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सिनेमा जगत में फिल्मों को हिट कराने का फॉर्मूला बहुत सीधा, सिंपल और सटीक माना जाता है. कुछ तय फैक्टर्स हैं जिनपर दांव लगाते हुए मेकर्स को यकीन होता है कि अगर किसी फिल्म ये तीनों हैं तो वो ब्लॉकबस्टर कहलाएगी. बड़ा स्टार, करोड़ों का बजट और भव्य लेवल पर प्रमोशन- इन तीनों के साथ फिल्में बनाते हुए मेकर्स को यकीन होता है कि वो सफल रहेंगे, लेकिन क्या हो अगर किसी फिल्म में इनमें से कुछ भी न हो?
नई दिल्ली. अगर आपसे कोई ये सवाल पूछे कि सोचिए अगर किसी फिल्म में ये तीनों ही फैक्टर्स न हों तो क्या होगा. आपके दिमाग में कहीं न कहीं ये ख्याल जरूर आएगा कि उस फिल्म का अंजाम कुछ खास अच्छा तो नहीं होगा. 3 साल पहले थिएटर्स में एक ऐसी ही फिल्म आई थी जिसमें इनमें से कुछ भी नहीं था. न कोई सुपरस्टार, न करोड़ों रुपये का बजट और न ही ऐसी स्टारकास्ट, जिसके नाम पर दर्शक सिनेमाघर तक पहुंच जाएं, लेकिन फिल्म ने कहानी के दम पर करिश्मा कर दिखाया था.
यहां जिस फिल्म की बात कर रहे हैं वो सिर्फ देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ऑडियंस के दिलों पर कब्जा करने में सफल रही थी. इस भारतीय फिल्म का डंका पूरी दुनिया में बजा था. बिना किसी शोर-शराबा, बड़े बजट और नामी कलाकारों के ‘लापता लेडीज’ सीधे ऑडियंस के दिलों में उतरी थी.
साल 2024 में रिलीज हुई यह फिल्म पहली नजर में एक हल्की-फुल्की कॉमेडी लगती है, लेकिन जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, यह समाज, महिलाओं की पहचान, शिक्षा, आत्मनिर्भरता और पितृसत्ता पर बेहद सहज तरीके से सवाल खड़े करती है. हंसाते-हंसाते किरण राव ने अपनी फिल्म के जरिए समाज की कड़वी सच्चाई को पर्दे पर कुछ ऐसे पेश किया कि कोई चाहकर भी इससे मुंह न फेर सके. ‘लापता लेडीज’ हंसते-हंसते ऑडियंस को सोचने पर विवश कर देती है.
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‘लापता लेडीज’ का बजट करीब 4 करोड़ रुपये बताया जाता है. मीडिया रिपोर्ट्स के दावों के अनुसार किरण राव ने फिल्म को 4 करोड़ के सामान्य बजट में बनाया था. इतने छोटे बजट में बनी फिल्म के लिए बॉक्स ऑफिस पर 25 करोड़ रुपये के आसपास की कमाई करना अपने आप में खास उपलब्धि थी. हालांकि फिल्म की असली सफलता केवल सिनेमाघरों से हुई कमाई तक सीमित नहीं रही.
रिलीज के बाद फिल्म को ओटीटी पर भी दर्शकों का जबरदस्त प्यार मिला. छोटे शहरों और कस्बों की पृष्ठभूमि में बनी कहानी ने उन दर्शकों से भी जुड़ाव बनाया, जिन्हें अक्सर बड़े पर्दे की कहानियों में खुद की जिंदगी कम दिखाई देती है. दिलचस्प बात है कि फिल्म को पर्दे से ज्यादा ओटीटी पर पसंद किया गया था. ओटीटी पर ‘लापता लेडीज’ ने सफलता की नई मिसाल कायम की थी.
‘लापता लेडीज’ में नितांशी गोयल, प्रतिभा रांटा, स्पर्श श्रीवास्तव और रवि किशन जैसे कलाकार मुख्य भूमिकाओं में नजर आए. रवि किशन के अलावा उस वक्त इनमें से किसी का नाम ऐसा नहीं था जिनके दम पर फिल्म को स्टार पावर वाली फिल्म कहा जा सके. लेकिन किरण राव की फिल्म को इसकी जरूरत भी नहीं थी. यहां असली स्टार कहानी थी.
‘लापता लेडीज’ की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक उसका ऑस्कर तक पहुंचना रहा. फिल्म भारत की ओर से 97वें अकादमी पुरस्कारों यानी कि ऑस्कर अवॉर्ड्स में सर्वश्रेष्ठ अंतरराष्ट्रीय फीचर फिल्म की कैटेगरी में ऑफिशियल एंट्री थी. भले ही फिल्म आखिरी नॉमिनेशन तक नहीं पहुंच पाई, लेकिन भारत की ओर से ऑस्कर की रेस में शामिल होना ही इसके लिए बड़ी उपलब्धि थी.
‘लापता लेडीज’ से किरण राव ने साबित कर दिया कि वो अपनी फील्ड की महारथी हैं. किरण ने ‘लापता लेडीज’ से बतौर निर्देशक कमबैक किया था. किरण ने साल 2010 में ‘धोबी घाट’ से बतौर डायरेक्टर डेब्यू किया था. 13 साल के लंबे ब्रेक के बाद जब उन्होंने कमबैक किया तो देश और दुनिया उनके हुनर को एक बार फिर सलाम करने पर मजबूर हो गई.














