Jagdish Ji Aarti Lyrics: हिंदू धर्म में भगवान जगदीश जी को संपूर्ण ब्रह्मांड के पालनहार और सभी जीवों के रक्षक के रूप में माना जाता है. जगदीश जी की आरती एक ऐसी प्रार्थना है, जो भक्तों के दिल में भक्ति, शांति और विश्वास को जगाती है. इसे पढ़ने का तरीका सरल है, लेकिन असर बहुत गहरा होता है. घर में प्रतिदिन इस आरती का पाठ करने से न केवल मन शांत होता है, बल्कि परिवार में सुख-शांति और समृद्धि भी बढ़ती है. आरती के शब्द सरल होते हैं, लेकिन उनका अर्थ इतना गहरा है कि वे सीधे हृदय तक पहुंचते हैं. कई भक्त इसे मंदिर में, घर में पूजा के समय या किसी विशेष अवसर पर पढ़ते हैं. जगदीश जी की आरती का पाठ मानसिक तनाव को कम करने, सकारात्मक ऊर्जा को बढ़ाने और जीवन में विश्वास बनाए रखने में मदद करता है. इस आरती का एक और महत्व यह है कि यह भगवान के प्रति भक्त के प्रेम और सम्मान को व्यक्त करने का सबसे सुंदर तरीका है.
जगदीश जी की आरती का महत्व
जगदीश जी की आरती पढ़ने से जीवन में कई तरह के फायदे होते हैं. सबसे पहले, यह मन को शांति देती है. जब हम भगवान के नाम का उच्चारण करते हैं और उनकी महिमा का स्मरण करते हैं, तो हमारा मन रोजमर्रा की परेशानियों से दूर हो जाता है. इसके अलावा, आरती पढ़ने से घर में सकारात्मक वातावरण बनता है. घर के सभी सदस्य एक-दूसरे के प्रति प्यार और सहानुभूति महसूस करते हैं. विशेष रूप से बच्चों पर इसका असर बहुत अच्छा होता है क्योंकि उनकी मानसिकता में सच्चाई और भक्ति की भावना मजबूत होती है. आरती का नियमित पाठ करने से मानसिक तनाव कम होता है. इससे नींद बेहतर आती है, मन प्रसन्न रहता है और व्यक्ति अपने जीवन के छोटे-बड़े कामों में संतुलन बना पाता है.
आरती का पाठ कैसे करें
जगदीश जी की आरती का पाठ करना बहुत आसान है. सबसे पहले साफ और शांत स्थान पर बैठें. घर में पूजा स्थल या मंदिर के सामने दीपक और अगरबत्ती जलाएं. आरती के समय ध्यान रखें कि मन पूरी तरह भगवान में लगा रहे. आरती पढ़ते समय धीरे-धीरे शब्दों का उच्चारण करें और उनके अर्थ पर ध्यान दें. आरती के अंत में भगवान से अपनी मनोकामनाओं के लिए प्रार्थना करें और आभार व्यक्त करें. यदि संभव हो तो आरती को परिवार के साथ मिलकर पढ़ें, इससे भक्ति का अनुभव और भी गहरा होता है.
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॥ आरती श्री जगदीशजी ॥
ॐ जय जगदीश हरे, स्वामी ! जय जगदीश हरे.
भक्त जनों के संकट, क्षण में दूर करे॥
ॐ जय जगदीश हरे.
जो ध्यावे फल पावे, दुःख विनसे मन का.
स्वामी दुःख विनसे मन का.
सुख सम्पत्ति घर आवे, कष्ट मिटे तन का॥
ॐ जय जगदीश हरे.
मात-पिता तुम मेरे, शरण गहूं मैं किसकी.
स्वामी शरण गहूं मैं किसकी.
तुम बिन और न दूजा, आस करूं जिसकी॥
ॐ जय जगदीश हरे.
तुम पूरण परमात्मा, तुम अन्तर्यामी.
स्वामी तुम अन्तर्यामी.
पारब्रह्म परमेश्वर, तुम सबके स्वामी॥
ॐ जय जगदीश हरे.
तुम करुणा के सागर, तुम पालन-कर्ता.
स्वामी तुम पालन-कर्ता.
मैं मूरख खल कामी, कृपा करो भर्ता॥
ॐ जय जगदीश हरे.
तुम हो एक अगोचर, सबके प्राणपति.
स्वामी सबके प्राणपति.
किस विधि मिलूं दयामय, तुमको मैं कुमति॥
ॐ जय जगदीश हरे.
दीनबन्धु दुखहर्ता, तुम ठाकुर मेरे.
स्वामी तुम ठाकुर मेरे.
अपने हाथ उठाओ, द्वार पड़ा तेरे॥
ॐ जय जगदीश हरे.
विषय-विकार मिटाओ, पाप हरो देवा.
स्वमी पाप हरो देवा.
श्रद्धा-भक्ति बढ़ाओ, सन्तन की सेवा॥
ॐ जय जगदीश हरे.
श्री जगदीशजी की आरती, जो कोई नर गावे.
स्वामी जो कोई नर गावे.
कहत शिवानन्द स्वामी, सुख संपत्ति पावे॥
ॐ जय जगदीश हरे.
आरती के लाभ जीवन पर
1. मन की शांति: आरती पढ़ने से तनाव कम होता है और मानसिक संतुलन बढ़ता है.
2. परिवार में सुख: घर के वातावरण में सकारात्मक ऊर्जा आती है और रिश्तों में मिठास बढ़ती है.
3. आध्यात्मिक विकास: भगवान की भक्ति में वृद्धि होती है और आत्मा का अनुभव गहरा होता है.
4. सकारात्मक सोच: नियमित आरती से जीवन में आशा और उत्साह बना रहता है.

आरती के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें
-आरती पढ़ते समय मन अशांति से मुक्त होना चाहिए.
-पूजा स्थल हमेशा साफ और व्यवस्थित रखें.
-दीपक और अगरबत्ती का सही प्रयोग करें.
-आरती के शब्दों को समझकर पढ़ें, केवल उच्चारण करना पर्याप्त नहीं है.
जगदीश जी की आरती केवल शब्दों का संग्रह नहीं है, बल्कि यह विश्वास, भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का मार्ग है. इसे पढ़ने से न केवल मन शांति पाता है, बल्कि जीवन में सुख और संतुलन भी बढ़ता है. परिवार के सभी सदस्य जब इस आरती को नियमित रूप से पढ़ते हैं, तो घर में प्रेम और सहयोग की भावना मजबूत होती है.
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