सोनभद्र/एबीएन न्यूज। आर्थिक रूप से कमजोर एवं वंचित वर्ग के बच्चों को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में उत्तर प्रदेश सरकार की पहल का सोनभद्र जनपद में सकारात्मक प्रभाव दिखाई दे रहा है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम (आरटीई) के तहत वर्तमान में जिले के 1730 वंचित बच्चे निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं।
जिलाधिकारी श्री चर्चित गौड़ ने बताया कि प्रदेश सरकार ने आरटीई के तहत पात्र बच्चों को निजी विद्यालयों में प्रवेश दिलाने की प्रक्रिया को पारदर्शी एवं ऑनलाइन बनाया है। ऑनलाइन आवेदन, सत्यापन और लॉटरी की पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से पात्र बच्चों को बिना किसी भेदभाव के निजी विद्यालयों में शिक्षा का अवसर उपलब्ध कराया जा रहा है।
उन्होंने बताया कि इस व्यवस्था से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए अच्छे निजी विद्यालयों में पढ़ने के अवसर बढ़े हैं। ऐसे परिवार, जो आर्थिक कारणों से अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में शिक्षा दिलाने में सक्षम नहीं थे, उन्हें आरटीई के माध्यम से बड़ी राहत मिली है। निःशुल्क एवं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का अवसर मिलने से इन बच्चों के भविष्य को नई दिशा मिल रही है।
जिलाधिकारी ने बताया कि आरटीई के तहत वंचित बच्चों की शिक्षा का खर्च सरकार द्वारा वहन किया जा रहा है। सोनभद्र में निजी विद्यालयों को आरटीई के अंतर्गत अध्ययनरत बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति के रूप में प्रतिवर्ष करीब 7.50 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा रहा है। इससे बच्चों को बेहतर शिक्षा मिल रही है, वहीं निजी विद्यालयों को भी सरकार की ओर से निर्धारित प्रतिपूर्ति उपलब्ध कराई जा रही है।
उन्होंने कहा कि आरटीई व्यवस्था शिक्षा के क्षेत्र में आर्थिक असमानता को कम करने तथा गरीब एवं वंचित परिवारों के बच्चों को समान अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण माध्यम बन रही है। पारदर्शी ऑनलाइन प्रक्रिया से पात्र बच्चों को शिक्षा के अधिकार का लाभ दिलाने में भी सहायता मिली है।
जिला प्रशासन का प्रयास है कि आरटीई के तहत अधिक से अधिक पात्र बच्चों को योजना की जानकारी मिले और वे निर्धारित प्रक्रिया के माध्यम से निजी विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ प्राप्त कर सकें। सरकार की यह पहल सामाजिक समानता और सभी बच्चों को बेहतर भविष्य के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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