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जन्माष्टमी का त्योहार बॉलीवुड के गानों के बिना अधूरा है. 25 साल से एक गाना ऐसा है जो इस त्योहार को और भी खास बनाता है. आशुतोष गोवारिकर ने निर्देशन में बनी ‘लगान’ में आमिर खान और ग्रेसी सिंह लीड रोल में दिखे थे. इन दोनों पर ही ये कृष्ण गीत फिल्माया गया था जिसे 3 मुस्लिम कलाकारों ने मिलकर बनाया था. इस कालजयी गीत के बोल जावेद अख्तर ने लिखे थे और इसको संगीत एआर रहमान ने दिया था. आज भी इस कृष्ण गीत का खुमार पहले जैसा ही है.
फिल्म में कृष्ण पर दो गाने हैं और दोनों काफी लोकप्रिय हुए थे.
नई दिल्ली. जन्माष्टमी आने वाली है और हर गली-मोहल्ले में पंडाल सज चुके हैं. जन्माष्टमी का त्योहार बॉलीवुड गानों के बिना कुछ अधूरा सा लगता है. इतने सालों में बॉलीवुड ने कई ऐसे कालजयी गानों की रचना की है जिन्होंने इस पर्व को और भी खास बना दिया. आज जिस खास गीत की यहां बात कर रहे हैं वो 25 साल से जन्माष्टमी के पर्व की शोभा बढ़ा रहा है. इस गाने की खासियत है कि 4 मुस्लिम लोगों ने मिलकर इसकी रचना की थी और इसका खुमार 25 साल बाद भी रत्ती भर कम नहीं हुआ है. इस फिल्म में जन्माष्टमी के अवसर के लिए दो गीत थे लेकिन आज उस गाने की चर्चा करेंगे जिसपर आपने भी स्कूल के दिनों में एक न एक बार जरूर परफॉर्म किया होगा.
ये गाना आमिर खान और ग्रेसी सिंह की फिल्म लगान का है. ‘राधा कैसे न जले, राधा कैसे न जले’…ये वो गाना है जिसपर 2000 के दशक के हर बच्चे ने कभी न कभी परफॉर्म किया ही था. जन्माष्टमी के दस्तक देते ही हर किसी के घर में ये गाना गूंजने लग जाता है. आशा भोसले और उदित नारायण की आवाज में ये गाना अमर हो उठा. आज भी इस गाने के बजते ही कदम अपने आप ही थिरक उठते हैं.
3 मुस्लिमों ने मिलकर रच डाला कालजयी गीत
हिंदू आस्था से जुड़े इस गाने को 3 मुस्लिम लोगों ने मिलकर बनाया था. साल 2001 में फिल्म ‘लगान’ का गाना ‘राधा कैसे न जले’ के बोल दिग्गज गीतकार जावेद अख्तर ने लिखे थे. इसका संगीत ऑस्कर विजेता म्यूजिक कंपोजर एआर रहमान ने दिया था. दो मुस्लिम कलाकारों द्वारा रचे गए इस कालजयी गीत को इंडस्ट्री की सबसे प्रतिष्ठित डांस कोरियोग्राफर सरोज खान ने कोरियोग्राफ किय था. इसको आमिर खान और ग्रेसी सिंह पर फिल्माया गया था.
आमिर खान और ग्रेसी सिंह ने गाने को बनाया खास
फिल्म की कहानी भले ही अंग्रेजों के खिलाफ क्रिकेट मैच और गांववालों की जद्दोजहद पर आधारित थी, लेकिन इस गाने ने कहानी में बिल्कुल अलग रंग भर दिया. गाने में राधा के मन की जलन और कृष्ण के साथ उनकी शिकायतों को बड़े ही चुलबुले अंदाज में दिखाया गया है. राधा को लगता है कि कृष्ण दूसरी गोपियों के साथ ज्यादा वक्त बिताते हैं, जबकि कृष्ण अपनी शरारतों से बाज नहीं आते. फिल्म में इस गाने के जरिए राधा-कृष्ण के रिश्ते को बहुत ही बारीकी से पेश किया गया है.
आशा भोसले और उदित नारायण ने ‘राधा कैसे न जले’ में डाली जान
आशा भोसले और उदित नारायण की आवाज में गाना ‘राधा कैसे न जले’ आज भी अमर है. इसके बोल में राधा और कृष्ण के रिश्ते की शरारत साफ झलकती है. जावेद अख्तर द्वारा लिखे गए इस गाने के बोल कुछ ऐसे हैं, ‘मधुबन में जो कन्हैया किसी गोपी से मिले, कभी मुस्काए, कभी छेड़े, कभी बात करे. राधा कैसे ना जले? राधा कैसे ना जले? आग तन-मन में लगे. राधा कैसे ना जले? राधा कैसे ना जले? मधुबन में भले कान्हा किसी गोपी से मिले. मन में तो राधा के ही प्रेम के हैं फूल खिले. किस लिए राधा जले? (होय), किस लिए राधा जले? (होय). बिना सोचे-समझे (होय) किस लिए राधा जले? (किस लिए राधा जले?) हो, गोपियां तारे हैं, चांद है राधा. फिर क्यूं है उसको विस्वास आधा?…’
25 साल बाद भी कायम है लोकप्रियता
गाने में ग्रेसी सिंह राधा के रूप में और आमिर खान कृष्ण के रूप में नजर आते हैं. दोनों के बीच की नोकझोंक इतनी सहज लगती है कि ऐसा लगता है जैसे कोई पुरानी ब्रज कथा आंखों के सामने चल रही हो. राधा का रूठना और कृष्ण का उन्हें मनाने के बजाय अपनी शरारत जारी रखना गाने की सबसे मजेदार बातों में से एक है. इस गाने की लोकप्रियता 25 साल बाद भी जस की तस है.
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From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…
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