सोनभद्र/एबीएन न्यूज। ढोल-नगाड़ों की गूंज, लोकगीतों की मधुरता और वीर रस से ओत-प्रोत आल्हा गायन के साथ जनपद सोनभद्र में तीन दिवसीय जनजातीय उत्सव का भव्य शुभारंभ सोमवार को हुआ। यह सांस्कृतिक आयोजन उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र, संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार तथा जिला प्रशासन सोनभद्र के संयुक्त तत्वावधान में संत कीनाराम स्नातकोत्तर महाविद्यालय के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है।
उत्सव के पहले दिन विभिन्न लोक और जनजातीय सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम की शुरुआत महोबा से आए प्रसिद्ध लोक कलाकार शरद अनुरागी और उनके दल के वीर रस से भरपूर आल्हा गायन से हुई। उनकी प्रस्तुति में आल्हा-ऊदल की वीर गाथाओं की गूंज सुनाई दी, जिसने उपस्थित दर्शकों में जोश और उत्साह का संचार कर दिया।

इसके बाद विभिन्न जनजातीय और लोकनृत्यों की आकर्षक प्रस्तुतियां दी गईं, जिनमें क्षेत्रीय संस्कृति और परंपराओं की झलक देखने को मिली। कलाकारों ने अपने नृत्य और संगीत के माध्यम से जनजातीय जीवन की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

राजस्थान से आए तेजकरण और उनके दल ने चकरी, चरी और भवई नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। उनकी रंगारंग प्रस्तुति को दर्शकों ने खूब सराहा और तालियों की गड़गड़ाहट से कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।

कार्यक्रम का शुभारंभ मुख्य अतिथि वरिष्ठ समाजसेवी राम सकल चौबे और विशिष्ट अतिथियों शमशेर बहादुर, मोहन कुशवाहा, राजेश द्विवेदी, डॉ. अशोक मिश्रा तथा बलवंत सिंह द्वारा दीप प्रज्वलन कर किया गया। कार्यक्रम की रूपरेखा केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा द्वारा तैयार की गई थी। इस अवसर पर कार्यक्रम समन्वयक मनोज कुमार सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे। कार्यक्रम का संचालन आराध्या और गौरी ने प्रभावी ढंग से किया।
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