नई दिल्ली. फिल्म पाकीजा (1972) का गाना ‘मौसम है आशिकाना’ सिर्फ एक फिल्मी गाना नहीं, बल्कि रोमांस और खूबसूरती का एक ऐसा अहसास है, जो वक्त के साथ और भी गहरा होता गया है. जब भी यह गाना बजता है, आंखों के सामने मीना कुमारी की वो सादगी और फिल्म की भव्यता तैरने लगती है. यह गाना उस पल को कैद करता है जब दिल में किसी के लिए प्यार हिलोरे मार रहा हो और बाहर का सुहाना मौसम उस जज्बे को और बढ़ा दे. इस गाने की सबसे बड़ी खासियत है इसकी सादगी और ठहराव. लता मंगेशकर की मखमली आवाज ने इसमें ऐसी जान फूंकी है कि आज के दौर के शोर-शराबे वाले गानों के बीच यह रूह को सुकून देने वाली दवा जैसा लगता है. गुलाम मोहम्मद ने इसकी धुन इतनी कमाल की बनाई है कि यह आज भी उतनी ही फ्रेश लगती है जितनी 50 साल पहले थी. कमाल अमरोही के निर्देशन में जिस तरह से इसे फिल्माया गया, वह मीना कुमारी की सुंदरता को एक अलग ही लेवल पर ले जाता है.
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