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बॉलीवुड में रिश्तेदारों की जोड़ी कई बार धमाल मचा चुकी है. 1986 में एक ऐसी फिल्म आई जिसमें जीजा-साले की जोड़ी नजर आई थी. दोनों ने ऑनस्क्रीन भाई का किरदार का निभाया था. जीजा ने बड़े भाई का रोल किया था. फिल्म सुपरहिट रही. दर्शकों ने ड्रग तस्कर के रोल में नजर आए सुपरस्टार के रोल को बहुत पसंद किया. दुर्भाग्य से फिल्म में बड़े भाई का रोल निभा रहे एक्टर के बहनोई का करियर डूब गया.
संजय दत्त ने 1976 में आई ‘रॉकी’ फिल्म से बॉलीवुड में डेब्यू किया था. हालांकि इस मूवी के साथ ही उनका ड्रग फेज शुरू हो गया था. ड्रग एडिक्शन से बाहर निकालने के लिए संजय दत्त के पिता सुनील दत्त ने बहुत कोशिश की. उन्होंने संजय दत्त को यूएस के एक रिहैब सेंटर में भेजा. 1976 के बाद संजय दत्त ने कई फिल्मों में काम किया लेकिन कोई भी फिल्म बॉक्स ऑफिस पर उतना कमाल नहीं दिखा सकी. 2018 में संजय दत्त की बॉयोग्राफिकल फिल्म ‘संजू’ में एक्टर की जिंदगी से जुड़े कई राज से पर्दाफाश किया गया है.

संयोग की बात यह है कि रिहैब सेंटर से वापस लौटने के बाद संजय दत्त ने ‘नाम’ फिल्म में काम किया और ड्रग तस्कर की भूमिका निभाई. 12 सितंबर 1986 को रिलीज हुई इस फिल्म में उनके परफॉर्मेंस की बहुत तारीफ हुई थी. फिल्म में कुमार गौरव ने संजय दत्त के बड़े भाई की भूमिका निभाई थी. असल जिंदगी में वो संजय दत्त के बहनोई हैं. संजय दत्त की बहन नम्रता दत्त के पति हैं और सुपरस्टार राजेंद्र कुमार के बेटे हैं. दोनों की शादी 1984 में हुई थी. नाम फिल्म कुमार गौरव ने प्रोड्यूस की थी. स्क्रिप्ट सलीम खान ने लिखी थी. डायरेक्शन महेश भट्ट ने किया था. जावेद अख्तर से अलग होने के बाद सलीम खान की यह पहली फिल्म थी.

सुपरहिट एक्शन थ्रिलर फिल्म में हमें नूतन, पूनम ढिल्लों, अमृता सिंह और परेश रावल भी नजर आए थे. यह महेश भट्ट की पहली बड़ी हिट फिल्म थी. इससे पहले वो अर्थ और सारांश फिल्मों को डायरेक्ट कर चुके थे. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. फिल्म का म्यूजिक एल्बम सुपरहिट रहा था. ‘चिट्ठी आई है, तू कल चला जाएगा तो मैं क्या करूंगा, तेरे दिल की तू जाने, मैं अपने दिल की कहती हूं’ गाने लोगों के बहुत पसंद आए थे.

नाम फिल्म का बजट करीब 2 करोड़ रुपये का रखा गया था. फिल्म ने इंडिया में 4 करोड़ जबकि वर्ल्ड वाइड 7 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. 1986 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट यह मूवी चौथे नंबर पर थी. फिल्म नाम 80 के दशक की सबसे पॉप्युलर फिल्मों से एक है.

फिल्म में कुमार गौरव ने संजय दत्त के सीधे-सादे बड़े भाई का रोल निभाया था. संजय दत्त का रोल बहुत दमदार था. दर्शकों का खास लगाव संजय दत्त के रोल से था. यह फिल्म संजय दत्त के करियर के लिए जहां टर्निंग प्वाइंट साबित हुई वहीं कुमार गौरव को इससे कुछ फायदा नहीं हुआ. इसके उलट संजय दत्त का करियर फिर से चल निकला.

कुमार गौरव ने 1981 में आई फिल्म ‘लव स्टोरी’ से बॉलीवुड में अपने करियर की शुरुआत की थी. लव स्टोरी के रिलीज होने के बाद रातोंरात स्टार बन गए लेकिन बाद में कोई भी फिल्म उनके करियर को सहारा नहीं दे पाई और एक के बाद एक फिल्में फ्लॉप होती चली गईं. ऐसे में उनके पिता राजेंद्र कुमार ने फेमस स्क्रिप्ट राइटर सलीम खान की मदद ली. ‘नाम’ फिल्म के लिए राजेंद्र कुमार चाहते थे कि कुमार गौरव ड्र्ग तस्कर वाला रोल करें लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया.

‘नाम’ फिल्म का टाइटल पहले ‘रास्ता’ रखा गया था. बाद में इसे बदला गया. नाम फिल्म परेश रावल के लिए भी टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. इस फिल्म में उनकी अदाकारी को खूब तारीफ मिली थी. फिल्म में पंकज उधास भी गजल गाते नजर आए थे. यह पहला मौका था जब वो किसी फिल्म का हिस्सा बने थे. ‘चिट्ठी आई है, आई है, चिट्ठी आई है..’ गजल सुनकर दर्शकों की आंखें नम हो गई थीं. यह गजल आज भी घर से बाहर काम करने वाले अप्रवासियों को रुला देती है.

फिल्म में आशुतोष गोवारिकर टैक्सी ड्राइवर के एक छोटे से रोल में नजर आए थे. आगे चलकर उन्होंने लगान जैसी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म बनाई. इसी तरह नाम फिल्म में डेविड धवन ने एडिटर के तौर पर काम किया था.

महेश भट्ट ने एक इंटरव्यू में बताया, ‘नाम फिल्म जब हमने संजय दत्त के साथ शुरू की तो वह ड्रग एडिक्शन के बुरे दौर से गुजर रहे थे. यूएस से रिहैब सेंटर से लौटकर आए थे. नए सिरे से जिंदगी शुरू करना चाहते थे. उनके अंदर एक खास तरह की तड़प दिखी थी. वह अपने पिता के सामने सिद्ध करना चाहते थे कि वह भी उनके जैसे बड़ा इंसान है. नाम में संजय दत्त ने सब कुछ दांव पर लगा दिया था. नाम में हमने उसको वही रोल दिया, जो वह असल जीवन में है. मासूम, जज्बाती, जिसके पास दिल है, दिमाग नहीं है. इसका क्रेडिट सलीम खान साहब को जाता है. वो जावेद साहब से अलग हुए थे. उन्होंने मेरे साथ बैठकर संजय को ऐसा रंग दिया.’
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