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ओटीटी प्लेटफॉर्म ने कई ऐसे कलाकारों को इंडस्ट्री में पहचान दिलाई जिनका फिल्मी इंडस्ट्री और अभिनय की दुनिया से कोई ताल्लुक नहीं था. न कोई फिल्मी बैकग्राउंड और न ही इंडस्ट्री से कोई कनेक्शन…लेकिन आंखों में सिर्फ एक सपना. कई कलाकारों ने बड़े पर्दे पर कुछ कर दिखाने का सपना लिए ओटीटी के जरिए अपने करियर की शुरुआत की. ओटीटी इन कलाकारों के लिए एक ऐसा जरिया साबित हुआ जिसने बिना बॉलीवुड के पॉलिटिक्स के बिना एक्टर्स को सीधे दर्शकों के दिलों में जगह दिलाई.
नई दिल्ली. कोरोना काल यानी साल 2020 में ओटीटी को भारत में नया जीवनदान मिला. इस दौरान नेटफ्लिक्स, प्राइम वीडियो और सोनी लिव जैसे प्लेटफॉर्म्स का विस्तार हुआ. लेकिन क्या आपको याद है कि इन प्लेटफॉर्म्स की शुरुआत से पहले हम यूट्यूब पर वेब सीरीज देखा करते थे. यूट्यूब पर हमनें ‘ट्रिपलिंग’, ‘परमानेंट रूममेट्स’, ‘लिटिल थिंग्स’ जैसी कई सीरीज देखी हैं. इन सीरीज को हमने बिना किसी सब्सक्रिप्शन के बिलकुल फ्री में देखा था.
उस वक्त यंगस्टर्स के बीच इन वेब सीरीज की अलग पहचान थी. वेब सीरीज ‘लिटिल थिंग्स’ ने मिथिला पालकर को अलग पहचान दिलाई. ‘लिटिल थिंग्स’ से लोकप्रियता हासिल कर चुकीं मिथिला पालकर अब फिल्मों में सक्रिय हैं. उन्होंने कारवां, त्रिभंग जैसी फिल्मों में काजोल और इरफान खान जैसे कलाकारों के साथ काम किया है.
लिटिल थिंग्स से मिथिला पालकर को खूब लोकप्रियता मिली औऱ वो इस लोकप्रियता और सफलता को भुनाते हुए अब फिल्मों में पहचान बना रही हैं. लेकिन आज हम यहां एक्ट्रेस की नहीं बल्कि उस शख्स की बात करेंगे जो ‘लिटिल थिंग्स’ का मास्टरमाइंड था. हम एक्टर ध्रुव सहगल की बात कर रहे हैं.
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ध्रुव सहगल एक ऐसा नाम है जिसने बिना किसी फैमिली कनेक्शन और फिल्मी बैकग्राउंड के सपनों की नगरी में कुछ कर दिखाने की ठानी. ध्रुव सहगल ने यूट्यूब पर लिटिल थिंग्स की शुरुआत की थी. पहले ये शो आप यूट्यूब पर बिलकुल फ्री में देख सकते थे, लेकिन अब ये नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध है. ध्रुव सहगल को सबसे ज्यादा लोकप्रियता वेब सीरीज ‘लिटिल थिंग्स’ में ध्रुव वात्स का किरदार निभाकर मिली.
मिथिला पालकर के साथ ध्रुव सहगल की जोड़ी दर्शकों को इतनी पसंद आई कि सीरीज के किरदार धीरे-धीरे युवाओं की रोजमर्रा की जिंदगी और रिश्तों का प्रतिनिधित्व करने लगे. लिटिल थिंग्स जैसा कि आप इसके नाम से ही अंदाजा लगा सकते हैं, जिंदगी की छोटी-छोटी खुशियों पर फोकस करती है. ये सीरीज दिखाती है कि आमतौर पर नौकरी पेशा मिडिल क्लास लोगों की जिंदगी में कुछ खास नहीं होता है बल्कि उन्हें छोटे-छोटे पलों से खुशियां चुरानी पड़ती हैं.
ध्रुव सहगल ने मुंबई में रहने वाले एक यंग कपल पर ऐसी कहानी लिखी जो सीधे युवाओं के दिल में घर कर गई. ये कहानी मुंबई में रहने वाले एक बेहद साधारण कपल की है जो लिव इन में रहते हैं. वो अपनी जिंदगी में करियर, परिवार की जिम्मेदारी और शादी के प्रेशर से एक साथ जूझ ऱहे होते हैं. ध्रुव और काव्या की इस कहानी के जरिए हर युवा ने अपनी कहानी को पर्दे पर देखा और महसूस किया.
एक्टर ध्रुव सहगल ने वेब सीरीज ‘लिटिल थिंग्स’ में मिथिला पालकर के साथ लीड रोल अदा करने के साथ ही इसको क्रिएट भी किया था. वो इस पॉपुलर शो के राइटर और किएटर भी हैं. ध्रुव सहगल की खासियत रही कि उन्होंने बिना किसी अपशब्द के इस्तेमाल और मार-धाड़ के बिना एक ऐसी साधारण कहानी गढ़ी जिसमें हर युवा को अपनी कहानी नजर आने लगी.
ध्रुव सहगल ने ‘लिटिल थिंग्स’ के साथ ही कई अन्य प्रोटेक्ट्स में भी काम किया था, लेकिन इस सीरीज ने उनके करियर को नई दिशा और मुकाम दिया. इस पॉपुलर शो की रेटिंग भी धांसू है. इसकी रेटिंग इस बात का सबूत है कि इसे दर्शकों ने कितना पसंद किया था. ‘लिटिल थिंग्स’ को आईएमडीबी पर 8.2 की रेटिंग हासिल है.
ध्रुव सहगल का जन्म 19 मार्च 1990 को दिल्ली में हुआ. दिल्ली का ये लड़का कुछ कर दिखाने का सपना लिए सपनों की नगरी मुंबई पहुंचा. वहां उन्होंने सिम्बायोसिस इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया एंड कम्युनिकेशन, पुणे से पढ़ाई की. मनोरंजन की दुनिया में उनकी शुरुआत सीधे कैमरे के सामने आकर नहीं हुई थी. उन्होंने डॉक्यूमेंट्री ‘बावरा मन’ में असिस्टेंट डायरेक्टर के तौर पर काम किया, जबकि ‘आई एम ऑफेंडेड!’ में एडिटर की भूमिका निभाई. इसके बाद उन्होंने शॉर्ट फिल्म ‘कुणाल’ बनाई, जिसे मुंबई फिल्म फेस्टिवल में अवॉर्ड भी मिला.
इसके बाद ध्रुव ने डिजिटल कंटेंट की दुनिया में कदम रखा. उन्होंने फिल्टर कॉपी के लिए कई कॉमेडी स्केच लिखे और उनमें अभिनय भी किया. यहीं से उनके भीतर कहानी कहने और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े विषयों को पर्दे पर उतारने की क्षमता और मजबूत हुई.
एक्टर की शुरुआत पर्दे के पीछे से हुई. उन्होंने कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी कलम से निकली कहानी ही उनकी तकदीर बदलकर रख देगी. ‘लिटिल थिंग्स’ वही कहानी थी जिसे ध्रुव ने खुद अपने लिए लिखा था. पर्दे के पीछे से जादू बिखेरने वाला जादूगर जब पर्दे के सामने आया तो ऐसा समां बांधा कि हर कोई बस देखते ही रह गया. साल 2016 में ‘लिटिल थिंग्स’ की शुरुआत हुई और यहीं से सबकुछ बदल गया.












