सोनभद्र/एबीएन न्यूज। एनटीपीसी रिहंद परियोजना से जुड़े राख परिवहन कार्य में मंगलवार को उस समय बड़ा व्यवधान उत्पन्न हो गया, जब स्थानीय ट्रांसपोर्टरों और ट्रक मालिकों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सिरसोती स्थित कांटा मशीन के पास अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया। धरने के चलते राख परिवहन का कार्य पूरी तरह ठप हो गया, जिससे परियोजना क्षेत्र में परिवहन गतिविधियां प्रभावित हो गईं और सैकड़ों वाहन सड़क किनारे खड़े हो गए।
धरना दे रहे ट्रक मालिकों और वाहन संचालकों का आरोप है कि एनटीपीसी से राख परिवहन का ठेका लेने वाले ठेकेदारों को उच्च दरों पर भुगतान किया जा रहा है, जबकि वास्तविक परिवहन का कार्य करने वाले स्थानीय ट्रक मालिकों को बेहद कम दरों पर काम करने के लिए मजबूर किया जा रहा है। उनका कहना है कि मौजूदा परिवहन दरों में डीजल, वाहन रखरखाव, बीमा, बैंक ऋण की किश्तें तथा चालक एवं परिचालकों के वेतन का खर्च निकालना भी कठिन हो गया है।
धरनारत ट्रांसपोर्टरों के अनुसार 16 चक्का वाहनों की निर्धारित पासिंग क्षमता 31 टन है और उसी मानक के अनुसार परिवहन कार्य किए जाने पर उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि बढ़ती महंगाई और परिचालन लागत के बावजूद कई वर्षों से परिवहन दरों में कोई संतोषजनक संशोधन नहीं किया गया है, जिससे वाहन मालिकों की आर्थिक स्थिति लगातार कमजोर होती जा रही है।
बढ़ती लागत से परेशान ट्रांसपोर्टर
ट्रक यूनियन अध्यक्ष मनोज वैश्य ने कहा कि डीजल की कीमतों में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन परिवहन दरें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। उन्होंने बताया कि कई ट्रक मालिकों की हालत इतनी खराब हो चुकी है कि वे पिछले कई महीनों से अपने ड्राइवरों और कर्मचारियों का वेतन समय पर नहीं दे पा रहे हैं। इसके अलावा बैंक ऋण की किश्तें, टायर, स्पेयर पार्ट्स और वाहन मरम्मत पर आने वाला खर्च भी लगातार बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि यदि वर्तमान परिस्थितियों में भी दरों में वृद्धि नहीं की गई तो कई वाहन मालिकों के सामने अपने व्यवसाय को बंद करने की नौबत आ सकती है। ट्रांसपोर्टरों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस और सकारात्मक निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक राख परिवहन का कार्य पूरी तरह बंद रहेगा और आंदोलन जारी रहेगा।
सड़कों पर लगी वाहनों की लंबी कतार
धरने के कारण राख परिवहन में लगी सैकड़ों गाड़ियां सड़क के दोनों ओर खड़ी हो गईं, जिससे क्षेत्र में लंबा जाम जैसी स्थिति उत्पन्न हो गई। परिवहन कार्य ठप होने से परियोजना की लॉजिस्टिक व्यवस्था भी प्रभावित होने की संभावना जताई जा रही है।

ट्रांसपोर्टरों को मिला समर्थन
धरना स्थल पर पहुंचे पूर्व जिला पंचायत सदस्य केदार यादव ने ट्रक मालिकों की मांगों को न्यायसंगत बताते हुए अपना समर्थन व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि परिवहन व्यवस्था किसी भी औद्योगिक परियोजना की महत्वपूर्ण कड़ी होती है और ट्रांसपोर्टरों की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि राख परिवहन के कारण आसपास के गांवों में प्रदूषण, धूल और अन्य पर्यावरणीय समस्याएं बढ़ रही हैं, जिस पर भी एनटीपीसी प्रबंधन और संबंधित एजेंसियों को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
धरने में विजय यादव, प्रेमधारी, मोशिम खान, पुष्पराज यादव, राजेश यादव, कमलेश केशरी, बबलू, बृजेन्द्र कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में ट्रक एसोसिएशन के पदाधिकारी, वाहन मालिक और चालक उपस्थित रहे। ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित ठेकेदारों और प्रबंधन की होगी।
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