अनपरा / सोनभद्र / एबीएन न्यूज। बुधवार शाम आए तेज तूफान ने एनटीपीसी रिहंद परियोजना के ऐश डाइक से उड़कर निकली राख को आसपास के गांवों तक पहुंचा दिया, जिससे डोडहर, नेमना, नकटू, सिरसोती, बीजपुर समेत कई गांवों में अफरा-तफरी और भारी परेशानी का माहौल बन गया। सुबह जब ग्रामीण घरों की सफाई में जुटे तो राख की मोटी परत का वास्तविक असर सामने आया।
ग्रामीणों के अनुसार घरों के अंदर झाड़ू-पोछा करने पर तीन से चार किलो तक राख निकली। खाने-पीने की सामग्री, कपड़े, बिस्तर और घरेलू सामान राख से खराब हो गए। कई घरों की छतों पर राख के ढेर जमा दिखाई दिए। घंटों तक चली सफाई के दौरान लोग परेशान नजर आए और उनके चेहरों पर एनटीपीसी प्रबंधन की कथित लापरवाही को लेकर नाराजगी साफ दिखाई दी।
तूफान का असर बिजली व्यवस्था पर भी पड़ा। जानकारी के अनुसार कई स्थानों पर पेड़ और 33 केवीए बिजली पोल गिर जाने से बीजपुर, नधिरा, बभनी और कुंडाडीह उपकेंद्रों से जुड़े लगभग 100 गांवों की विद्युत आपूर्ति बाधित हो गई। कई इलाकों में एक से दो दिन तक अंधेरा पसरा रहा। बिजली संकट के कारण पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित हुई, जिससे ग्रामीणों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
ग्रामीणों का आरोप है कि गर्मी के मौसम में राख उड़ने की समस्या हर वर्ष गंभीर हो जाती है, लेकिन एनटीपीसी प्रबंधन द्वारा ऐश डाइक पर पर्याप्त पानी का छिड़काव नहीं कराया जाता। डोडहर और सिरसोती गांव के ग्रामीणों ने कहा कि गर्मी शुरू होने से पहले राख पर मिट्टी डालकर उसे ढंकना चाहिए, ताकि उड़ने वाली राख पर नियंत्रण किया जा सके।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रबंधन की लापरवाही के चलते क्षेत्र के लोग केमिकल युक्त राख से होने वाले प्रदूषण और स्वास्थ्य संबंधी खतरों को झेलने के लिए मजबूर हैं। लोगों ने प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण विभाग से मामले की जांच कर प्रभावी कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से राहत मिल सके।
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