नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा का इतिहास सिर्फ पर्दे पर दिखने वाली कहानियों से नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे घटी उन सच्ची और रोमांचक घटनाओं से भी बना है, जिन्हें सुनकर आज भी रोंगटे खड़े हो जाते हैं. ऐसा ही एक बेहद दिलचस्प और हैरान कर देने वाला किस्सा दिग्गज अभिनेत्री वहीदा रहमान ने मशहूर टॉक शो ‘जीना इसी का नाम है’ में साझा किया था. यह वाकया साल 1963 में आई कल्ट क्लासिक फिल्म ‘मुझे जीने दो’ की शूटिंग के दौरान का है, जब चंबल की घाटी में अचानक कुछ ऐसा हुआ जिसने पूरी स्टारकास्ट के होश उड़ा दिए थे.
वहीदा रहमान ने सुनील दत्त के साथ ‘मुझे जीने दो’ और ‘रेशमा और शेरा’ जैसी कई बेहतरीन फिल्मों में काम किया. वह बताती हैं कि सुनील दत्त अपनी फिल्मों के लिए हमेशा बेहद खूबसूरत लेकिन चुनौतीपूर्ण लोकेशंस चुनते थे. ‘मुझे जीने दो’ की शूटिंग के लिए उन्होंने चंबल घाटी को चुना था, जहां पूरी यूनिट टेंट लगाकर रह रही थी.
सेट पर भड़क उठते थे सुनील दत्त
फिल्म में सुनील दत्त डाकू ‘ठाकुर जरनैल सिंह’ का मुख्य किरदार निभा रहे थे. वहीदा रहमान के मुताबिक, सुनील दत्त इस किरदार में इस कदर डूब चुके थे कि उन्होंने असल जिंदगी में भी मुस्कुराना छोड़ दिया था. वह हर समय गंभीर रहते और सेट पर मौजूद लोगों के साथ बेहद कड़क रवैया अपनाते थे. इसी बीच, सुनील दत्त की पत्नी और मशहूर एक्ट्रेस नरगिस दत्त अपने ढाई साल के बेटे संजय दत्त को लेकर चंबल के सेट पर पहुंचीं. नरगिस को देखते ही वहीदा रहमान उनके पास गईं और मजाकिया लेकिन परेशान लहजे में सुनील दत्त की शिकायत कर दी.
वहीदा रहमान ने नरगिस से कहा, ‘नरगिस, अपने पति को समझाइए. ये असल जिंदगी में भी डाकू की तरह क्यों व्यवहार कर रहे हैं? ये तो बिल्कुल हिटलर जैसे हो गए हैं. हर समय हर किसी पर नजर रखते हैं और पूछते रहते हैं कहां जा रहे हो? क्यों आ रहे हो?’
नरगिस-वहीदा रहमान पर भड़क उठे थे संजय दत्त
नरगिस के आने के करीब तीन दिन बाद, एक दोपहर वहीदा रहमान, निरुपा रॉय और नरगिस दत्त एक घाट के किनारे बैठकर आराम से खाना खा रही थीं और बातें कर रही थीं. माहौल बिल्कुल शांत था, लेकिन तभी अचानक वहां सुनील दत्त पहुंचे. उनके चेहरे पर हवाइयां उड़ी हुई थीं और वह अचानक जोर-जोर से चिल्लाने लगे. अचानक इस तरह चिल्लाने पर नरगिस ने हैरान होकर पूछा, ‘आखिर हुआ क्या है?’. इस पर सुनील दत्त ने गुस्से में कहा, “आप बहुत सवाल पूछती हैं, बस जैसा कह रहा हूं वैसा कीजिए और तुरंत उठिए’. तीनों अभिनेत्रियां एक-दूसरे का मुंह ताकती रह गईं कि आखिर सुनील दत्त को क्या हो गया है.
डाकुओं की एक्ट्रेस पर थी बुरी नजर
कुछ ही पलों में वहां का नजारा पूरी तरह बदल गया. सुनील दत्त अकेले नहीं थे, उनके साथ बीएसएफ (सीमा सुरक्षा बल) के कमांडर भी थे. उनके गंभीर चेहरे देखकर साफ था कि मामला कोई मामूली नहीं, बल्कि बेहद संगीन है. कमांडर ने तुरंत आदेश दिया, ‘लेडीज, जल्दी उठिए और जीप में बैठ जाइए.’. वहां तीन जीपें खड़ी की गईं.
वहीदा रहमान, नरगिस और निरुपा रॉय को बीच वाली सुरक्षित जीप में बैठाया गया, जबकि आगे और पीछे की जीपों में हथियारों से लैस बीएसएफ के जवान तैनात थे. दरअसल, पुलिस और सेना को खुफिया इनपुट मिला था कि चंबल के असली डाकुओं के गिरोह को फिल्म की शूटिंग और वहां फिल्मी सितारों की मौजूदगी की खबर लग गई थी. डाकू किसी बड़ी अनहोनी या अपहरण की फिराक में थे.
सुनील दत्त ने बचाई जान
सुनील दत्त असल में हिटलर नहीं बने थे, बल्कि वह चंबल के खतरनाक माहौल को भांप चुके थे और अपनी पूरी टीम, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को लेकर बेहद डरे हुए थे. यही वजह थी कि वह हर किसी के आने-जाने पर सख्त नजर रख रहे थे. जब यह सच सामने आया, तो हर कोई दंग रह गया.









