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राखी बांधते समय भाई को पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठाना शुभ माना जाता है. धार्मिक परंपरा में पूर्व दिशा को शुभ और देव कार्यों के लिए अनुकूल माना गया है. उत्तर या उत्तर-पूर्व दिशा की ओर भी मुख करके बैठ सकते हैं. उत्तर दिशा को धन और समृद्धि से जोड़कर देखा जाता है.

राखी बांधते समय भाई का मुख दक्षिण दिशा की ओर रखने से बचना चाहिए. ये दिशा यमराज की होती है. राखी जैसे शुभ कार्य में इस दिशा का विशेष ध्यान रखें.

बहनें राखी बांधते समय येन बद्धो बलिराजा दानवेन्द्रो महाबलः। तेन त्वामभिबध्नामि रक्षे मा चल मा चल॥” ये मंत्र बोलें अर्थात- जिस रक्षा सूत्र से महाबली राजा बलि को बांधा गया था, उसी रक्षा सूत्र से मैं तुम्हें बांधती हूं। हे रक्षासूत्र! तुम हमेशा स्थिर रहना और मेरे भाई की रक्षा करना।

ये चंद्र ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा लेकिन विदेश जहां ये नजर आएगा वहां रहने वाले भारतीय ग्रहण काल में राखी न बांधें.

राखी की रस्म साफ-सुथरे स्थान पर चौकी या आसन पर बैठकर करने की परंपरा है. बहन पहले तिलक और अक्षत लगाए, आरती करे और फिर भाई की दाहिनी कलाई पर राखी बांधे. इससे पहले देवताओं का राखी बांधें.

28 अगस्त 2026 को रक्षाबंधन के दिन चंद्र ग्रहण होने की वजह से सिर्फ दिशा का ध्यान रखना पर्याप्त नहीं है. राखी बांधने से पहले स्थानीय पंचांग में भद्रा, ग्रहण काल और राखी बांधने के शुभ समय को जरूर देखना चाहिए.
Published at : 26 Aug 2026 07:15 AM (IST)
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