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बॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे अक्सर डरावने राज दबे होते हैं, जो अंदर तक सिहरन पैदा कर देते हैं. ऐसी ही एक भूली-बिसरी, लेकिन दिल दहला देने वाली कहानी है जाने माने फिल्ममेकर बृज सदाना की. 21 अक्टूबर, 1990 (रविवार) की अंधेरी रात में, जब पूरा परिवार बेटे कमल सदाना का 20वां जन्मदिन मनाने की तैयारी कर रहा था, पागलपन और अंदरूनी लड़ाई के एक पल ने सब कुछ तबाह कर दिया. नशे में धुत बृज सदाना ने अपनी पत्नी और बेटी को मार डाला और अपने बेटे को भी गोली मार दी. इस रोंगटे खड़े कर देने वाले ‘ब्लैक संडे’ ने बॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे छिपे सबसे गहरे अंधेरे को सामने ला दिया.
नई दिल्ली. बॉलीवुड की चमक-दमक के पीछे अक्सर एक काला साया होता है, जो समय की धूल में छिप जाता है. इंडस्ट्री की सफलता की कहानियों के बीच डिप्रेशन और निजी दुखों की कई ऐसी कहानियां हैं जो दिल दहला देने वाली हैं. ऐसी ही एक भूली-बिसरी, लेकिन दिल दहला देने वाली कहानी है हिंदी सिनेमा के मशहूर डायरेक्टर और प्रोड्यूसर बृजमोहन सदाना की, जिन्हें दुनिया ‘बृज’ के नाम से जानती थी. (तस्वीर बनाने में एआई की मदद ली गई है.)

60 और 80 के दशक के बीच, बृज सदाना ने ‘उस्तादों के उस्ताद’ (1963), ‘यह रात फिर ना आएगी’ (1966), ‘दो भाई’ (1969) और ब्लॉकबस्टर ‘विक्टोरिया नंबर 203’ जैसी यादगार फिल्में दीं. उन्होंने एक्ट्रेस सईदा खान से शादी की और उनके दो बच्चे हुए- बेटी नम्रता और बेटा कमल सदाना.

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो यह खुशहाल दिखने वाला परिवार अक्सर झगड़ों से भरा रहता था. कपल के बीच झगड़े इतने बढ़ गए कि सईदा अपने बच्चों के साथ घर छोड़कर कार्टर रोड के एक अपार्टमेंट में रहने लगीं. गुस्से में बृज ने अपनी लाइसेंसी बंदूक से हवा में गोली भी चलाई. कहा जाता है कि उस समय नरगिस दत्त के दखल के बाद उनकी बंदूक जब्त कर ली गई थी, लेकिन 1980 के दशक के बीच में खालिस्तानी आतंकवादियों से खतरे का हवाला देकर बृज ने इसे वापस ले लिया.
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1980 के दशक के आखिर तक, बृज को लगने लगा था कि उनका बॉक्स ऑफिस मैजिक फीका पड़ रहा है. ‘मगरूर’, ‘बॉम्बे 405 माइल्स’ और ‘ऊंचे लोग’ जैसी फिल्मों की लगातार नाकामयाबी ने उन्हें पैसे और दिमागी तौर पर पूरी तरह से तोड़ दिया था. उनके बांद्रा वाले बंगले ‘जल कमल’ में कोई शांति नहीं बची थी.

स्ट्रेस का एक और कारण उनकी बेटी नम्रता थी, जो दूसरे धर्म के किसी व्यक्ति से शादी करना चाहती थी, एक ऐसा फैसला जिसके बृज पूरी तरह खिलाफ थे. उनके खराब होते करियर और परिवार के विरोध ने उन्हें गहरे डिप्रेशन में डाल दिया. 21 अक्टूबर, 1990 यह कमल सदाना का 20वां जन्मदिन था. उस सुबह दोनों के बीच बहुत बड़ा झगड़ा हुआ, जिसके बाद कमल अपने दोस्तों के साथ जश्न मनाने बाहर चले गए. आधी रात के करीब, जब कमल घर लौटे और अपने दोस्तों के साथ अपने कमरे में थे, तो पूरा बंगला गोलियों की आवाज से गूंज उठा.

गुस्से और नशे में बृज सदाना ने अपनी पत्नी सईदा और बेटी नम्रता को गोली मार दी. जैसे ही कमल कमरे से बाहर निकले, उनके पिता ने उन पर गोली चला दी, जो उनकी गर्दन को छूकर निकल गई. उनके परेशान दोस्त कमल को हॉस्पिटल ले गए. कमल तो बच गए, लेकिन उसकी मां और बहन की मौके पर ही मौत हो गई. जब हॉस्पिटल में हंगामा हो रहा था, तब घर पर अकेले मौजूद बृज सदाना ने उसी बंदूक से खुद को मार डाला.

बृज सदाना ने अपनी फिल्मों में हमेशा रोमांस और थ्रिलर दिखाया, लेकिन उनकी जिंदगी का अंत किसी डरावनी हॉरर फिल्म से भी बुरा हुआ. इस भयानक हादसे के दो साल बाद, उनके बेटे कमल सदाना ने 1992 में काजोल के साथ फिल्म ‘बेखुदी’ से बॉलीवुड में एंट्री की और 90 के दशक की कई फिल्मों में दिखे, लेकिन उस काली रात का साया उनकी जिंदगी पर हमेशा के लिए छा गया. कमल सदाना आज भी एक्टिंग में सक्रिय हैं.
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