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आज के दौर में कुछ फिल्में ऐसी होती हैं, जो बड़े पर्दे पर तो नहीं चमक पातीं, लेकिन OTT प्लेटफॉर्म के छोटे पर्दे पर आते ही छा जाती हैं. इस लिस्ट में लेटेस्ट नाम है फिल्म ‘बाइकर’ का, जिसने थिएटर में तो शांत शुरुआत की, लेकिन अब नेटफ्लिक्स पर रिलीज होते ही ट्रेंडिंग लिस्ट में अपनी जगह बना ली है. यह फिल्म सिर्फ एक स्पोर्ट्स ड्रामा नहीं है, बल्कि एक पिता और बेटे के बीच बनने वाले मुश्किल रिश्ते, संघर्ष और जुनून की एक अनोखी कहानी है, जो दर्शकों को आखिर तक बांधे रखती है. फिल्म की सबसे बड़ी खासियत इसका क्लाइमैक्स है, जो इतना हैरान करने वाला है कि यकीनन आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे.
नई दिल्ली. स्पोर्ट्स ड्रामा हमेशा से फिल्मों में एक प्रेरणा का सोर्स रहे हैं. वहीं, जब परिवार और रिश्तों के संघर्षों को स्पोर्ट्स के साथ जोड़ा जाता है, तो कहानी एक नया मोड़ ले लेती है. 3 अप्रैल 2026 को थिएटर में रिलीज हुई तेलुगु फिल्म ‘बाइकर’ ऐसी ही एक फिल्म है. ₹45 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने थिएटर में उम्मीद के मुताबिक अच्छा परफॉर्म नहीं किया, लेकिन अब नेटफ्लिक्स पर इसके डिजिटल प्रीमियर ने इसे नई जान दे दी है.

फिल्म की कहानी दो मेन कैरेक्टर्स पर फोकस करती है- एक पिता (राजशेखर) और उसका बेटा (शरवानंद). कहानी दिखाती है कि कैसे एक कॉमन पैशन बाइकिंग उनके बीच नफरत और प्यार की दीवारें खड़ी कर देता है. राजशेखर एक पुराने चैंपियन बाइकर का रोल कर रहे हैं, जिसके अपने जिद्दीपन और उसूल हैं, जबकि शरवानंद एक उभरते हुए यंग बाइकर का रोल कर रहे हैं, जो अपने पिता की छाया से बाहर निकलकर अपनी पहचान बनाना चाहता है.

दोनों एक्टर्स के बीच ऑन-स्क्रीन टेंशन इतनी साफ है कि ऑडियंस सिचुएशन में गहराई से शामिल महसूस करती है. अभिलाष रेड्डी कंकरा ने फिल्म को बहुत सीरियसली डायरेक्ट और लिखा है. फिल्म का रनिंग टाइम 162 मिनट है, जो एक स्पोर्ट्स ड्रामा के हिसाब से लंबा लग सकता है, लेकिन स्क्रीनप्ले अच्छी तरह से बनाया गया है और आपको बोर नहीं करता.
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फिल्म की सिनेमैटोग्राफी जे. युवराज ने की है, जो रेसिंग ट्रैक के सीन को बहुत खूबसूरती और स्पीड के साथ कैप्चर करते हैं. घिबरन वैबोधा का म्यूजिक फिल्म के इमोशनल सीन में गहराई जोड़ता है.

‘बाइकर’ की सबसे बड़ी ताकत इसके आखिरी आधे घंटे में है. जहां दर्शक एक सिंपल रेसिंग कॉम्पिटिशन की उम्मीद करते हैं, वहीं कहानी एक ऐसा मोड़ लेती है जो पूरी फिल्म का नजरिया बदल देती है. क्लाइमैक्स में जिस तरह से पिता-बेटे का रिश्ता सामने आता है और जो कुर्बानी दिखाई जाती है, वह काफी अनएक्सपेक्टेड है.

यही वजह है कि फिल्म का एंडिंग सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चा का विषय है. बॉक्स ऑफिस पर भले ही यह फिल्म एवरेज रही, लेकिन नेटफ्लिक्स जैसे ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर रिलीज होने के बाद, इसे हिंदी, तमिल और मलयालम में दर्शकों का भरपूर प्यार मिलता दिख रहा है. इससे साबित होता है कि भाषा और बड़ा पर्दा अब अच्छी कहानियों के लिए रुकावट नहीं हैं.

फिल्म में मालविका नायर और अतुल कुलकर्णी जैसे अनुभवी एक्टर भी अहम रोल में हैं, जो कहानी को मजबूत बनाते हैं. कुल मिलाकर ‘बाइकर’ उन लोगों के लिए एक बढ़िया च्वाइस है जो सिर्फ एक्शन नहीं, बल्कि अच्छी कहानी और दमदार परफॉर्मेंस पसंद करते हैं. अगर आपने इसे अभी तक नहीं देखा है, तो इस अनोखी पिता-पुत्र की कहानी को अपनी वीकेंड लिस्ट में जरूर शामिल करें.
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