सोनभद्र/एबीएन न्यूज। जनपद में बालिकाओं के सशक्तिकरण, शिक्षा को बढ़ावा देने तथा उनके सुरक्षित एवं उज्ज्वल भविष्य के निर्माण के उद्देश्य से संचालित मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना प्रभावी रूप से लाभ पहुंचा रही है। योगी सरकार की इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत सोनभद्र में अब तक 26,341 बालिकाएं लाभान्वित हो चुकी हैं। जन्म से लेकर स्नातक अथवा डिप्लोमा स्तर तक छह चरणों में कुल 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजी जा रही है। योजना बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने के साथ-साथ बाल विवाह पर रोक और लिंगानुपात में सुधार की दिशा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
जिलाधिकारी श्री चर्चित गौड़ ने बताया कि जनपद में मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना का व्यापक लाभ पात्र परिवारों तक पहुंचाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि अब तक कुल 26,341 बालिकाओं को योजना से लाभान्वित किया जा चुका है। चालू वित्तीय वर्ष में भी योजना के प्रति लोगों का उत्साह बना हुआ है और अब तक 1,117 नए आवेदनों को स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार की यह योजना बेटियों के जन्म से लेकर उच्च शिक्षा तक आर्थिक संबल प्रदान कर उनके आत्मनिर्भर भविष्य की मजबूत नींव रख रही है।
जिलाधिकारी ने बताया कि योजना का प्रमुख उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीतियों पर अंकुश लगाना, बालिकाओं के जन्म को प्रोत्साहित करना, उनकी शिक्षा सुनिश्चित करना तथा आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को सहयोग प्रदान करना है। योजना के तहत पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन एवं पारदर्शी रखी गई है तथा सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाती है, जिससे किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना नहीं रहती।
छह चरणों में मिलती है आर्थिक सहायता
मुख्यमंत्री कन्या सुमंगला योजना के अंतर्गत बालिका को जन्म से लेकर स्नातक अथवा दो वर्षीय या उससे अधिक अवधि के डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश तक छह चरणों में कुल 25 हजार रुपये की सहायता प्रदान की जाती है। प्रथम चरण में जन्म के एक वर्ष के भीतर 5,000 रुपये, द्वितीय चरण में पूर्ण टीकाकरण के बाद 2,000 रुपये, तृतीय चरण में कक्षा एक में प्रवेश पर 3,000 रुपये तथा चतुर्थ चरण में कक्षा छह में प्रवेश पर 3,000 रुपये दिए जाते हैं। पंचम चरण में कक्षा नौ में प्रवेश लेने पर 5,000 रुपये की सहायता मिलती है। अंतिम एवं षष्ठम चरण में कक्षा 10 अथवा 12 उत्तीर्ण करने के बाद स्नातक या दो वर्षीय अथवा उससे अधिक अवधि के डिप्लोमा पाठ्यक्रम में प्रवेश लेने पर 7,000 रुपये की एकमुश्त सहायता प्रदान की जाती है। विभागीय आंकड़ों के अनुसार योजना का सर्वाधिक लाभ जन्म एवं टीकाकरण के चरण में प्राप्त हुआ है।
योजना का लाभ लेने के लिए निर्धारित हैं पात्रता के मानक
योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए लाभार्थी परिवार की वार्षिक आय तीन लाख रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए। साथ ही परिवार में अधिकतम दो संतान होने का प्रावधान है तथा सामान्य स्थिति में एक परिवार की अधिकतम दो बालिकाओं को ही योजना का लाभ दिया जाता है। हालांकि शासन ने विशेष परिस्थितियों के लिए अलग व्यवस्था भी की है। यदि किसी परिवार में प्रथम प्रसव से एक पुत्री हो तथा दूसरे प्रसव में जुड़वां पुत्रियों का जन्म हो, तो ऐसी स्थिति में तीनों बालिकाओं को योजना का लाभ प्रदान किया जाएगा।
जिला प्रशासन ने पात्र परिवारों से योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील करते हुए कहा है कि आवेदन प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन एवं पारदर्शी है। योजना का उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराना ही नहीं, बल्कि बेटियों के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करना, उनकी शिक्षा को प्रोत्साहित करना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मजबूत आधार तैयार करना भी है।
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