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पार्थो सेन गुप्ता ने चुनिंदी फिल्में बनाईं, मगर उससे हिंदी सिनेमा पर गहरा असर डाला. फिल्मकार की बदौलत हिंदी सिनेमा को दुनिया भर में खास पहचान मिली. उन्होंने 17 साल की आयु में ट्रेनी के तौर पर अपना करियर शुरू किया था. उन्होंने ‘हवा आने दे’, ‘सनराइज’ और ‘स्लम’ जैसी मशहूर फिल्में डायरेक्ट की थीं. आइए, फिल्मकार के जन्मदिन पर उनकी जिंदगी को करीब से जानें.
पार्थों सेन गुप्ता ने चुनिंदा फिल्में बनाई थीं. (फोटो साभार: IANS)
नई दिल्ली: पार्थो सेन गुप्ता ने दुनिया भर में हिंदी फिल्म इंडस्ट्री को पहचान और सम्मान दिलाया. लोग उन्हें एक फिल्म निर्देशक, निर्माता और पटकथा लेखक के रूप में जानते हैं. उनका जन्म 2 सितंबर 1965 को मुंबई में हुआ था. पार्थो सेन गुप्ता ने पेरिस के फिल्म स्कूल ‘ला फेमिस’ से फिल्म निर्देशन में पोस्ट ग्रेजुएशन की डिग्री हासिल की थी.
पार्थो सेन देश वापस आए और अपने करियर की शुरुआत महज 17 साल की आयु में बतौर एक ट्रेनी की. उन्होंने फीचर फिल्मों, टीवी सीरियल्स और विज्ञापनों के लिए ट्रेनी आर्ट डायरेक्टर और ट्रेनी प्रोडक्शन डिजाइनर के रूप में काम किया. उन्होंने ‘सागर’ और ‘मिस्टर इंडिया’ जैसी बड़ी बजट वाली फिल्मों के लिए आर्ट डायरेक्टर बिजन दासगुप्ता के साथ काम किया.
शुरुआत के कुछ सालों तक ट्रेनी आर्ट डायरेक्टर के तौर पर काम करने के बाद पार्थो सहायक कला निर्देशक बन गए. साल 1988 में उन्होंने सुधीर मिश्रा द्वारा निर्देशित फिल्म ‘मैं जिंदा हूं’ में कला निर्देशक/प्रोडक्शन डिजाइनर के रूप में अपनी पहली फिल्म पर काम किया. पार्थो सेन गुप्ता ने इसके बाद अपना खुद का डिजाइन स्टूडियो स्थापित किया और कई विज्ञापन फिल्मों और कला फिल्मों पर काम किया. इस दौरान उन्होंने कई सेट डिजाइन किए, जिसके बलबूते उन्होंने 1989 में बेस्ट आर्ट डायरेक्टर का पुरस्कार जीता.
‘हवा आने दे’ पहली फीचर फिल्म
पार्थो सेन की फिल्मों की बात करें, तो ‘हवा आने दे’ उनकी पहली फीचर फिल्म थी, जिसका प्रीमियर बर्लिन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था. इस फिल्म ने डर्बन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में ‘बेस्ट फिल्म’ का पुरस्कार जीता और बीबीसी ऑडियंस अवॉर्ड के लिए भी पहचानी गई. ‘सनराइज’ उनकी दूसरी फीचर फिल्म का प्रीमियर बुसान इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में हुआ था. इसके अलावा, फिल्म को कई ग्लोबल मंचों जैसे ट्रिबेका, सिटजेस, बीएफआई लंदन और म्यूनिख जैसे कई फिल्म फेस्टिवल में सराहा गया. इसे 2015 के डरबन इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट फिल्म और बेस्ट सिनेमैटोग्राफी का पुरस्कार मिला.
तीसरी फीचर फिल्म ‘स्लम
साल 2019 में आई फिल्म ‘स्लम’ पार्थो सेन-गुप्ता की तीसरी फीचर फिल्म है, जिसकी शूटिंग ऑस्ट्रेलिया में हुई. फिल्म का ग्लोबल प्रीमियर टालिन ब्लैक नाइट्स फिल्म फेस्टिवल की आधिकारिक चयन प्रतियोगिता में हुआ था. इसके अलावा इसे रॉटरडैम इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल और बर्लिन को-प्रोडक्शन मार्केट में भी चुना गया था. इसके अलावा, पार्थो सेन गुप्ता ने कई अन्य शॉर्ट फिल्म, फीचर फिल्म का निर्माण और निर्देशन किया. वे फिलहाल सिडनी में रहते हैं.
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अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर \’न्यूज18 डिजिटल\’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और…
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