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एक्टिंग की दुनिया में ये अक्सर सेलेब्स के साथ होता है कि अगर कोई रोल बहुत बड़ा हिट साबित होता है, तो बाद में एक्टर को उसी तरह के रोल मिलने लगते हैं. ऐसा ही कुछ बॉबी देओल के साथ भी हो रहा है. उन्हें विलेन के ही रोल ऑफर होने लगे हैं.लेकिन उनका कहना है कि वह अब इससे बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं और कुछ अलग करने की फिराक में हैं.
बॉबी देओल नहीं करेंगे ये काम
नई दिल्ली. बॉबी देओल ने अपने करियर में काफी उतार चढ़ाव देखा है. अब उन्होंने फिर से अपने करियर में दमदार वापसी की है. ‘आश्रम’ और ‘एनिमल’ में उनके रोल ने उनके करियर के लिए संजीवनी बूटी का काम किया है. कई फिल्मों और सीरीज में उनके नेगेटिव किरदारों की खूब चर्चा हुई. लेकिन अब इसके बाद उन्हें इसी तरह के रोल मिलने लगे हैं.
बॉबी देओल कहना है कि वह विलेन के रोल करते हैं, इससे उन्हें कोई दिक्कत नहीं है,लेकिन एक ही तरह के रोल करना उन्हें ठीक नहीं लगता है. उनका कहना है कि किसी भी एक्टर के लिए विविधता बहुत जरूरी है. लेकिन एक ही तरह के रोल बार-बार करना एक्टर का एक्टिंग स्कोप कम कर सकता है. उनका कहना है कि उनकी एक खास इमेज बन गई है.अब बॉबी इससे बाहर निकलना चाहते हैं.
एक ही तरह के मिल रहे रोल
बॉबी देओल ने हाल ही में दिल्ली में हुए जागरण फिल्म फेस्टिवल के दौरान इस बात का खुलासा किया है. उन्होंने अपनी बात रखते हु्ए कहा कि किसी भी एक्टर को जब किसी एक खास रोल में सक्सेस मिल जाती है, तो उसके पास कोई दूसरी तरह के रोल आने ही बंद हो जाते हैं और मेरे साथ भी यही हो रहा है. उन्होंने कहा कि इंडस्ट्री में ऐसा ही होता है.
सीरीज ने बचाया डूबता करियर
बॉबी देओल का एक्टिंग करियर ढलान पर जा ही रहा था कि उनके करियर को नई दिशा प्रकाश झा की सीरीज ‘आश्रम’ से मिली. इस सीरीज में उन्होंने बाबा निराला का किरदार निभाकर इतिहास रच दिया था. ढोंगी बाबा के रोल में वह ऐसे छाए कि इस रोल में बॉबी का अंदाज उनके पुराने रोमांटिक हीरो वाली अंदाज से रिप्लेस हो गया.
एक ही तरह को रोल हो रहे ऑफर
इसके बाद साल 2023 में भी संदीप रेड्डी वांगा की फिल्म ‘एनिमल’ में वह नेगेटिव रोल में ही नजर आए. लोगों को लगने लगा कि इसी तरह के रोल उनके लिए परफेक्ट है. ऐसा हुआ भी फिल्म में भले ही बॉबी का स्क्रीन टाइम बहुत कम था. लेकिन फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई. फिल्म में अबरार हक के रोल में बॉबी को लोगों ने काफी पसंद किया. इसके बाद भी वह लगातार नेगेटिव किरदारों के ऑफर मिलने लगे. ‘कंगुवा’, ‘डाकू महाराज’, ‘हरि हर वीरा मल्लू’, ‘अल्फा’ और ‘जन नायकन’ जैसी फिल्मों में भी वह अलग-अलग तरह के विलेन बनकर छा गए.
बता दें कि बॉबी ने अपनी बात रखते हुए इस बात का भी खुलासा किया कि वह विलेन के रोल करने से परेशान नहीं हैं. उन्हें बार-बार एक जैसे रोल ऑफर हो रहे है, ये बात उन्हें खल रही है. बॉबी का कहना है कि वह इससे बाहर आने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने अपनी फिल्म ‘बंदर’ का उदाहरण देते हुए बताया कि वह ऐसे ही अलग तरह के किरदारों को करना चाहते हैं. गौरतलब है कि साल 1995 में फिल्म ‘बरसात’ से डेब्यू करने के बाद बॉबी ने ‘गुप्त’, ‘सोल्जर’, ‘बादल’, ‘बिच्छू’, ‘अजनबी’ और ‘हमराज’ जैसी फिल्मों में काम किया.
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न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…
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