ईरान का इजरायल और अमेरिका के साथ युद्ध आज पूरी दुनिया पर प्रभाव डाल रहा है. इस युद्ध का दुनिया में कच्चे तेल और गैस के आयात-निर्यात पर बहुत बुरा असर पड़ा है. दुनिया का सबसे शक्तिशाली देश कहा जाने वाला अमेरिका और इजरायल लगातार ईरान पर जोरदार हमले कर रहे हैं, लेकिन खाड़ी देश ईरान दोनों देशों को मुंहतोड़ जवाब दे रहा है.
हालांकि, ऊपर से देखने में यह युद्ध दो ताकतवर देश बनाम ईरान के बीच दिखाई दे रहा है, लेकिन पर्दे के पीछे रूस, चीन और उत्तर कोरिया जैसे देश ईरान की चुपचाप मदद कर रहे हैं. ऐसे में यह कहा जा सकता है कि यह सभी देश ईरान के साइलेंट साथी हैं.
रूस ईरान का कैसे कर रहा सहयोग?
अमेरिका के कट्टर दुश्मन माना जाने वाले देश रूस ईरान को खुला सहयोग के साथ छिपकर भी सहयोग दे रहा है. खुले सहयोग की बात करें, तो रूस और ईरान के बीच 2025 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी समझौता हुआ, जिसमें रक्षा और खुफिया सहयोग शामिल है. वहीं, छिपे सहयोग के तहत रूस ईरान को अमेरिकी सैन्य ठिकानों, जहाजों और विमानों की लोकेशन पर खुफिया जानकारी साझा कर रहा है, ताकि ईरान हमले कर सके. हालांकि, रूस खुले तौर पर इनकार करता रहा है. वह यूक्रेन युद्ध से सीखी गई उन्नत ड्रोन तकनीक को भी साझा कर रहा है. ड्रोनों की वेव अटैक और कोर्स बदलने की रणनीति और कंधे से फायर होने वाली एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइलें, एयर डिफेंस सिस्टम सप्लाई कर रहा है.
लिस्ट में चीन का भी नाम शामिल
खुले सहयोग के तौर पर चीन ईरान का तेल खरीदकर आर्थिक रूप से मजबूत रख रहा है, जो युद्ध में ईरान की मदद करता है. चीन सावधानी बरत रहा है ताकि अमेरिका से सीधा टकराव न हो, लेकिन ईरान को निर्भर बनाकर लंबे समय में फायदा उठा रहा है. चीन ने ईरान की अर्थव्यवस्था में $300-400 बिलियन के निवेश का वादा किया, बदले में ईरान से सस्ते और स्थिर तेल की आपूर्ति कर रहा है.
चीन ईरान के स्कूल हमले के पीड़ितों के लिए 200,000 डॉलर दान करेगा. बीजिंग के विदेश मंत्री ने कहा कि चाइनीज रेड क्रॉस सोसाइटी ईरान की रेड क्रीसेंट सोसाइटी के जरिए 200,000 अमेरिकी डॉलर की आपातकालीन मानवीय मदद करेगी.
जबकि छुपे सहयोग के तौर पर चीन और ईरान के बीच स्पेयर पार्ट्स, मिसाइल कंपोनेंट्स और फाइनेंशियल सहायता देने की तैयारी, CM-302 एंटी-शिप क्रूज मिसाइलें, MANPADS, एंटी-बैलिस्टिक और एंटी-सैटेलाइट हथियारों पर बातचीत तेज हुई.
उत्तर कोरिया से भी ईरान को मिल रही मदद
वहीं, अमेरिका के खिलाफ रहने वाला उत्तर कोरिया भी ईरानी पक्ष का खुला सहयोग कर रहा है. जबकि छुपे सहयोग में हथियार और तकनीकी सहयोग ईरान और उत्तर कोरिया लंबे समय से बैलिस्टिक मिसाइल और परमाणु तकनीक साझा करते हैं. यहां तक कि यूरेनियम सप्लाई होती रही है.
‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ है ईरान की छुपी हुई ताकत
ईरान के लिए प्रॉक्सी वार करने वाले संगठन उसकी ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ है, जिसमें लेबनान के हिजबुल्लाह, यमन के हूती विद्रोही, ईराक के PMF मिलिशिया और गाजा का हमास संगठन शामिल हैं.
- लेबनान – हिजबुल्ला – हिजबुल्लाह ईरान के ‘एक्सिस ऑफ रेसिस्टेंस’ का मुख्य हिस्सा है. इसका लीडर ईरान के सुप्रीम लीडर से आदेश लेता है, 1982 में लेबनान में इजरायल के आक्रमण के बाद ईरान ने हिजबुल्लाह को बनाया और मजबूत किया. ईरान IRGC हिजबुल्लाह को फंडिंग करता है, लेबनान में इजरायल में इसको भारी नुकसान पहुंचाया है
- यमन – हूती – हुतियों का प्रसिद्ध नारा है – अल्लाह महान है. अमेरिका का नाश हो, इजरायल का नाश हो, यहूदियों का विनाश हो, इस्लाम की विजय हो. हूती यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सुन्नी सरकार के खिलाफ गृहयुद्ध लड़ रहे हैं. ईरान उन्हें हथियार, ट्रेनिंग और फंडिंग देता है, जिससे वे मिसाइल, ड्रोन और समुद्री हमलों में सक्षम हुए हैं.
- ईराक – PMF मिलिशिया – Popular Mobilization Forces जिसे हश्द अल-शाबी भी कहा जाता है, इराक की एक प्रमुख पैरामिलिट्री फोर्स है. यह 2014 में ISIS के खिलाफ लड़ाई के दौरान बनी थी और अब इराकी सेना का आधिकारिक हिस्सा है, लेकिन इसमें कई ईरान-समर्थित मिलिशिया शामिल हैं, यह इराकी प्रधानमंत्री के अधीन है, लेकिन कई ब्रिगेड जैसे Kataib Hezbollah, Asaib Ahl al-Haq, Harakat Hezbollah al-Nujaba, Kataib Sayyid al-Shuhada ईरान के IRGC से भी जुड़े हैं और स्वतंत्र रूप से काम करते हैं. ईरान पर US-इज़राइल हमलों के बाद PMF के ईरान-समर्थित फ्रैक्शन ने US बेस पर ड्रोन, रॉकेट और मिसाइल हमले किए.
- गाजा – हमास – मुस्लिम ब्रदरहुड से निकला है ये संगठन, इसका लक्ष्य इजरायल के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष और फिलिस्तीनी क्षेत्रों वेस्ट बैंक, गाजा, पूर्वी यरुशलम में एक इस्लामिक राज्य स्थापित करना है. 1990 के दशक से ईरान हमास का प्रमुख समर्थक रहा है. ईरान फंडिंग करता रहा है, हथियार और तकनीक देता रहा है, इजरायली हमलों में कमजोर हुआ है, लेकिन खत्म नहीं हुआ है.
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