Magh Maas 2026 Shaiya daan: प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में लगने वाला माघ मास मेला हिंदू धर्म में काफी महत्व रखता है. मान्यताओं के मुताबिक, पुण्य प्रदायिनी मां गंगा, पापनाशिनी मां यमुना और बुद्धिदायिनी मां सरस्वती के पावन संगम पर माघ मास के दौरान सभी देवी-देवता निवास करते हैं.
जिस वजह से इस क्षेत्र में पूरे एक महीने तक नियम अनुशासन के साथ दान, पवित्र स्नान, पूजा, हवन, जप-तप, व्रत, यज्ञ, हवन और धार्मिक अनुष्ठान किया जाता है. कल्पवास के दौरान किए जाने वाले दान में शय्या दान के बारे में बहुत कम लोग ही जानते हैं. आइए जानते हैं इसके बारे में.
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प्रयाग माघ माह में कितने तरह का दान किया जाता है?
हिंदू मान्यताओं के मुताबिक, किसी भी तीर्थ स्थान पर दान का महत्व काफी ज्यादा होता है, लेकिन यही दान तीर्थों के राजा कहे जाने वाले प्रयागराज में माघ मास के दौरान किया जाए तो उसका धार्मिक महत्व कई गुना बढ़ जाता है.
जानें माने ज्योतिष के जानकार और पाल बालाजी के परम भक्त पंडित अनीष व्यास के मुताबिक, तीर्थों में कल्पवास के दौरान किया गया दान कई हजार गुना अधिक फल प्रदान करता है. प्रयागराज में कल्पवास के दौरान सामान्य रूप से 10 तरह के दान किए जाते हैं.
इनमें गाय, घी, तिल, सोना, भूमि, वस्त्र, अन्न, गुड़, चांदी और नमक का दान है. इसके अलावा प्रयागराज में वेणी दान, गुप्त दान के साथ शय्या दान का भी विशेष महत्व होता है.
शय्या दान कौन करता हैं?
हिंदू परंपराओं में शय्या दान का विशेष महत्व होता है. यह दान किसी व्यक्ति के मृत्यु के बाद या फिर 12 साल के कल्पवास पूरे होने के बाद किया जाता है. इन दोनों जगहों पर किये जाने वाले शय्या दान के पीछे मोक्ष की कामना निहित है. माना जाता है कि, कल्पवास के दौरान जाने-अनजानें में जो भी गलती होती है, उसका पश्चताप भी हो जाता है. हिंदू धर्म में दान तमाम तरह के दुखों और दोष दूर करने का माध्यम है.
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शय्या दान किसे दिया जाता है?
सनातन धर्म में अलग-अलग तरह के दान के लिए समाज में अलग-अलग लोग इसके अधिकारी बनाए गए हैं. जैसे मृत्यु के बाद दिए जाने वाले शय्या दान का अधिकारी महापात्र होता है, इसी तरह किसी भी तीर्थ स्थान पर दिए जाने वाले दान वहां के तीर्थ पुरोहित के हक में जाता है. संगम नगरी प्रयागराज में किए जाने वाले शय्या दान के अधिकारी वहां के रहने वाले लोग ही होते हैं.
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