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Making Of Superhit Film Suyamvaram: साउथ इंडियन फिल्मों की गुणवत्ता किसी से छिपी नहीं है. आज साउथ की फिल्में इंडियन बॉक्स ऑफिस पर छाई हुई हैं. इसकी वजह है उनका पूरी तरह से मौलिक कंटेंट और कड़ी मेहनत. आज हम आपको साउथ की एक ऐसी फिल्म के बारे में बताने जा रहे हैं जिसे देखने से आप खुद को रोक नहीं पाएंगे.
नई दिल्ली. साल 1999 में साउथ की एक ऐसी फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी, जिसने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया था. उस फिल्म का नाम था ‘सुयंमवरम’. इस फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला था. फिल्म की कहानी लोगों को बेहद पसंद आई थी.

क्या आप जानते हैं कि इस फिल्म को बनने में सिर्फ 24 घंटे लगे थे? विकिपीडिया के अनुसार, यह एक तमिल भाषा की कॉमेडी ड्रामा फिल्म थी, जिसका निर्माण और सह-लेखन गिरिधारीलाल नागपाल ने किया था. रिलीज के साथ यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट साबित हुई थी और मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार 25 करोड़ की लागत में बनी इस फिल्म ने 50 करोड़ की कमाई करने में सफल साबित हुई थी.

यह फिल्म अपनी अनूठी निर्माण प्रक्रिया के लिए उल्लेखनीय है, जिसमें 14 निर्देशकों, 19 छायाकारों और 30 से ज्यादा प्रमुख अभिनेताओं ने सहयोग किया था. यानी इस फिल्म को बनाने में 14 डायरेक्टर एक साथ काम पर जुटे थे और फिल्म 30 एक्टर एक साथ नजर आए थे.

नागपाल द्वारा परिकल्पित, इस फिल्म में कलाकारों की टोली थी और इसे एक ही दिन में शूट किया गया था. नागपाल ने कहानी भी लिखी थी, उन्होंने इस फिल्म के जरिए तमिल फिल्म इंडस्ट्री के तमाम दिग्गज अभिनेताओं को एक साथ पर्दे पर लाए थे.

फिल्म की कहानी कुछ इस प्रकार हैं- कुसेलन (विजयकुमार) और उनकी पत्नी सुशीला (मंजुला विजयकुमार) एक बड़े परिवार के मुखिया हैं, जिसमें उनके तीन बेटे हैं- अरुणाचलम (सत्यराज), अवुदैयप्पन (प्रभु) और इंदिरन (अब्बास).

साथ ही उनकी 6 बेटियां भी हैं- उर्वशी (रंभा), ईश्वरी (रोजा), उमा (कस्तूरी), ऐश्वर्या (महेश्वरी), हेमा (प्रीता विजयकुमार) और एझिलारसी (सुवलक्ष्मी). वहीं, अजगप्पन (पार्थिबन) परिवार का वफादार नौकर है, और कृष्णा (नेपोलियन) उनका पारिवारिक डॉक्टर है.

फिल्म की शुरुआत कुसेलन के 60वें जन्मदिन समारोह से होती है, जिसके दौरान उन्हें दिल का दौरा पड़ता है. अस्पताल में, परिवार को बताया जाता है कि कुसेलन की हालत गंभीर है और उनके ज्यादा दिन जीने की उम्मीद नहीं है.

अपने अंतिम दिनों में, कुसेलन एक आखिरी दुआ मांगते हैं कि उनकी मृत्यु से पहले उनके सभी बच्चों की शादी हो जाए. बच्चे मान जाते हैं और एक विज्ञापन दिया जाता है जिसमें कुसेलन के बच्चों में से किसी एक से शादी करने वाले को पारिवारिक संपत्ति और ₹1 करोड़ नकद देने की पेशकश की जाती है.
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