गोरखपुर/लखनऊ/एबीएन न्यूज। यात्रियों को बेहतर एवं स्वस्थ वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में पूर्वोत्तर रेलवे के लखनऊ मंडल ने एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए गोरखपुर रेलवे स्टेशन के प्रवेश द्वार संख्या-01 पर अत्याधुनिक ‘पर्यावरण निगरानी तंत्र’ (Environmental Monitoring System) स्थापित किया है। इस प्रणाली के माध्यम से स्टेशन पर आने वाले यात्रियों, रेल कर्मचारियों एवं आमजन को 24 घंटे पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण मानकों की वास्तविक समय (रियल टाइम) जानकारी उपलब्ध होगी।
रेलवे द्वारा स्थापित 6×4 फीट के डिजिटल प्रदर्शन पट (डिजिटल डिस्प्ले बोर्ड) पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) सहित पर्यावरण और मौसम से संबंधित विभिन्न मानकों का लगातार प्रदर्शन किया जाएगा। इसके माध्यम से लोग यह जान सकेंगे कि स्टेशन परिसर की हवा कितनी स्वच्छ या प्रदूषित है तथा स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से वर्तमान स्थिति कैसी है।
इस डिजिटल प्रणाली पर वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) के साथ-साथ कार्बन मोनोऑक्साइड (CO), कार्बन डाइऑक्साइड (CO₂), नाइट्रोजन डाइऑक्साइड (NO₂) एवं सल्फर डाइऑक्साइड (SO₂) जैसी गैसीय प्रदूषकों का स्तर प्रदर्शित किया जाएगा। इसके अलावा PM2.5 एवं PM10 जैसे सूक्ष्म कणों की मात्रा, वास्तविक समय का तापमान तथा वातावरण में नमी (आर्द्रता) की जानकारी भी यात्रियों को उपलब्ध होगी।
मंडल रेल प्रबंधक श्री गौरव अग्रवाल ने कहा कि रेलवे की यह पहल यात्रियों एवं रेल कर्मचारियों को पर्यावरण संबंधी सटीक एवं अद्यतन जानकारी उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि इस अत्याधुनिक प्रणाली से लोग वायु गुणवत्ता और पर्यावरणीय परिस्थितियों के प्रति अधिक जागरूक होंगे तथा आवश्यकतानुसार स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां भी अपना सकेंगे।
रेलवे अधिकारियों के अनुसार वर्तमान में गोरखपुर में प्रदर्शित सभी प्रमुख पर्यावरणीय मानक संतोषजनक एवं अनुकूल स्तर पर हैं। इससे यह संदेश भी जाता है कि गोरखपुर अपेक्षाकृत स्वच्छ एवं बेहतर पर्यावरण वाला शहर है, जो आमजन और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
पूर्वोत्तर रेलवे ने बताया कि गोरखपुर में इस प्रणाली की सफलता के बाद लखनऊ मंडल के अंतर्गत तीन अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर भी शीघ्र ही ‘पर्यावरण निगरानी तंत्र’ स्थापित किए जाएंगे। रेलवे का उद्देश्य आधुनिक तकनीक के माध्यम से यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण एवं जन-जागरूकता को भी बढ़ावा देना है।
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