सनातन संस्कृति, राष्ट्रीय अस्मिता और भारत के भविष्य पर होगा व्यापक मंथन, आयोजन को लेकर क्षेत्र में उत्साह
अनपरा/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। ऊर्जांचल जनकल्याण समिति के तत्वावधान में रविवार को अनपरा तापीय परियोजना स्थित ऑडिटोरियम में “सनातन और भारतवर्ष (कल, आज और कल)” विषय पर एक भव्य वैचारिक एवं ज्ञानवर्धक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम को लेकर पूरे ऊर्जांचल क्षेत्र में उत्साह का माहौल है तथा आयोजन समिति तैयारियों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।
समिति के सहयोगी एवं समाजसेवी आर.जी. खंडेवाल ने बताया कि भारत की सनातन संस्कृति, गौरवशाली परंपराओं, राष्ट्रीय अस्मिता और भविष्य की दिशा पर सार्थक संवाद स्थापित करने के उद्देश्य से इस विशेष कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों, राष्ट्र की विरासत और सनातन मूल्यों से जोड़ना अत्यंत आवश्यक है, जिससे उनमें राष्ट्र निर्माण के प्रति सकारात्मक सोच और जागरूकता विकसित हो सके।
कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि प्रख्यात चिंतक एवं ओजस्वी वक्ता पुष्पेन्द्र कुलश्रेष्ठ पहली बार अनपरा में अपने विचार प्रस्तुत करेंगे। उनके उद्बोधन को सुनने के लिए सोनभद्र, सिंगरौली तथा आसपास के क्षेत्रों से बड़ी संख्या में बुद्धिजीवी, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद एवं सनातन संस्कृति के प्रति आस्था रखने वाले नागरिकों के पहुंचने की संभावना है।
आयोजन में राम सकल मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे, जबकि विशिष्ट अतिथियों में वीरेन्द्र गोयल, के.पी. सिंह तथा के.डी. जैन शामिल होंगे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आनन्द कुमार सिंह करेंगे।
कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए समिति के सदस्य लगातार जनसंपर्क अभियान चला रहे हैं। क्षेत्रभर में बैनर, पोस्टर, होर्डिंग एवं आमंत्रण पत्रों के माध्यम से लोगों को कार्यक्रम की जानकारी दी जा रही है। आयोजन की व्यवस्थाओं की समीक्षा एवं अंतिम तैयारियों को लेकर समिति की विशेष बैठक भी आयोजित की गई, जिसमें विभिन्न व्यवस्थाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। कार्यक्रम में प्रशासनिक अधिकारियों सहित उपजिलाधिकारी दुद्धी को भी आमंत्रित किया गया है।
समाजसेवी आर.जी. खंडेवाल ने क्षेत्रवासियों, युवाओं, शिक्षाविदों तथा सामाजिक संगठनों से अधिक से अधिक संख्या में सपरिवार उपस्थित होकर कार्यक्रम को सफल बनाने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक व्याख्यान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय गौरव और सनातन मूल्यों पर गंभीर चिंतन एवं मंथन का अवसर प्रदान करेगा। समिति ने इसे ऊर्जांचल क्षेत्र के लिए एक ऐतिहासिक, प्रेरणादायी और विचारोत्तेजक आयोजन बताया है।
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