ग्रीनलैंड को लेकर व्हाइट हाउस की धमकियों से पूरे यूरोप में नाराजगी फैल गई है और कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसके जवाब में यूरोपीय नेता संभावित कदमों पर विचार कर रहे हैं, जिनमें जवाबी टैरिफ और यूरोपीय संघ के दबाव-रोधी उपाय (एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट) के पहली बार इस्तेमाल की संभावना भी शामिल है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शनिवार को घोषणा की थी कि फरवरी से आठ यूरोपीय देशों से आने वाले सामान पर 10 फीसदी टैरिफ लगाया जाएगा। ट्रंप के मुताबिक, ये देश ग्रीनलैंड पर अमेरिकी नियंत्रण का विरोध कर रहे हैं। ट्रंप ने फ्लोरिडा के वेस्ट पाम बीच स्थित अपने गोल्फ क्लब से सोशल मीडिया पोस्ट में कहा था कि डेनमार्क, नॉर्वे, स्वीडन, फ्रांस, जर्मनी, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फिनलैंड पर यह टैरिफ लागू होगा। उन्होंने यह भी कहा कि अगर ग्रीनलैंड की पूर्ण और संपूर्ण खरीद को लेकर कोई समझौता नहीं हुआ, तो एक जून से यह दर बढ़ाकर 25 फीसदी कर दी जाएगी।
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डबलिन से लेकर हेलसिंकी तक यूरोपीय नेताओं ने इस घोषणा की तत्काल कड़ी आलोचना की और इसे आर्थिक दबाव की रणनीति बताया। रविवार को कई देशों ने अपने प्रतिनिधियों को ब्रसेल्स भेजकर आपात बैठक की। अगर कूटनीति विफल रहती है, तो यूरोपीय नेताओं ने 27 देशों वाले यूरोपीय संघ की आर्थिक ताकत का इस्तेमाल करने की नई इच्छा का संकेत दिया है।
यूरोपीय आयोग के प्रवक्ता ओलोफ गिल ने सोमवार को कहा, हमारी प्राथमिकता बातचीत करना है, तनाव बढ़ाना नहीं। कई बार सबसे जिम्मेदार नेतृत्व संयम रखता है। उन्होंने कहा, ईयू के पास जरूरी उपाय हैं और अगर टैरिफ लगाए जाते हैं, तो वह जवाब देने के लिए तैयार है।
ईयू के लिए आगे क्या?
अब ट्रंप, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और अन्य वैश्विक नेता विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक के लिए दावोस पहुंच रहे हैं। फिलहाल यूरोपीय नेताओं और ट्रंप के बीच किसी बैठक का कार्यक्रम तय नहीं है। दावोस के बाद ईयू के 27 सदस्य देश गुरुवार शाम ब्रसेल्स में ट्रांसअटलांटिक संबंधों पर आपात बैठक करेंगे।
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष ने क्या कहा?
यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा ने कहा है कि ईयू नेता इस बात पर सहमत हैं कि टैरिफ ट्रांसअटलांटिक संबंधों को कमजोर करेंगे और ईयू-अमेरिका व्यापार समझौते के अनुरूप नहीं हैं। नेताओं ने कहा कि वे किसी भी तरह के दबाव का सामना करने के लिए तैयार हैं।
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यूरोप के पास कौन-कौन से विकल्प हैं?
वॉशिंगटन स्थित थिंक टैंक जर्मन मार्शल फंड की वरिष्ठ उपाध्यक्ष पेनी नास ने कहा कि यूरोप के पास कई आर्थिक विकल्प हैं, लेकिन आगे का रास्ता चुनौतीपूर्ण है। उन्होंने कहा कि यूरोप के लिए यह कठिन है कि वह अपनी ताकत दिखाए और साथ ही बड़े नुकसान या जवाबी कार्रवाई से बचे। नास ने कहा कि जब तक वे जवाबी कार्रवाई को मानने के लिए तैयार नहीं होंगे, तब तक अपनी ताकत दिखाना आसान नहीं होगा।
ईयू के पास अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए तीन बड़े आर्थिक हथियार हैं- नए टैरिफ लगाना, ईयू-अमेरिका व्यापार समझौते को निलंबित करना और एंटी-कोएर्शन इंस्ट्रूमेंट (जिसके तहत उन व्यक्तियों या संस्थाओं पर कार्रवाई की जा सकती है जो ईयू पर अनुचित दबाव डालते हैं।)
ईयू और अमेरिका के बीच जून में एक व्यापार समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनी थी, जिसे इस सप्ताह यूरोपीय संसद से मंजूरी मिलनी थी। लेकिन शनिवार को संसद के सबसे बड़े समूह के नेता, जर्मनी के सांसद मैनफ्रेड वेबर ने कहा कि फिलहाल इसकी मंजूरी संभव नहीं है। ईयू उन अमेरिकी सामानों पर भी टैरिफ लगा सकता है, जिनकी कीमत 93 अरब यूरो है और जिन्हें जुलाई के समझौते के बाद निलंबित किया गया था। हालांकि, प्रवक्ता ओलोफ गिल ने कहा कि अगर यह निलंबन नहीं बढ़ाया गया, तो अमेरिका के टैरिफ लागू करने की स्थिति में सात फरवरी से ये टैरिफ अपने आप लागू हो जाएंगे।












