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Shammi Kapoor Favorite Street Food: कपूर परिवार बॉलीवुड के नामी परिवारों में से एक है. ये परिवार हमेशा से खाने-पीने का शौकीन रहा है. लेकिन एक दिलचस्प किस्सा शम्मी कपूर के भांजे ने शेयर किया, जिसमें उन्होंने बताया कि उनके मामा का फेवरेट स्ट्रीट फूड क्या था. जिसको वो चटकारों के साथ खाते थे.
नई दिल्ली. कपूर परिवार बॉलीवुड इतिहास में एक ऐसा नाम है जिसकी विरासत पीढ़ियों से चमकती आ रही है. पृथ्वीराज कपूर से लेकर राज कपूर, शम्मी कपूर, शशि कपूर और आज करीना व रणबीर तक… इस परिवार ने इंडस्ट्री को अनगिनत यादगार चेहरे दिए हैं. फाइल फोटो.

इसी विरासत से जुड़ा एक मजेदार किस्सा हाल ही में सोशल मीडिया पर चर्चा में है, जिसे परिवार के सदस्य जतिन कपूर ने साझा किया है. फाइल फोटो.

बॉलीवुड के दिग्गज एक्टर शम्मी कपूर का अंदाज जितना स्क्रीन पर जोशीला था, उतना ही जुनून उन्हें स्ट्रीट फूड खाने में भी था. हैरानी की बात यह है कि उनकी पहली पसंद मुंबई का स्टार फूड वडा पाव नहीं था. फाइल फोटो.
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पृथ्वीराज कपूर की बेटी उर्मिला सियाल के बेटे, कपूर परिवार के सदस्य और एक्टर जतिन कपूर ने हाल ही में एक दिलचस्प किस्सा शेयर किया, जिसमें उन्होंने अपने मामा शम्मी कपूर की इस दीवानगी का पर्दाफाश किया है. फाइल फोटो.

उन्होंने इंस्टाग्राम पर एक वीडियो शेयर कर यादें ताजा कीं. उन्होंने बताया कि जब भी उनके मामा शम्मी कपूर, अपने पिता पृथ्वीराज कपूर यानी नाना के मुंबई के माटुंगा स्थित घर आते थे, तो मस्ती का दौर शुरू हो जाता था. फाइल फोटो.

उन्होंने खुलासा किया, ‘एक पानी पूरी वाला अपने पूरी के डिब्बे और स्टैंड के साथ उनके माटुंगा स्थित घर तक ऊपर आ जाता था और अपनी पूरी गाड़ी लगा देता और वहीं पानी पूरी बेचना शुरू कर देता था.’ फाइल फोटो.

जतिन ने आगे बताया कि आमतौर पर वेंडर की प्लेट में 5-6 पूरी होती थीं. लेकिन शम्मी कपूर की प्लेट में कम से कम 20 पूरी होती थीं और जब शम्मी आते, तो सबकी प्लेट 20 पूरी वाली ही होती थी! जतिन ने हंसते हुए कहा- ‘हम दो-दो प्लेट खाते थे’. फाइल फोटो.

शम्मी कपूर का स्वाद भी कुछ खास था. उन्हें दही पूरी में भरपूर दही पसंद थी. जतिन के मुताबिक, ‘उनकी पूरी में इमली की चटनी होती, अंदर मूंग, आलू और ऊपर से थोड़ा चूरा.’ सबसे खास बात थी उनकी तीखापन पसंद करने की आदत. ‘शम्मी चाचा ऊपर से खूब लाल मिर्च डलवाते थे. अगर आप उनकी प्लेट को ऊपर से देखते, तो वह पूरी तरह लाल दिखती थी.’ फाइल फोटो.

जतिन ने मजाकिया अंदाज में कहा कि वे लोग इतनी पानी पूरी खा लेते थे कि हफ्तेभर तक पानी पूरी का नाम तक नहीं लेते थे. लेकिन 10 दिन बाद फिर से उसी वेंडर के पास पहुंच जाते और कहते,’थोड़ी दही पूरी बनाओ.’ वेंडर पूछता, ‘क्या शम्मी साहब वाली प्लेट बनाऊं?’ और तब उनका जवाब होता, ‘नहीं-नहीं, हमारे पास सिर्फ दो रुपये हैं, बस पांच पूरी वाली प्लेट बना दो.’ फाइल फोटो.

जतिन ने नॉस्टेल्जिया के साथ कहा, ‘प्लेट छोटी हो जाती थी, लेकिन प्यार, स्वाद और मजा वही रहता था.’ जतिन बताते हैं कि मामा का पानी-पूरी प्रेम इतना गजब का था कि ठेले वाले तक उन्हें ‘शम्मी साहब स्पेशल’ कहकर याद करते थे. माटुंगा का वो ठेला आज भी कई पुराने लोगों को याद है. फाइल फोटो.

जतिन ने नॉस्टेल्जिया के साथ कहा, ‘प्लेट छोटी हो जाती थी, लेकिन प्यार, स्वाद और मजा वही रहता था.’ जतिन बताते हैं कि मामा का पानी-पूरी प्रेम इतना गजब का था कि ठेले वाले तक उन्हें ‘शम्मी साहब स्पेशल’ कहकर याद करते थे. माटुंगा का वो ठेला आज भी कई पुराने लोगों को याद है. फाइल फोटो.
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