्सर में वर्षा की कमी रहने से कृषि उत्पादन प्रभावित होगा. खाद्यान्नों में तेजी होने से प्रजा मंहगाई से पीड़ित रहेगी. शासकों में दंभ की वृद्धि के साथ जन विरोधी विचार बढ़ेंगे. प्रकृति एवं पर्यावरण से खिलवाड़ असाध्य रोगों के साथ, भूकंप, अग्निकांड, भूस्खलन जैसी घटनाओं में वृद्धि करेगा. राजा/राष्ट्राध्यक्षों के निर्णयों एवं क्लिष्ट रोगों से जनता त्रस्त होगी. छत्रभंग व शासन-परिवर्तन के भी योग बनेंगे. विभित्र राष्ट्राध्यक्षों में मतभेद से जनता त्रस्त होगी. अग्निकांड से हानि होगी.
रौद्र संवत्सर मंत्रिमंडल
- राजा गुरु
- मंत्री मंगल
- कृषिमंत्री (सश्येष) गुरु
- खाद्य मंत्री (धान्येश) बुध
- जलदाय मंत्री (मेघेश) चंद्रमा
- उद्योग व खनिज मंत्री (रसेश) शनि
- पेट्रोलियम मंत्री (नीरसेश) गुरु
- वन व पर्यावरण मंत्री (फलेश) चंद्रमा
- वित्तमंत्री(धनेश) गुरु
- गृहमंत्री (दुर्गेश) चंद्रमा
गुरौ नृपे वर्षति कामदं जलं महीतले कामदुधाश्च धेनवः।
यजन्ति विप्रा बहवोऽग्निहोत्रिणो महोत्सवः सर्वजनेषु वर्तते।।
राजा गुरु का फल
वर्ष का राजा गुरु होने से प्रजा में सुख समृद्धि बढ़ेगी. समयानुकूल वर्षा होने से अन्नोत्पादन में बढ़ोत्तरी तथा मंदी की चाल रहेगी. प्रजा में मांगलिक कार्य एवं उत्सव अधिक होने से उल्लास का वातावरण बना रहेगा. शासन तंत्र में भी सुधार आयेगा. कृषि/फसलों के लिए उत्तम वर्षा होगी. गाय-भैंस आदि चौपायें के दुग्ध से पर्याप्त आमदनी होगी. विप्रजन यज्ञ, होमादि में व्यस्त रहेंगे. मांगलिक कार्यों में जनता की भागीदारी बढ़ेगी. व्यापार के लिए अनुकूल बाजार बनेगा. उपभोक्ता पदार्थों व नए वाहनों का उत्पादन बढ़ेगा. श्रेष्ठ वर्षा व आर्थिक उन्नति से समाज लाभान्वित होगा. शांति वार्ताओं से विरोधी राष्ट्र भी समाज को शान्ति का संदेश देंगे. अनाज व कृषि का उत्पादन, मौसमी फलों का श्रेष्ठ उत्पादन होगा.
अवनिजो ननु मंत्रिपदं गती भवति दस्यु गदादिज वेदना।
जनपदेषु जयं सुख संचयं न बहु गोषु पयो द्विजकर्म च।।
मंत्री मंगल का फल
मंत्री मंगल होने से प्रजा में रोग पीडा तथा चोरों के उपद्रव से कष्ट बढ़ेगा. बड़े नगरों में मनुष्यों का जीवन अशांत रहेगा. ग्रामीण जनता को भी सुख कम मिलेगा. वर्षा असामयिक सोते से धान्यादि का उत्पादन कम होगा. दूध-दही व थी की कमी रहेगी. आमजन का पूजा पाठ में मन कम लगेगा. जनता चोरों लटेरों, तस्करों आदि के भय, विविध के भय से पीडित रहेगी. अग्निकांड, दर्घटनाएं, हिंसक घटनाएं बढ़ेगी. सुख की आकांक्षा में ग्रामीण क्षेत्र से आधुनिकता की ओर पलायन करेगी. कुछ ही क्षेत्रों की जनता सुख की अनुभ करेगी. गाय, भैंस आदि की दग्ध क्षमता में कमी होगी.
कणपती सुरराज पुरोहिते सकल सौख्यकरं श्रुतिपूर्वकः।
जलघरा जलवा बहुसस्यदा रस पयांसि बहुनि वसूनि वे।।
सस्येश गुरु का फल
खरीफ की फसल का स्वामी गुरु होने से विश्व में आर्थिक सुधारात्मक कार्यक्रम चलाए जाएंगे, जो सुख-शांति का वातावरण एवं आवश्यक वस्तुओं की सुलभता व मंदी का बातावरण तैयार करेगें. प्रजा धार्मिक कार्यों में मन लगायेगी. अन्न, तृण, फल एवं रसादि पदार्थ का उत्पादन बढ़ेगा. सनातन निर्धारित धर्म-कर्म का अनुसरण करने की भावना जाग्रत होगी. पर्याप्त वर्षा से जनता प्रसन्न गेहूं, धान्य, इंख, गोरस, दूध, घी एवं फलों आदि की पैदावार श्रेष्ठ होगी. कृषि आदि के श्रेष्ठ उत्पाद से जनता प्रसन्न होगी. कृषि से आजीविका चलाने वालों को श्रेष्ठ लाभ होगा. धन-समृद्धि से जनता प्रसत्रता होगी.
बुधे धान्याधिपे मेघा जलं मुंचन्ति वै भृशम्।
संघवे लाट देशे च माधवोऽल्पं च वर्षति ।।
धान्येश बुध का फल
वर्षा अच्छी होगी, जिससे कृषि उत्पादन भी श्रेष्ठ होगा. अन्नादि का भाव मंदा रहेगा. पंजाब व सिन्ध में वर्षा की कमी रहेगी. आम जनता धर्मपरायण होने से धार्मिक आयोजनों की अधिकता रहेगी. श्रेष्ठ वर्षा से धान्य उत्पादन पर्याप्त मात्रा में होगा. रसादि पदार्थों (ऑयल, तेल, गुड़, दूध आदि) के मूल्यों में वृद्धि जनता त्रस्त होगी. शास्त्र-तन्त्र की नीतियों से जनता सन्तुष्ट दिखेगी.
शशिनि तोयदपे यदि गोमहिष्य जखरादिषु दुग्धरसं तदा।
फलवती धन धान्यवती घरा विविध भोगवती ननु भामिनी ।।
मेघेश चन्द्रमा का फल
मेघेश का पद चन्द्रमा को मिला है, अतः कुंआ, बावड़ी, तालाब आदि वर्षा अच्छी होने से जल से पूर्ण होंगे. जनता में सुख शांति रहेगी. अनाज का उत्पादन भी अच्छा हो. वृक्षों में फल एवं बेलों में फूल अधिक लगेंगे. उद्योग-धन्धों का विस्तार होगा. गाय, भैंस, बकरी आदि पशुओं में दुग्ध की मात्रा बढ़ेगी. वृक्षों पर फत. फूल आदि अधिक होंगे. भोग्य सुख-साधन व ऐश्वर्य के स्रोत बढ़ेंगे.
यथा यदा पयोनिधि स्थले गतो विरंचिभि तदा।
अतीव वर्षणं भवेत् समस्त-धान्यवर्द्धनम् ।।
रोहिणी निवास का फल
संवत् 2083 में मेष-संक्रान्ति का प्रवेश शतभिषा नक्षत्र में हुआ है, अतः वर्षप्रबोध ग्रंथ के अनुसार रोहिणी का वास ‘समुद्र’ में होगा, जिसके फलस्वरूप गेहूं, धान्यादि सभी की पैदावार श्रेष्ठ होगी. मध्य भारत (बिहार, मध्यप्रदेश, उड़ीसा, उत्तर प्रदेश आदि) के कुछ स्थानों पर बाढ़ आदि प्रकोपों के कारण जन-धन, कृषि आदि फसलों की हानि होने की संभावना है. देश के अन्य भागों में मक्का, चावल, तृण, फल-फूलों की श्रेष्ठ पैदावार होगी.
मालिने प्रचुराः वृष्टिः। सर्ववस्तु समर्थ स्यान् मालाकारगृहे।
समय का वास
रोहिणी का वास समुद्र में होने से संवत् का वास ‘माली’ के घर में होगा. वर्षा श्रेष्ठ होगी. ईख (गन्ना), धान्य, चावल, तृण, घास, फल व फूलों की पैदावार श्रेष्ठ होगी. पर्वतीय प्रदेशों में कृषि व फूलों का उत्पादन श्रेष्ठ होगा. सभी प्रकार के कृषि उत्पाद, घी, तेल, दैनिक उपभोग्य वस्तुएँ, दालें, दूध तथा स्वर्ण, तांबा, चांदी आदि धातुओं के भाव बढ़ेंगे.
समय का वाहन
राजा गुरु होने से समय का बाहन ‘चातक’ होगा. देश के कुछ भागों में वर्षा की कमी होगी. कहीं अनावृष्टि के कारण दुर्भिक्ष, सूखा, पेयजल की कमी होगी. विशेषतः देश के पूर्वी, पश्चिमी, दक्षिणी क्षेत्र के कुछ भागों में उपयुक्त वर्षा की कमी एवं जलापूर्ति की कमी से कृषक वर्ग व जनता त्रस्त होगी. सभी प्रकार के खाद्यान्न, तिल, तेल, ईख, फल-फूल, सब्जियों के भावों में अत्यधिक वृद्धि होगी, जिससे जनता त्रस्त होगी.
हिन्दू कलेंडर 2082 के अनुसार मास
1. चैत्र मास, 2. वैशाख मास, 3. ज्येष्ठ मास, 4. आषाढ़ मास, 5. श्रावण मास, 6. भाद्रपद मास, 7. आश्विन मास, 8. कार्तिक मास, 9. मार्गशीर्ष मास, 10. पौष मास, 11. माघ मास, 12. फाल्गुन मास.
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