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बॉलीवुड के इस सुपरस्टार को आज पूरी दुनिया उनकी शानदार एक्टिंग और जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जानती है, लेकिन उनके करियर की असल कहानी बेहद सादगी भरी रही है. एक फिल्मी परिवार से होने के बावजूद उन्होंने सफलता का स्वाद चखने से पहले सेट पर झाड़ू लगाने और चाय सर्व करने जैसे जमीनी काम किए. एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर उनकी पहली कमाई महज 100 रुपये थी. फर्श से अर्श तक के इस सफर और उनकी कड़ी मेहनत ने ही उन्हें आज इस मुकाम पर पहुंचाया है.
नई दिल्ली. ऋतिक रोशन बॉलीवुड के सबसे हैंडसम सुपरस्टार हैं. अपनी शानदार एक्टिंग के लिए दीवाने हैं. सुपरस्टार बनने से बहुत पहले ही ऋतिक रोशन का फिल्म सेट से गहरा नाता जुड़ गया था. फिल्ममेकर राकेश रोशन के बेटे होने के नाते उनका बचपन कैमरा, स्क्रिप्ट्स और शूटिंग के माहौल के बीच ही बीता. उन्होंने परदे के पीछे रहकर सिनेमा की बारीकियों को बहुत करीब से देखा था.

आज भले ही ऋतिक बॉलीवुड के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं, लेकिन इस मुकाम तक पहुंचने से पहले वो भी एक आम युवा की तरह फिल्म इंडस्ट्री में अपनी जगह बनाने का सपना देख रहे थे. हम में से ज्यादातर लोग उन्हें उनकी पहली फिल्म और जबरदस्त स्क्रीन प्रेजेंस के लिए जानते हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को पता है कि उनकी शुरुआत कितनी सादगी भरी और जमीनी रही है, जिसने आगे चलकर उनके करियर को एक नई दिशा दी.

फिल्मी खानदान से ताल्लुक रखने के बावजूद ऋतिक रोशन का सफर सीधे स्टारडम से शुरू नहीं हुआ था. एक चाइल्ड आर्टिस्ट के तौर पर ऋतिक ने फिल्मों में छोटी-छोटी भूमिकाएं निभाई थीं. उन्होंने 1980 में आई फिल्म आशा में काम किया था, जिसमें जितेंद्र, रीना रॉय और रामेश्वरी लीड रोल में थे. इस फिल्म में उन्हें जितेंद्र के साथ एक डांस नंबर करने का मौका मिला.
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कहा जाता है कि अपनी इस पहली छोटी सी भूमिका के लिए ऋतिक को बतौर मेहनताना 100 रुपये मिले थे. यह भले ही एक छोटी सी रकम थी, लेकिन इसने एक बहुत बड़े सपने की बुनियाद रख दी थी. इसके बाद उन्होंने ‘आप के दीवाने’ (1980), ‘आस पास’ (1981), ‘आसरा प्यार दा’ (1983) और ‘भगवान दादा’ (1986) जैसी फिल्मों में भी छोटे-छोटे रोल किए.

सिल्वर स्क्रीन पर कदम रखने से पहले ऋतिक ने सालों तक अपने पिता के साथ ‘कोयला’, ‘करण अर्जुन’, ‘किंग अंकल’ और ‘खुदगर्ज’ जैसी फिल्मों में बतौर असिस्टेंट काम किया. एक इंटरव्यू में उन्होंने खुलासा किया था कि सेट पर उनके साथ कोई खास बर्ताव नहीं किया जाता था. उन्होंने जमीन पर झाड़ू लगाने और चाय सर्व करने से लेकर फिल्म मेकिंग की हर छोटी-बड़ी बारीकी को जमीनी स्तर पर सीखा.

ऋतिक ने यह भी बताया कि काम खत्म होने के बाद वो अक्सर अपने पिता की फिल्मों के सीन्स खुद करके देखते थे, ताकि यह जान सकें कि एक एक्टर के तौर पर उनमें सुधार हो रहा है या नहीं. डायरेक्शन को समझने से लेकर एक्टर्स की परफॉर्मेंस को करीब से देखने तक, इस दौर ने उनके हुनर और काम के प्रति उनके नजरिए को गढ़ने में बड़ी भूमिका निभाई.

उनकी यह बरसों की मेहनत साल 2000 में फिल्म कहो ना प्यार है के साथ रंग लाई. उनके पिता राकेश रोशन ने उन्हें लॉन्च किया और इस फिल्म ने ऋतिक रोशन को रातों-रात सुपरस्टार बना दिया. अमीषा पटेल के साथ उनकी यह फिल्म उस साल की सबसे बड़ी हिट साबित हुई. इसके बाद ऋतिक ने पीछे मुड़कर नहीं देखा और एक के बाद एक कई हिट फिल्में दीं, जिससे बॉलीवुड में उनकी पहचान एक वर्सेटाइल और भरोसेमंद एक्टर के तौर पर पक्की हो गई.

ऋतिक रोशन को बॉलीवुड का ग्रीक गॉड कहा जाता है. उन्होंने ‘कोई मिल गया’, ‘कृष’, ‘कृष 3’, ‘धूम 2’, ‘जोधा अकबर’, ‘वॉर’, ‘फाइटर’ और ‘वॉर 2’ जैसी एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दी हैं. हर नई फिल्म के साथ उन्होंने न केवल दर्शकों का दिल जीता, बल्कि अपनी एक्टिंग, स्क्रीन प्रेजेंस से हर बार सफलता के नए पैमानों को छुआ है. उनकी वर्सेटिलिटी ही उन्हें इंडस्ट्री के सबसे बड़े और खास कलाकारों की कतार में खड़ा करती है.
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