मुरादाबाद जिले में घरों तक पहुंचने से पहले दूध की जान निकाल ली जा रही है। पहले मशीनों पर उसका फैट निकाल लिया जाता है और फिर इतना पानी मिला देते हैं कि उसमें दूध जैसा कुछ बचता ही नहीं। प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट ने इसका खुलासा किया है। शहर में जगह-जगह दूध की डेयरियों से लिए गए 29 नमूनों की आई रिपोर्ट में 18 में पानी मिला है।
मिलावट का गणित इस तरह समझिए कि आधा लीटर दूध में 300 ग्राम तक पानी निकला। दुग्ध संघ मुरादाबाद के मुताबिक जिले में रोजाना करीब 12 लाख लीटर दूध का उत्पादन होता है। इसमें करीब सात लाख लीटर दूध डेयरियों पर जाता है। गर्मियों में कुल उत्पादन घटकर करीब नाै लाख लीटर हो जाता है।
जिले की अनुमानित आबादी करीब 37 लाख है। आंकड़ाें के मुताबिक एक व्यक्ति को करीब 460 मिलीमीटर दूध की जरूरत पड़ती है। इस हिसाब से जिले को रोजाना 17.20 लाख लीटर दूध की जरूरत है। कुल उत्पादन का करीब 60 फीसदी (सात लाख लीटर) दूध पशु पालक डेयरियों को बेच देते हैं।
इससे पनीर, मावा, दूध की मिठाई समेत अन्य उत्पाद बनाए जाते हैं। ऐसे में घरों में सप्लाई के लिए दूध कम पड़ जाता है। प्रयोगशाला से जारी रिपोर्ट साफ कर रही है कि पानी मिलाकर मांग और आपूर्ति के अंतर को पाटा जा रहा है। अप्रैल से जुलाई तक चार महीने में खाद्य विभाग की टीम ने दुकानों पर छापा मारकर दूध के कुल 42 सैंपल भरे।
बनारस और लखनऊ लेबोरेटरी से 29 नमूनों की रिपोर्ट आई। इसमें से दूध के 18 नमूने फेल मिले। जबकि अभी 13 नमूनों की रिपोर्ट आनी बाकी है। विभाग के मुताबिक रिपोर्ट में दूध में पानी मिला पाया गया है। इसके अलावा फैट की मात्रा भी कम पाई गई। विभाग दूध विक्रेताओं क खिलाफ वाद दायर करने की तैयारी में है।










