ईरान-इजरायल युद्ध के बीच एलपीजी सिलेंडर को लेकर लोगों की चिंताए बढ़ गई हैं. भारत सरकार का कहना है कि घरेलू गैस को लेकर कोई दिक्कत नहीं है. अफवाहों पर ध्यान न दें. इस बीच सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार की जानकारी में सब है. बीजेपी के सांसद लोगों ने भी सरकार को पत्र लिखा है. कई राज्यों में होटल वालों ने सरकारों को जानकारी दी है कि वो अब इसे नहीं चला सकते. यूपी जैसा बड़ा स्टेट, जहां सरकार दावे कर रही थी कि सबसे ज्यादा गैस कनेक्शन मिले हैं, अब सरकार की जिम्मेदारी बनती है कि वो सिलेंडर भरे कैसे जाएंगे.
सरकार के पास कोई वैकल्पिक रास्ता है?- अखिलेश यादव
अखिलेश यादव ने सवाल किया कि क्या सरकार के पास कोई वैकल्पिक रास्ता है? इस लड़ाई के वक्त में जो कमी हो रही है, उसकी पूर्ति सरकार कैसे करेगी? नहीं तो चीजें इतनी महंगी हो जाएंगी कि आम आदमी के हाथ से बहुत सी चीजें निकल जाएंगी. सपा चीफ ने कहा कि अगर दो हफ्ते इसी तरह चला तो हमें-आपको वही पुरानी व्यवस्था पर खाना बनाना पड़ेगा. कंडे खोजने पड़ेंगे और लकड़ी का इंतजाम करना पड़ेगा.
कई देशों में पाबंदियां लगनी शुरू- अखिलेश यादव
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि मान लीजिए कि गैस की आपूर्ति नहीं हुई, सरकार ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, जिन देशों से ये लेते हैं वहां से चीजें भारत नहीं पहुंचीं तो ऑप्शन क्या है? सुनने में आ रहा है कि कई देशों में पाबंदियां लगनी शुरू हो गई हैं.
अखिलेश यादव ने ये भी कहा, “कहीं ऐसा न हो कि सरकार के गलत फैसले की वजह से कंडे पर और लकड़ी पर खाना बनाना पड़े. लोकसभा में समाजवादी पार्टी का पक्ष यही था कि पहले इस पर चर्चा हो जाए कि देश में इन तमाम चीजों का इंतजाम कैसे होगा?”
सिलेंडर पर सरकार के मुंह क्यों सिले हैं- अखिलेश यादव
वहीं अपने एक्स पोस्ट में उन्होंने लिखा, “सिलेंडर पर सरकार के मुंह क्यों सिले हैं? कमर्शियल सिलेंडर की किल्लत दरअसल अपने घरों से दूर रह रहे विद्यार्थियों, कामगारों, पेशेवरों, नौकरीपेशा लोगों व श्रमिकों-मज़दूरों के लिए भोजन की भी समस्या है. इसके अतिरिक्त क्लाउड किचन व फूड सप्लाई करनेवाले स्टार्टअप, सप्लाई चेन, ट्रेवल तक के बुरी तरह प्रभावित होने की आशंका है. सरकार हर तरह की गैस की आपूर्ति के बारे में स्पष्ट सूचना दे जिससे जनता समय रहते वैकल्पिक व्यवस्था कर सके. सरकार की गलत नीतियों का ख़ामियाज़ा जनता क्यों भुगते?”
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