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आज देश के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक का नाम हर तरफ गूंज रहा है. वह 4000 करोड़ की लागत में बन रही फिल्म का विलेन है. मगर इस कामयाबी के पीछे एक्टर का एक ऐसा संघर्ष है, जिसे सुनकर किसी की भी आंखें नम हो जाएं. कभी पिता दिनभर की कड़ी मेहनत के बाद सिर्फ 14 रुपये कमा पाते थे. जेब में फूटी कौड़ी न होने की वजह से एक्टर को बेंगलुरु की सड़कों पर रातें गुजारनी पड़ी थीं. सबसे दिलचस्प बात तो यह है कि जब बेटा कामयाबी के शिखर पर पहुंच गया और करोड़ों में खेलने लगा, तब भी पिता ने अपनी सादगी नहीं छोड़ी और रिटायरमेंट के आखिरी दिन तक बस ड्राइवर की अपनी नौकरी जारी रखी.
नई दिल्ली. एक आम हाउसवाइफ और बस ड्राइवर के बेटे यश आज भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक हैं. फैंस प्यार से उन्हें रॉकी भाई कहते हैं. उन्होंने ‘केजीएफ’ फ्रेंचाइजी के जरिए कन्नड़ सिनेमा को दुनियाभर में पहचान दिलाई और अब वह ‘रामायण’ को लेकर लगातार चर्चा में हैं. वह इस फिल्म के को-प्रोड्यूसर भी हैं, जो करीब 4000 करोड़ रुपये के भारी-भरकम बजट पर बनाई जा रही है.

बहुत कम लोग जानते होंगे कि स्टारडम और कामयाबी का स्वाद चखने से बहुत पहले यश महज 300 रुपये लेकर घर से भाग आए थे. उनके पिता दिन के सिर्फ 14 रुपये कमाते थे, इसलिए घर में पैसों की भारी तंगी रहती थी. बेंगलुरु आने के बाद यश को सड़कों पर सोना पड़ा. ऐसी ही एक रात, जब उन्हें पुलिस द्वारा खदेड़े जाने का डर सता रहा था, उन्होंने खुद से वादा किया कि एक दिन वह बहुत बड़े सुपरस्टार बनेंगे.

यश का यह सफर कर्नाटक के हासन जिले के एक बेहद साधारण परिवार से शुरू हुआ था. उनके पिता एक बस ड्राइवर थे, जो परिवार का पेट पालने के लिए दिन-रात मेहनत करते थे. कन्नड़ फिल्म इंडस्ट्री में कुछ बड़ा मुकाम हासिल करने की जिद लिए यश एक्टिंग के सपने संजोकर बेंगलुरु आ गए. साल 2007 में फिल्म ‘जम्बाडा हुडुगी’ से अपने फिल्मी करियर की शुरुआत करने से पहले उन्हें टीवी सीरियल ‘सिल्ली लल्ली’ से पहला ब्रेक मिला था.
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बेंगलुरु में बस ड्राइवर के तौर पर काम करने वाले यश के पिता ने एक बार जी कन्नड़ के शो ‘वीकेंड विद रमेश’ में अपने परिवार के उन मुश्किल दिनों को याद किया था. उन्होंने बताया था, ‘मैं एक दिन में सिर्फ 14 रुपये कमाता था. यश को एक अच्छी जिंदगी देने के लिए मैंने बहुत पापड़ बेले हैं. मैं एक सख्त पिता था और मैं बस यह पक्का करना चाहता था कि वह कभी किसी गलत रास्ते पर न भटके. आज जब पीछे मुड़कर देखता हूं, तो लगता है कि मेरी वह सारी मेहनत सफल हो गई.’

यहां तक कि जब यश एक कामयाब एक्टर बन गए, तब भी उनके पिता ने रिटायरमेंट तक अपनी बस ड्राइवर की नौकरी नहीं छोड़ी. यश ने बताया, ‘लोग अक्सर हमें ताने मारते थे कि बेटा तो ऑडी कार में घूमता है और पिता अब भी बस चलाता है. लेकिन यह मेरे पापा का अपना फैसला था. वह अपनी नौकरी के बचे हुए साल पूरे करना चाहते थे. यश ने आगे कहा कि वे दोनों कभी भी अपनी शुरुआत के दिनों को भूलना नहीं चाहते थे.’

यश ने साल 2019 में द न्यूज मिनट के साथ इंटरव्यू के दौरान बताया था, ‘मैं अपने घर से भाग गया था. जब मैं बेंगलुरु पहुंचा, तो पैर रखते ही एक पल के लिए डर गया था. इतना बड़ा और डरावना शहर था वो. लेकिन मेरे अंदर कॉन्फिडेंस हमेशा से था,. मैं संघर्ष करने से कभी नहीं डरा. जब मैं बेंगलुरु पहुंचा तो मेरी जेब में सिर्फ 300 रुपये थे. मुझे पता था कि अगर मैं वापस घर गया, तो मेरे पेरेंट्स मुझे दोबारा यहां कभी नहीं आने देंगे. उन्होंने मुझे साफ कह दिया था कि एक्टिंग में हाथ आजमाना है तो आजमा लो, लेकिन अगर बात नहीं बनी, तो फिर वही करना पड़ेगा जो हम कहेंगे.’

बेंगलुरु आने के बाद यश ‘स्टॉप’ नाम की एक फिल्म में बतौर असिस्टेंट डायरेक्टर जुड़े थे, लेकिन किस्मत का खेल देखिए कि वह फिल्म शुरू होने से पहले ही बंद हो गई. यश ने उस दौर को याद करते हुए बताया, ‘अचानक मैं फिर से सड़क पर आ गया था. मैंने अपने एक रिश्तेदार को फोन किया और पूछा कि क्या मैं अपना सामान कुछ दिन उनके घर रख सकता हूं? उन्होंने टालने के लिए कह दिया कि वे लोग कहीं बाहर जा रहे हैं.’

यश ने आगे कहा, ‘उस रात मैं बस स्टॉप पर सोया. मैं पूरी रात यही सोचता रहा कि अगली बस पकड़कर वापस मैसूर लौट जाऊं या यहीं रुककर अपने सपनों के पीछे भागता रहूं. मैंने वो पूरी रात वहीं जागकर काटी. पुलिस बस स्टॉप पर सोने वाले लोगों को डंडे मारती थी, उस रात मैंने जिंदगी की कई कड़वी सच्चाइयों को बहुत करीब से देखा. लेकिन वही वो रात भी थी जब मैंने ठान लिया कि चाहे जो हो जाए, मैं एक दिन स्टार बनकर ही रहूंगा. मैंने इस बारे में अपने घरवालों को कभी नहीं बताया.’

बता दें कि ‘केजीएफ’ फ्रेंचाइजी की जबरदस्त कामयाबी के बाद यश आज भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े सुपरस्टार्स में से एक बनकर उभरे हैं. वह जल्द ही गीतू मोहनदास की फिल्म ‘टॉक्सिक’ में दिखाई देंगे और इसके बाद नितेश तिवारी की फिल्म ‘रामायण’ में रणबीर कपूर और साई पल्लवी के साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे. मूवी में वह रावण का रोल निभा रहे हैं.
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