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5 फरवरी, 2016 को रिलीज हुई ‘सनम तेरी कसम’ का सफर बॉलीवुड में किसी चमत्कार से कम नहीं है. हर्षवर्धन राणे और मावरा होकेन स्टारर यह फिल्म अपनी शुरुआती रिलीज पर बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप हो गई थी. खराब मार्केटिंग और नई स्टार कास्ट की वजह से दर्शक सिनेमाघरों तक नहीं पहुंचे. हालांकि, फिल्म के संगीत और इसकी दिल को छू लेने वाली कहानी ने धीरे-धीरे डिजिटल दुनिया में एक कल्ट फॉलोइंग हासिल कर ली. दर्शकों की जबरदस्त मांग और मेकर्स द्वारा रणनीतिक री-रिलीज ने नामुमकिन को मुमकिन कर दिखाया. फिल्म ने न सिर्फ अपने दूसरे थिएट्रिकल रन में अच्छी कमाई की, बल्कि ब्लॉकबस्टर का दर्जा भी हासिल किया.
नई दिल्ली. बॉलीवुड में अक्सर कहा जाता है कि किसी फिल्म की किस्मत उसके पहले शुक्रवार को ही तय हो जाती है, लेकिन 2016 में एक ऐसी फिल्म आई जिसने न सिर्फ इस पुराने नियम को चुनौती दी, बल्कि इसे पूरी तरह से पलट दिया. हम बात कर रहे हैं ‘सनम तेरी कसम’ की.

जब यह फिल्म पहली बार 5 फरवरी, 2016 को रिलीज हुई थी, तो इसे ‘फ्लॉप’ का टैग मिला था. लेकिन बाद में इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर एक ‘विनर’ के तौर देखा गया. यह उस रणनीतिक सोच और जुनून की कहानी है जिसने एक लगभग खत्म हो चुके प्रोजेक्ट में जान फूंकी और दूसरी रिलीज पर इसे करोड़ों कमाने वाली ‘हिट’ में बदल दिया.

5 फरवरी, 2016 यानी वैलेंटाइन वीक में रिलीज होने के बावजूद ‘सनम तेरी कसम’ को बॉक्स ऑफिस पर वह प्यार नहीं मिला जिसकी उम्मीद थी. डायरेक्टर जोड़ी राधिका राव और विनय सप्रू ने एक ऐसी लव स्टोरी बुनी थी जो बहुत ज्यादा इमोशनल और दुखद थी. लेकिन उस समय, बाजार में बड़े सितारों का दबदबा था. यह हर्षवर्धन राणे का हिंदी डेब्यू था और मावरा होकेन एक नया नाम थीं.
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फिल्म अपने पहले दिन एक करोड़ का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई. क्रिटिक्स ने इसे ‘बहुत ज्यादा मेलोड्रामैटिक’ कहकर खारिज कर दिया. सिर्फ एक या दो हफ्ते में ही फिल्म सिनेमाघरों से बाहर हो गई. उस समय किसी ने नहीं सोचा था कि यह फिल्म दोबारा कभी सिनेमाघरों में दिखेगी, हालांकि फिल्म सिनेमाघरों में फ्लॉप हो गई, लेकिन इसका संगीत (हिमेश रेशमिया द्वारा कंपोज किया गया) हर घर में सनसनी बन गया.

‘खींच मेरी फोटो’ से लेकर ‘तेरा चेहरा’ तक, हर गाना चार्टबस्टर बन गया. जब यह फिल्म टीवी और OTT प्लेटफॉर्म पर रिलीज हुई, तो युवाओं ने इसे खोजा. ‘इंदर’ के रूप में हर्षवर्धन का गुस्सा और ‘सारू’ के रूप में मावरा की मासूमियत ने सोशल मीडिया पर मीम्स और क्लिप्स की बाढ़ ला दी. साल बीतते गए, लेकिन फिल्म का क्रेज और भी मजबूत होता गया. यहीं पर फिल्म बनाने वालों को एक आइडिया आया- ‘क्या हम इस फिल्म को फिर से जिंदा कर सकते हैं?’

फिल्में आमतौर पर 20 या 25 साल बाद दोबारा रिलीज होती हैं. लेकिन ‘सनम तेरी कसम’ के मेकर्स ने देखा कि आज के युवा इस फिल्म के दीवाने हैं. उन्होंने एक साहसिक कदम उठाया. फिल्म के साउंड और विजुअल्स को थोड़ा अपडेट किया गया और इसे सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज करने का प्लान बनाया गया. यह सिर्फ एक री-रिलीज नहीं थी, बल्कि एक न्याय की मांग थी.

जब फिल्म सिनेमाघरों में दोबारा रिलीज हुई, तो 2016 के मुकाबले नजारा बिल्कुल उल्टा था. हाउसफुल के बोर्ड लगे थे और दर्शक सिनेमाघरों में रो रहे थे और चीयर कर रहे थे. जहां फिल्म के डिस्ट्रीब्यूटर्स को शुरुआती रिलीज के दौरान नुकसान हुआ था, वहीं दूसरी रिलीज ने उन्हें फायदा पहुंचाया.

री-रिलीज के दौरान फिल्म ने कई नई फिल्मों से बेहतर प्रदर्शन किया. यह भारतीय सिनेमा के उन दुर्लभ मामलों में से एक है जहां कोई फिल्म आधिकारिक तौर पर दूसरी बार रिलीज में हिट का दर्जा हासिल करती है. ‘सनम तेरी कसम’ की सफलता ने बॉलीवुड को एक नया रास्ता दिखाया है. इसने साबित किया कि अगर किसी फिल्म में सच्चाई है, तो वह समय की कसौटी पर खरी उतरेगी.
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