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हिंदी फिल्म इंडस्ट्री की लोकप्रियता को पूरी दुनिया में बढ़ाने में बॉलीवुड के खलनायकों ने भी बहुत बड़ी भूमिका निभाई. उन्हीं विलेन में एक केएन सिंह थे, जिनका पूरा नाम कृष्ण निरंजन सिंह था. वह भारतीय सिनेमा के शुरुआती दौर के मशहूर विलेन थे. उनकी बेहतरीन चरित्र अभिनेताओं में गिनती होती थी. आइए, दिग्गज एक्टर की जयंती पर उनकी जिंदगी को करीब से जानें.
पृथ्वीराज कपूर संग मुलाकात ने बदली किस्मत (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: केएन सिंह एक ऐसे चरित्र कलाकार थे, जो पर्दे पर चीखे-चिल्लाए बिना अपने नेगेटिव किरदार को दमदार तरीके से दर्शाने के लिए जाने जाते थे. उनका जन्म 1 सितंबर 1908 को उत्तराखंड के देहरादून में एक पढ़े-लिखे और संपन्न परिवार में हुआ था. उनके पिता चंडी प्रसाद सिंह एक मशहूर क्रिमिनल लॉयर और कुछ रियासतों के राजा थे. केएन सिंह भी अपने पिता की तरह ही कानून की पढ़ाई कर बैरिस्टर बनना चाहते थे, लेकिन जब पिता ने एक कातिल को कानून से बचाया तो इस पेशे के प्रति पनपा जुनून खत्म हो गया.
केएन सिंह के पिता चाहते थे कि उनका बेटा पढ़ाई खत्म करके जल्द से जल्द अपने पैरों पर खड़ा हो जाए. इसके लिए केएन सिंह ने कई काम किए, जिसमें लाहौर जाकर प्रिंटिंग प्रेस स्थापित करना, राजा-रजवाड़ों को पालने के लिए जंगली जानवर सप्लाई करना, चाय बागान में काम करने वालों के लिए खास प्रकार के जूते बनवाना, फौज में खुखरी की सप्लाई करना आदि शामिल थे. यह सभी धंधे शुरुआत में सफल रहे, लेकिन आगे चलकर कुछ ज्यादा फल-फूल नहीं पाए.
बर्लिन ओलंपिक में होने वाले थे शामिल
केएन सिंह के जीवन में एक समय ऐसा आया कि पिता उनके भविष्य को लेकर चिंतित रहने लगे. उनका भी आत्मविश्वास असफलताओं से डगमगाने लगा था. इसके बाद, उनके पिता ने उनकी शादी 1930 में मेरठ के फौलादा गांव की आनंद देवी से कर दी. हालांकि, उनकी कुछ समय बाद बीमारी की वजह से मौत हो गई. केएन सिंह एक बेहतरीन अभिनेता के साथ एथलीट भी थे. वे 1935 के बर्लिन ओलंपिक के लिए उनका चयन लगभग तय था, लेकिन बहन की बीमारी के कारण वे उसमें भाग नहीं ले सके. उस समय उन्हें बीमार बहन को देखने के लिए कलकत्ता जाना पड़ा और तभी उनकी मुलाकात पृथ्वीराज कपूर से हुई, जिन्होंने उनकी मुलाकात निर्देशक देबाकी बोस से करवाई.
200 से ज्यादा फिल्मों में काम किया
केएन सिंह को स्क्रीन पर खलनायकी के लिए ‘जेंटलमैन विलेन’ के रूप में जाना जाता था. उन्होंने अपनी एक्टिंग करियर की शुरुआत साल 1936 में आई फिल्म ‘सुनहरा संसार’ से की, जिसमें उन्होंने एक डॉक्टर का किरदार निभाया था. इसके बाद वह मुंबई आ गए और उन्होंने 1937 की सुपरहिट फिल्म ‘बागवान’ से बतौर खलनायक इंडस्ट्री में पहचान बनाई. अभिनय की दुनिया में मिली सफलता के बाद उन्होंने एक के बाद एक कई फिल्मों में बतौर खलनायक और चरित्र कलाकार काम किए. केएन सिंह हिंदी सिनेमा के पहले ऐसे खलनायक माने जाते हैं, जो पर्दे पर बिना चीखे-चिल्लाए, केवल अपनी कातिलाना नजरों, गहरी आवाज और चेहरे के भावों से दर्शकों के दिलों में खौफ पैदा करने की कला रखते थे. अभिनेता ने अपने पांच दशक लंबे करियर में 200 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में अभिनय किया.
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अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…
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