अनपरा/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। शहीद स्थल प्रबंधन ट्रस्ट, करारी के तत्वावधान में रविवार को शहीद स्थल परिसर में भव्य काव्य संध्या एवं सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में देशभक्ति, सामाजिक सरोकार, हास्य, गजल और लोकगीतों की प्रस्तुतियों से साहित्य प्रेमी देर शाम तक मंत्रमुग्ध रहे। इस अवसर पर साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए वरिष्ठ साहित्यकार सीताराम राय ‘विक्रांत बनारसी’ को ‘साहित्य शिरोमणि अलंकरण’ से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार एवं कथाकार रामनाथ शिवेन्द्र ने की। समारोह का शुभारंभ मुख्य अतिथि सीताराम राय ‘विक्रांत बनारसी’, कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान तथा अन्य अतिथियों ने शहीदों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण एवं श्रद्धासुमन अर्पित कर किया। इसके बाद सुधाकर पांडेय ‘स्वदेश प्रेम’ ने राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत वाणी वंदना प्रस्तुत कर काव्य संध्या का शुभारंभ किया।
सम्मान समारोह में सीताराम राय ‘विक्रांत बनारसी’ को साहित्य जगत में उनके दीर्घकालीन योगदान के लिए साहित्य शिरोमणि अलंकरण से विभूषित किया गया। उन्हें नकद सम्मान राशि, अंगवस्त्र, प्रतीक चिह्न, अभिनंदन पत्र, लेखनी, डायरी एवं साहित्यिक कृति भेंट कर सारस्वत सम्मान प्रदान किया गया। उपस्थित साहित्यकारों एवं श्रोताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट के बीच उनका अभिनंदन किया।
कार्यक्रम का संयोजन एवं संचालन प्रद्युम्न त्रिपाठी एडवोकेट ने किया। उन्होंने अपनी रचना “गंगा ओ जमन हो, महकता चमन हो, आदमी सा मन हो, शहादत नमन हो” सुनाकर देशभक्ति का संदेश दिया। कवयित्री कौशल्या कुमारी चौहान ने “जान दे दूंगी अपने वतन के लिए…” जैसी ओजपूर्ण रचना प्रस्तुत कर देशप्रेम और राष्ट्रीय एकता का संदेश दिया, जिसे श्रोताओं ने खूब सराहा।
कवि दिलीप सिंह ‘दीपक’ ने “बुजुर्गों ने लहू देकर रखी है आबरू इसकी…” के माध्यम से राष्ट्रहित और सामाजिक चेतना का संदेश दिया। अशोक तिवारी ने प्रेम और संवेदनाओं से भरपूर शायरी प्रस्तुत कर श्रोताओं को भाव-विभोर किया। सुधाकर पांडेय ‘स्वदेश प्रेम’ ने “तिरंगे में सजे अर्थी…” जैसी राष्ट्रभक्ति से ओतप्रोत रचना सुनाकर वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रभात सिंह चंदेल ने अपने ओजस्वी काव्य पाठ से देशभक्ति का जोश भर दिया, जबकि सोन संगीत फाउंडेशन के सुशील मिश्रा ने लोकगीतों की प्रस्तुति देकर वातावरण को ऊर्जावान बना दिया। दिवाकर द्विवेदी ‘मेघ’ ने सामाजिक विसंगतियों पर गंभीर रचनाओं के साथ-साथ हास्य कविता प्रस्तुत कर श्रोताओं को सोचने और मुस्कुराने दोनों का अवसर दिया। धर्मेश चौहान की हास्य रचनाओं ने खूब ठहाके बटोरे, वहीं विवेक चतुर्वेदी ‘शायर’ ने अपनी गजल एवं नज्मों से साहित्यिक रस घोला।
सम्मानित साहित्यकार सीताराम राय ‘विक्रांत बनारसी’ ने अपनी रचनाओं के माध्यम से देशभक्ति, बलिदान, सामाजिक सरोकार और समकालीन परिस्थितियों पर प्रभावी विचार व्यक्त किए। उनकी प्रस्तुतियों को श्रोताओं ने खूब सराहा।
अध्यक्षीय उद्बोधन में वरिष्ठ साहित्यकार रामनाथ शिवेन्द्र ने साहित्य की सामाजिक भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा कि साहित्य समाज को दिशा देने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द, मानवीय संवेदनाओं और सामाजिक सरोकारों पर आधारित अपनी रचनाओं का पाठ कर कार्यक्रम को नई ऊंचाई प्रदान की।
समारोह के अंत में सभी आमंत्रित कवियों एवं साहित्यकारों को अंगवस्त्र एवं माल्यार्पण कर सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का आभार ज्ञापन ऋषभ त्रिपाठी ने किया।
इस अवसर पर बृज किशोर देव पांडेय, पुरुषोत्तम कुशवाहा, ठाकुर कुशवाहा, नीरज त्रिपाठी, सुनील देव, फारुख अली हाश्मी, विजयानंद चौहान, आद्या, अंशिका, शिव मोचन, अनमोल पांडेय, ममता, समता, ऋचा, विजयशंकर त्रिपाठी सहित बड़ी संख्या में साहित्यप्रेमी एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
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