नई दिल्ली. फिल्म आया सावन झूम के (1969) का गाना ‘साथिया नहीं जाना के जी ना लगे’ आज भी रोमांस की एक मिसाल है. यह गाना धर्मेंद्र और आशा पारेख की उस सुपरहिट जोड़ी पर फिल्माया गया है, जिनकी केमिस्ट्री ने उस दौर में पर्दे पर आग लगा दी थी. मोहम्मद रफी और लता मंगेशकर की मखमली आवाजों ने इस गाने को अमर बना दिया है. गाने की सबसे खास बात इसकी सादगी और पहाड़ों के बीच की खूबसूरत लोकेशन है. जब धर्मेंद्र और आशा पारेख एक-दूसरे से न जाने की जिद करते हैं, तो वह मासूमियत और प्यार आज के गानों में कम ही दिखता है. लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का संगीत और आनंद बख्शी के बोल इतने सीधे और दिल को छू लेने वाले हैं कि आप गुनगुनाए बिना नहीं रह सकते.
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