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बॉलीवुड में कई एक्टर्स ऐसे हैं जो कमर्शियल सक्सेस और कल्ट फॉलोइंग के बावजूद इंडस्ट्री के बड़े अवॉर्ड्स से दूर रह जाते हैं. ऐसा ही एक नाम इस स्टार का भी है. इस स्टार ने खुद को बोल्ड किरदार, यादगार गाने और अलग स्टाइल ने उसे भीड़ से अलग खड़ा किया. यही वजह है कि बिना अवॉर्ड जीते भी वह आज इंडस्ट्री के सबसे चर्चित और प्रभावशाली स्टार्स में गिना जाता है.
नई दिल्ली. बॉलीवुड में एक ऐसा सितारे भी है, जिसने फिल्मी परिवार से ताल्लुक होने के बावजूद अपनी पहचान खुद गढ़ी. करीब दो दशकों तक उसने लगातार ऐसी फिल्में दीं जिन्हें आज भी ‘कल्ट क्लासिक’ माना जाता है. रोमांस हो, सस्पेंस हो या डार्क थ्रिलर हर जॉनर में उसने अलग तरह की भूमिकाएं चुनकर दर्शकों को चौंकाया.खासकर 2000 के दशक में उसकी फिल्मों ने युवा दर्शकों के बीच जबरदस्त क्रेज पैदा किया और उसे ‘थ्रिलर किंग’ जैसी उपाधि भी मिली.दिलचस्प बात यह है कि कई सुपरहिट और चर्चित फिल्मों के बावजूद अवॉर्ड्स की ट्रॉफी उससे हमेशा दूर रही. नॉमिनेशन तो कई बार मिले, लेकिन जीत कभी नहीं मिली. इसके बावजूद उसकी लोकप्रियता कम नहीं हुई, बल्कि दर्शकों का प्यार लगातार बढ़ता गया. जानते हैं किसकी बात कर रहे हैं?

इमरान हाशमी का करियर किसी तय ढर्रे पर नहीं चला. उन्होंने हमेशा अलग और बोल्ड सब्जेट वाली फिल्मों का चुनाव किया. डार्क रोमांस, सस्पेंस और थ्रिलर जैसे जॉनर में उन्होंने जो छाप छोड़ी, उसने 2000 के दशक के मध्य में बॉलीवुड की दिशा ही बदल दी. जहर, आशिक बनाया आपने, कलयुग, अक्सर और गैंगस्टर जैसी फिल्मों ने उन्हें एक नए तरह के हीरो के रूप में स्थापित किया.

इमरान हाशमी का फिल्मी परिवार से गहरा नाता है. वह आलिया भट्ट, पूजा भट्ट और राहुल भट्ट के कजिन हैं. यह रिश्ता उनकी नानी पूर्णिमा दास के जरिए जुड़ता है, जो महेश भट्ट और मुकेश भट्ट की मां की बहन थीं. यानी महेश और मुकेश भट्ट उनके मामा लगते हैं. हालांकि, पारिवारिक कनेक्शन के बावजूद इमरान ने अपनी पहचान खुद बनाई.
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उनके करियर का बड़ा टर्निंग पॉइंट 2004 की फिल्म मर्डर रही, जिसे अनुराग बसु ने निर्देशित किया था. इस फिल्म में उनके किरदार ने उन्हें रातों-रात स्टार बना दिया. इसके बाद ‘सीरियल किसर’ का टैग भी उन्हें मिला, जिसने शुरुआत में उन्हें सुर्खियां दीं, लेकिन बाद में यह उनकी बहुमुखी प्रतिभा पर हावी होने लगा. बावजूद इसके उन्होंने अपनी इमेज से बाहर निकलकर कई गंभीर और दमदार भूमिकाएं निभाईं.

2010 में आई ‘वन्स अपॉन अ टाइम इन मुंबई’ ने उनके अभिनय की नई परतें दिखाईं. मिलन लुथरिया की इस पीरियड ड्रामा फिल्म में उनके प्रदर्शन को आलोचकों ने खूब सराहा. वहीं द डर्टी पिक्चर उनके करियर की सबसे सफल फिल्मों में से एक साबित हुई, जिसमें उन्होंने विद्या बालन के साथ एक परिपक्व और संयमित किरदार निभाया. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुपरहिट रही और उनके अभिनय की नई पहचान बनी.

इसके अलावा आवारापन, जन्नत, राज 3, शंघाई, हमारी अधूरी कहानी जैसी फिल्मों ने साबित किया कि इमरान केवल रोमांटिक या बोल्ड इमेज तक सीमित नहीं हैं. दिलचस्प बात यह है कि उन्हें कई बार नामांकन मिले, लेकिन कोई बड़ा अवॉर्ड नहीं मिला.खुद इमरान कई इंटरव्यू में कह चुके हैं कि उन्हें अवॉर्ड समारोहों से ज्यादा दर्शकों का प्यार मायने रखता है.

दो दशक से ज्यादा लंबे करियर में इमरान हाशमी ने यह साबित कर दिया कि असली सफलता ट्रॉफियों से नहीं, बल्कि दर्शकों के दिलों में जगह बनाने से मिलती है. यही वजह है कि आज भी फैंस कहते हैं ‘आधा बॉलीवुड एक तरफ, इमरान हाशमी एक तरफ.’
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