नई दिल्ली. किसी फिल्म की सफलता का पैमाना सिर्फ उसका बॉक्स ऑफिस कलेक्शन नहीं होता. कभी-कभी कोई फिल्म बिना बड़े सितारे, भारी-भरकम बजट और करोड़ों के प्रचार के लोगों के बीच अपनी जगह बना लेती है. ‘हनुमान अंश’ ऐसी ही फिल्म बनकर सामने आई है. नीम करोली बाबा के जीवन पर बनी इस फिल्म ने शुरुआती धीमी रफ्तार के बाद दर्शकों के बीच जबरदस्त पकड़ बनाई है. 7 अगस्त 2026 को रिलीज हुई इस फिल्म ने करीब 2 करोड़ रुपये के बजट के मुकाबले 50 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई का आंकड़ा पार कर लिया है.
फिल्म की चर्चा सिर्फ कहानी तक सीमित नहीं है. ‘मैंने तेरे ही भरोसे’ जैसे भजन और बुंदेलखंड के लोकगायक सुनील लोधी की आवाज भी लोगों तक पहुंच रही है. यानी एक छोटी फिल्म ने वह काम किया है जो कई बड़े बजट की फिल्में करोड़ों रुपये खर्च करने के बाद भी नहीं कर पातीं और लोगों को अपने बारे में बात करने पर मजबूर कर दिया हे. ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है जब ‘हनुमान अंश’ की चर्चा इतनी तेजी से बढ़ रही है तो इसे अभी तक किसी राज्य में टैक्स फ्री क्यों नहीं किया गया?
रिपोटर्स के मुताबिक, 2 सितंबर 2026 तक फिल्म को किसी राज्य सरकार की ओर से टैक्स-फ्री किए जाने की घोषणा सामने नहीं आई है. हालांकि मध्य प्रदेश में फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग जरूर उठी है. 29 अगस्त को एक संगठन ने मध्य प्रदेश सरकार को आवेदन देकर हनुमान अंश फिल्म को टैक्स फ्री करने की मांग की गई थी.
क्या हर चर्चित फिल्म टैक्स फ्री होनी चाहिए?
मेरी राय में किसी फिल्म को सिर्फ इसलिए टैक्स फ्री नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि वह बॉक्स ऑफिस पर सफल हो रही है या सोशल मीडिया पर वायरल है. वैसे यह फैसला लेने के लिए राज्य सरकारें खुद ही स्वतंत्र होती हैं लेकिन फिल्मों को टैक्स फ्री करने के कुछ आधार भी हैं.जैसे अगर फिल्म किसी ऐतिहासिक घटना, सामाजिक मुद्दे, राष्ट्रीय सुरक्षा, कला, संस्कृति, शिक्षा या जनजागरूकता को बड़े स्तर पर लोगों तक पहुंचाती है और सरकार मानती है कि इसे ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचना चाहिए तो कर में राहत देने पर विचार किया जा सकता है.
अब सवाल ये है कि किसी भी सरकार को अभी तक यह नहीं लगा कि ‘हनुमान अंश’ जो नीम करोली बाबा के जीवन, सेवा, करुणा, आध्यात्मिकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने वाली फिल्म सार्वजनिक नीति के दायरे में नहीं आती है. जिसके लिए सरकार टिकट सस्ता करने का फैसला कर सकती है?
फिल्म को टैक्स फ्री कैसे किया जाता है?
यहां एक आम गलतफहमी दूर करना जरूरी है. आज ‘टैक्स फ्री फिल्म’ का मतलब पुराने जमाने की तरह कोई अलग मनोरंजन टैक्स हटाना नहीं है. जीएसटी व्यवस्था आने के बाद सिनेमा टिकट पर जीएसटी लागू होता है. जीएसटी काउंसिल ने दिसंबर 2018 में ₹100 तक के सिनेमा टिकट पर जीएसटी दर 18 प्रतिशत से घटाकर 12 प्रतिशत और ₹100 से ज्यादा के टिकट पर 28 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत किया गया था.
किसी फिल्म को टैक्स फ्री करने के लिए सरकार को तय कानूनी प्रक्रिया के तहत अधिसूचना या विशेष आदेश जारी करना होता है. वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में दिए गए जवाब के मुताबिक, सीजीएसटी एक्ट की धारा 11 और संबंधित सीजीएसटी कानूनों के तहत सार्वजनिक हित में किसी वस्तु या सेवा को पूरे या आंशिक टैक्स से छूट दी जा सकती है और इसके लिए जीएसटी काउंसिल की सिफारिश का प्रावधान है. यानी यह फैसला सिर्फ फिल्म निर्माता या थिएटर मालिक नहीं कर सकते. सरकार को बाकायदा प्रक्रिया पूरी करनी होती है.
₹100 की टिकट पर कितने रुपये बचेंगे?
मान लीजिए किसी सिनेमा टिकट की कीमत ₹100 जीएसटी समेत है और उस पर 12 प्रतिशत जीएसटी लागू है. तब ₹100 में पूरा ₹12 टैक्स नहीं होता क्योंकि ₹100 टैक्स समेत अंतिम कीमत है. इसका जीएसटी हिस्सा करीब ₹10.71 बैठता है. जीएसटी केंद्र और राज्य के हिस्से में बंटता है. ऐसे में राज्य का हिस्सा करीब ₹5.36 होगा. इसलिए अगर किसी राज्य में सिर्फ उसका सीजीएसटी हिस्सा माफ होता है तो ₹100 की जीएसटी टिकट पर दर्शक को मोटे तौर पर ₹5.36 तक की राहत मिल सकती है.
वहीं अगर ₹100 टिकट की कीमत टैक्स से पहले की है, तो 12 प्रतिशत GST यानी ₹12 लगता है और राज्य का हिस्सा ₹6 होगा. इसलिए वास्तविक बचत टिकट की मूल कीमत, जीएसटी जोड़ने और थिएटर के अन्य शुल्कों पर निर्भर करेगी. यानी ‘टैक्स फ्री’ सुनकर यह समझना गलत होगा कि ₹100 की टिकट सीधे ₹88 या ₹94 की हो जाएगी. असली बचत अक्सर इससे कम होती है.
पिछले एक साल में किन फिल्मों को टैक्स फ्री किया गया?
2 सितंबर 2025 से 2 सितंबर 2026 तक की उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों को देखें तो कई फिल्मों को अलग-अलग राज्यों में कर राहत मिली है.
– ‘120 बहादुर’ को दिल्ली और राजस्थान में टैक्स फ्री किया गया. राजस्थान में SGST छूट छह महीने के लिए दी गई थी.
– ‘धुरंधर’ को जनवरी 2026 में केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में टैक्स फ्री किया गया. वहां सरकार ने फिल्म की शूटिंग और लद्दाख को फिल्म तथा पर्यटन गंतव्य के तौर पर बढ़ावा देने को भी फैसले से जोड़ा.
– ‘शतक: संघ के 100 वर्ष’ को मध्य प्रदेश के अलावा दिल्ली, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में भी टैक्स-फ्री किए जाने की रिपोर्ट है.
– ‘कृष्णावतारम पार्ट 1’ को उत्तर प्रदेश में टैक्स फ्री किया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विशेष स्क्रीनिंग के बाद इसकी घोषणा की और जिलों में विशेष स्क्रीनिंग कराने की बात भी कही.
– ‘भारत भाग्य विधाता’ को दिल्ली और हरियाणा में टैक्स-फ्री किए जाने की खबरें सामने आईं. हरियाणा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने फिल्म देखने के बाद इसकी घोषणा की.
– ओडिशा की फिल्म ‘आफा’ को भी जुलाई 2026 में राज्य सरकार ने टैक्स फ्री किया. सरकार ने इसके पीछे अंगदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने वाली फिल्म के सामाजिक संदेश को आधार बताया.










