उत्तर प्रदेश के हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग क्षेत्र को नई पहचान देने के लिए यूपी टेक्स-2026 का आयोजन 8 और 9 सितंबर को लखनऊ के इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में हो रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन किया।
इस मौके पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ग्लोबल टेक्सटाइल हब पर आधारित यूपी टेक्स कॉन्क्लेव टेक्सटाइल का नया अध्याय बनेगा। यूपी मतलब अप, यानी अप से ‘अनलिमिटेड पोटेंशियल’। वैदिक साहित्य में सोने के तारों से जेड वस्त्र का उल्लेख है। अयोध्या में राम के समय बनारस के रेशमी वस्त्र का उल्लेख है। वनवास के समय मां जानकी को दिव्य वस्त्र प्राप्त हुए। महाभारत के राजसूय यज्ञ में युधिष्ठिर को काशी के राजा ने सूती वस्त्र दिए थे।
दुनिया की सबसे बड़ी यंग वर्कफोर्स हमारे पास
उन्होंने कहा कि रोम और ग्रीक की संस्कृति को देखें तो भारत और यूपी के वस्त्र वहां भेजे जाते थे। बनारस, कानपुर, सीतापुर, मेरठ आदि यूपी की टेक्सटाइल विरासत की क्षमता है। हमारे पास विरासत है। हुनर है। मानव संसाधन है। देश का सबसे बड़ा बाजार है। उद्योग और उद्यमी भी हैं। दुनिया की सबसे बड़ी यंग वर्कफोर्स है।
सीएम ने आगे कहा कि पांच लाख वेवर रियल हीरो हैं। देश के कुल फैब्रिक का 14 फीसदी यूपी में है। कृषि के बाद सबसे ज़्यादा रोजगार देने वाला क्षेत्र है। यूपी ने खुद को इनोवेशन, टेक्नोलॉजी को जोड़ा है। 350 बिलियन डॉलर की टेक्सटाइल इकनॉमी और 100 बिलियन डॉलर का लक्ष्य है, जो यूपी के बिना पूरा नहीं होगा। यूपी में इस एस्टर में 56 फीसदी की ग्रोथ आई है।
पहले ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ यूपी की पहचान थी
सीएम ने कहा कि प्रदेश के 17 टेक्सटाइल उत्पादों को जीआई टैगिंग मिली है। लाखों महिलाएं इनसे जुड़ी हैं। फाइबर से ग्लोबल मार्केट तक पूरी वैल्यू चेन यहां बनानी है। इसके लिए यूपी खुद को तैयार कर चुका है। 2017 से पहले ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन माफिया’ यूपी की पहचान थी। गुंडा टैक्स, वसूली का कारोबार फल फूल रहा था। कोई सुरक्षित नहीं था। निवेशक यहां निवेश का पर्चा लेकर आते थे और वसूली की पर्ची लेकर लौटते थे। तत्कालीन सरकार मौन थी।
उन्होंने कहा कि यूपी का नाम सुनकर यूपी के नागरिकों को किराए का घर नहीं मिलता था। होटल में रूम नहीं मिलता था। यूपी का परिचय जानकर सामने वाला दस कदम पीछे हट जाता था। ये भीषण त्रासदी थी। हर तीसरे दिन दंगे होते थे। स्कूल कॉलेज, दुकान, फैक्ट्री महीनों बंद रहते थे। एक धारणा बन गई थी, जहां से सड़कें खराब होना शुरू हो जाए। वहां से यूपी शुरू। बिजली और विकास केवल एक परिवार तक सीमित था। इंडस्ट्री फ्रेंडली पॉलिसी नहीं थी। केवल एक पॉलिसी थी। फैक्ट्री लगाने की कल्पना थी।
अपराधियों के दो ठिकाने जेल या जहन्नुम
सीएम ने कहा कि माल की बिक्री पर व्यापारी का नहीं, बिचौलिए का कब्जा था। कानपुर की मिलें इसी का शिकार हो गईं। मगध की मिल 77 में खुलीं। 97 में बंद हो गईं। आज यूपी में कानून का राज्य है। अपराध और अपराधी के लिए जीरो टॉलरेंस की पॉलिसी। अब कोई माफिया खुली जीप में पिस्टल लहराकर नहीं घूम सकता। व्यापारी और निवेशक की सुरक्षा में कोई सेंध नहीं लगा सकता। यदि किया तो दो ही ठिकाने होंगें, जेल या जहन्नुम।















