दुद्धी/सोनभद्र/एबीएन न्यूज। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक से लेकर देश के प्रधानमंत्री बनने तक के जीवन सफर, जनजातीय समाज से उनके गहरे जुड़ाव, जनजातीय उत्थान के लिए किए गए ऐतिहासिक प्रयासों और समावेशी विकास की दृष्टि को केंद्र में रखकर लिखी गई पुस्तक ‘वनबंधु नरेंद्र मोदी : जनजातीय उत्कर्ष के संवाहक’ का भव्य लोकार्पण 16 दिसंबर को नॉर्थ एवेन्यू, नई दिल्ली में संपन्न हुआ।
यह पूरे प्रदेश और विशेष रूप से सोनभद्र जनपद के लिए गर्व का विषय है कि दुद्धी निवासी डॉ. विनय कुमार व ज्योत्सना देवी की सुपुत्री राजनंदिनी द्वारा सह-लेखक सार्थक शुक्ला के साथ लिखी गई यह पुस्तक प्रभात प्रकाशन द्वारा प्रकाशित की गई है। पुस्तक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जीवन के उन पहलुओं को उजागर किया गया है, जहां उन्होंने जनजातीय समाज को केवल राजनीति का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण का सशक्त सहभागी माना।
पुस्तक के लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जनजातीय समाज के आत्मसम्मान, संस्कृति और अधिकारों को राष्ट्रीय विमर्श के केंद्र में स्थापित किया है। उन्होंने लेखकों की सराहना करते हुए कहा कि लेखन एक कठिन कार्य है और आज का युवा जब राष्ट्र निर्माण को ध्यान में रखकर लिख रहा है, तो यह अत्यंत सराहनीय है। यही विचार विकसित भारत की नींव रखेंगे और युवाओं की भूमिका इसमें अत्यंत महत्वपूर्ण है।
विशिष्ट अतिथि के रूप में राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाणा ने पुस्तक को जनजातीय नीति, नेतृत्व और संवेदनशील शासन का प्रामाणिक दस्तावेज बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी का स्पष्ट विजन है कि समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति तक विकास पहुंचे। उन्होंने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए प्रधानमंत्री मोदी द्वारा लागू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि आज भगवान बिरसा मुंडा की 150वीं जयंती के अवसर पर विकसित भारत का संकल्प और अधिक प्रासंगिक हो गया है।

केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री दुर्गादास उइके और केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री सावित्री ठाकुर ने भी अपने संबोधन में कहा कि यह पुस्तक प्रधानमंत्री मोदी के जनजातीय समाज के प्रति दृष्टिकोण, नीति और संवेदनशीलता को सरल भाषा में जन-जन तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है।
लेखक राजनंदिनी और सार्थक शुक्ला ने अपने उद्बोधन में कहा कि यह पुस्तक जनजातीय समाज के उत्कर्ष को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रखती, बल्कि सांस्कृतिक सम्मान, नेतृत्व निर्माण और आत्मनिर्भरता की व्यापक प्रक्रिया के रूप में प्रस्तुत करती है। यह संपूर्ण कार्यक्रम भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय संगठन मंत्री वी. सतीश के सान्निध्य में संपन्न हुआ। कार्यक्रम का संचालन प्रभात प्रकाशन के निदेशक प्रभात कुमार ने किया।
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