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बॉलीवुड के ‘बादशाह’ कहे जाने वाले शाहरुख खान का सफर आसान नहीं था. एक आउटसाइडर के तौर पर सिनेमा की दुनिया में कदम रखने वाले शाहरुख खान को उनकी पहली फिल्म ‘दीवाना’ के दूसरे हाफ में कास्ट किया गया था. शुरुआती मुश्किलों और कई फ्लॉप फिल्मों के बाद, 1993 उनके करियर का एक बड़ा टर्निंग प्वाइंट साबित हुआ. जब बड़े स्टार्स भी विलेन का रोल करने से डरते थे, तब शाहरुख खान ने ‘बाजीगर’ और ‘डर’ में नेगेटिव रोल करके सबको चौंका दिया. इस बिना डरे फैसले ने उन्हें रातोंरात सुपरस्टार बना दिया, जिससे हिंदी सिनेमा को उसका सबसे बड़ा एंटी हीरो मिला.
नई दिल्ली. जब शाहरुख खान ने टीवी से फिल्मों में कदम रखा, तो उनका न तो कोई फिल्मी बैकग्राउंड था और न ही कोई गॉडफादर. 1992 में आई उनकी पहली फिल्म ‘दीवाना’ में उन्हें पूरा रोल भी नहीं मिला. फिल्म के पहले हाफ में ऋषि कपूर छाए रहे और शाहरुख खान की एंट्री इंटरवल के बाद हुई. इसके बावजूद, उनकी एनर्जी और स्क्रीन प्रेजेंस ने दर्शकों का दिल जीत लिया. इसके लिए उन्हें फिल्मफेयर बेस्ट डेब्यू अवॉर्ड मिला, लेकिन उन्हें अभी इंडस्ट्री में अपनी जगह पक्की करनी थी. (तस्वीर बनाने में एआई की मदद ली गई है.)

अपनी शुरुआती सफलता के बाद, शाहरुख खान ने ‘चमत्कार’, ‘दिल आशना है’ और ‘किंग अंकल’ जैसी फिल्मों में काम किया. हालांकि इन फिल्मों ने उनकी एक्टिंग की वर्सटैलिटी दिखाई, लेकिन वे बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म नहीं कर पाईं. ट्रेड पंडितों को शक होने लगा कि शाहरुख खान सिर्फ एक फिल्म का कमाल ही रह जाएंगे.

उस समय के दूसरे स्टार्स के मुकाबले चॉकलेटी हीरो की इमेज फीकी पड़ रही थी और शाहरुख खान को एक ऐसे ब्रेक की जरूरत थी जो उनकी पूरी इमेज बदल दे. साल 1993 बॉलीवुड की हिस्ट्री में शाहरुख खान के नाम से दर्ज है. इसी साल उन्होंने दो ऐसी फिल्मों में काम किया जिन्होंने विलेन के कॉन्सेप्ट को नया रूप दिया- ‘बाजीगर’ और ‘डर.’
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इन फिल्मों में शाहरुख ने एक ऐसे लड़के (अजय शर्मा/विक्की मल्होत्रा) का रोल किया जो अपनी गर्लफ्रेंड को छत से फेंक देता है. उन दिनों किसी भी उभरते हुए हीरो के लिए ऐसा रोल करना करियर खत्म करने वाला रिस्क था.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह रोल पहले सलमान खान और आमिर खान जैसे स्टार्स को ऑफर किया गया था, लेकिन नेगेटिव इमेज के डर से उन्होंने इसे मना कर दिया. शाहरुख खान ने चैलेंज स्वीकार किया और इस लाइन के साथ सुपरस्टार बन गए- ‘हारकर भी जीतने वाले को बाजीगर कहते हैं.’

यश चोपड़ा की फिल्म ‘डर’ में शाहरुख खान ने एक पागल प्रेमी राहुल मेहरा का रोल किया था. सनी देओल फिल्म के हीरो थे, लेकिन शाहरुख खान की ‘क-क-क-किरण’ वाली परफॉर्मेंस ने फिल्म और दर्शकों की हमदर्दी चुरा ली.

इन दोनों फिल्मों की सफलता से शाहरुख खान ने साबित कर दिया कि एक एक्टर के लिए इमेज से ज्यादा परफॉर्मेंस मायने रखती है. 1993 के बाद शाहरुख खान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. जो एक्टर अपनी पहली फिल्म में आधे रोल के लिए तरस रहा था, वह अब पूरी फिल्म इंडस्ट्री पर छा गया था. ‘अंजाम’ के साथ, उन्होंने अपनी एंटी हीरो ट्रायोलॉजी पूरी की और बाद में ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ के साथ दुनिया के सबसे बड़े रोमांटिक स्टार बन गए.
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