अमेरिका के विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने एक साक्षात्कार में कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की प्राथमिकता ईरान के साथ एक समझौता करना है। रुबियो ने आगे कहा कि ट्रंप ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्ला अली खामेनेई से मिलने के लिए भी तैयार हैं। ब्लूमबर्ग को दिए इंटरव्यू में रुबियो ने कहा, ‘राष्ट्रों को एक-दूसरे से संवाद करना चाहिए। मैं ऐसे राष्ट्रपति के अधीन काम करता हूं जो किसी से भी मिलने को तैयार हैं।’
मार्को रुबियो ने विश्वास जताया कि अगर खामेनेई मुलाकात की इच्छा जताएं तो ट्रंप उनसे मिलेंगे। उन्होंने कहा कि मुलाकात की वजह सहमति नहीं, बल्कि समस्याओं के समाधान के लिए संवाद को जरूरी मानने की सोच होगी।
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यूरोप के नेताओं को भी संदेश दे गए रुबियो
रुबियो ने यूरोप के नेताओं को भी संदेश दिया कि उन्हें अमेरिका के साथ साझा परंपराओं और मूल्यों की ओर लौटना चाहिए। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि यूरोप समृद्ध हो, क्योंकि दोनों के बीच गहरे संबंध हैं और उनका गठबंधन बेहद महत्वपूर्ण है। हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि यह ऐसा गठबंधन होना चाहिए जिसमें सहयोगी सक्षम हों और अपने मूल्यों की रक्षा के लिए तैयार हों।
उन्होंने कहा, ‘आखिर हमें क्या जोड़ता है? हम एक ही सभ्यता के उत्तराधिकारी हैं और यह महान सभ्यता है, जिस पर हमें गर्व होना चाहिए।’ रुबियो की ये टिप्पणियां म्यूनिख सुरक्षा सम्मेलन में दिए गए उनके भाषण के विस्तार के रूप में देखी जा रही हैं। उनका लहजा उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के पिछले वर्ष दिए गए आक्रामक भाषण की तुलना में अधिक सौम्य था, हालांकि उसमें ट्रंप के राष्ट्रवादी संदेश की झलक भी थी।
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रुबियो के बयान पर क्या बोला यूरोप?
गौरतलब है कि जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भी हाल में कहा था कि ट्रांसअटलांटिक संबंधों को विकसित होना चाहिए और यूरोप को अपनी सुरक्षा व स्वतंत्रता को मजबूत करना होगा। यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने रुबियो के भाषण पर राहत जताई, लेकिन कहा कि कुछ सीमाएं ऐसी पार हो चुकी हैं जिन्हें वापस नहीं लिया जा सकता। वहीं ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने यूरोप को अपनी रक्षा और सुरक्षा के मुद्दे पर आत्मसंतोष से बचने की सलाह दी।
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