इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि प्रेमी जोड़े को सुरक्षा देना पुलिस की मर्जी या उपकार नहीं, कानूनी बाध्यता है। ऑनर किलिंग की संभावना हो तो उन्हें सुरक्षित आवास (सेफ हाउस) में रखना भी पुलिस का दायित्व है। जोड़े की सुरक्षा में टालमटोल करना पुलिस अधिकरियों को भारी पड़ सकता है।
यह टिप्पणी न्यायमूर्ति गरिमा प्रसाद की एकल पीठ ने हापुड़ के प्रेमी जोड़े की ओर से तत्काल सुरक्षा मुहैया करने की मांग वाली याचिका पर की। याचिका के मुताबिक 20 वर्षीय युवती ने अपनी मर्जी से 33 साल के युवक से निकाह किया था। युवती के पिता इसके खिलाफ थे। उन्हें शक था कि युवक पहले से शादीशुदा है। हालांकि, स्थायी अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि यह दोनों की पहली शादी है।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने प्रदेश सरकार की ओर से जारी 31 अगस्त 2019 का शासनादेश का जिक्र किया। कहा कि जोड़े को सुरक्षित व शांतिपूर्ण जीवन मुहैया कराने की मांग करना उनका अधिकार है। पुलिस इस जिम्मेदारी से भाग नहीं सकती। लापरवाह पुलिस अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकती है।
क्या है शासनादेश
31 अगस्त 2019 का शासनादेश शक्ति वाहिनी मामले में सुप्रीम कोर्ट की ओर से ऑनर किलिंग और खाप पंचायतों के फैसले के खिलाफ दिए गए दिशानिर्देशों का हिस्सा है।










