भोजपुरी सिनेमा के सुपरस्टार पवन सिंह ने मंगलवार को भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव विनोद तावड़े से मुलाकात की। सांसद उपेंद्र कुशवाहा के आवास पर हुई इस बैठक की कई तस्वीरें वायरल हो रही हैं। तावड़े ने बैठक के बाद कहा कि पवन जी भाजपा में ही हैं। आदरणीय उपेंद्र कुशवाहा जी ने उन्हें शुभकामनाएं और आशीर्वाद दिया है। आने वाले दिनों में पवन जी सक्रियता से एनडीए के लिए काम करेंगे, भाजपा के कार्यकर्ता के तौर पर।
#WATCH | Delhi: Actor and Singer Pawan Singh meets Rashtriya Lok Morcha chief and Rajya Sabha MP Upendra Kushwaha in the presence of BJP National General Secretary Vinod Tawde. pic.twitter.com/RZjscIc4HJ
— ANI (@ANI) September 30, 2025
गौरतलब है कि कुछ समय पहले ही भाजपा नेता आरके सिंह ने कहा था कि पवन सिंह को पहले भाजपा से टिकट दिया गया था, फिर चुनाव लड़ने से मना कर दिया गया और कहीं और से भी टिकट नहीं मिला। यह सुनकर थोड़ा दर्द हुआ। इसलिए मेरा मानना है कि पवन सिंह को फिर से भाजपा में शामिल हो जाना चाहिए। आरके सिंह के इस बयान के बाद से यह अटकलें थीं कि पवन सिंह भाजपा से पूरी तरह से नाता तोड़ चुके हैं। हालांकि, अब तावड़े के बयान ने एक बार फिर पवन सिंह को लेकर चर्चाओं का बाजार गर्म कर दिया।
#WATCH | BJP incharge for Bihar, Vinod Tawde says, “Pawan ji (singer Pawan Singh) is in the BJP, he will be in the BJP. Upendra Kushwaha (Rashtriya Lok Morcha chief) has given him blessings. In the upcoming election, Pawan ji will work actively for the NDA, as a BJP worker…” pic.twitter.com/j1wY2Tgebg
— ANI (@ANI) September 30, 2025
पवन सिंह की कैसे हो गईं भाजपा से दूरियां?
बीते साल हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा ने पवन सिंह को आसनसोल सीट से उम्मीदवार बनाया था। हालांकि, पवन सिंह ने अगले ही दिन इस सीट से चुनाव लड़ने से इनकार कर दिया था। इस सीट पर तृणमूल कांग्रेस ने शत्रुघ्न सिन्हा क उम्मीदवार बनाया था। पवन सिंह के नाम वापस लेने के बाद उनकी भाजपा से दूरियां बनना शुरू हो गई थीं। हालांकि, इसमें अगला पड़ाव तब आया, जब भोजपुरी स्टार ने काराकाट सीट से निर्दलीय ही ताल ठोंकने का एलान कर दिया। इस सीट पर एनडीए पहले ही उपेंद्र कुशवाहा का नाम तय कर चुकी थी। इसके बाद भाजपा ने पवन सिंह को निष्कासित कर दिया था।
हालांकि, पवन सिंह के काराकाट से लड़ने का असर यह रहा कि वोट बंटने से लोकसभा चुनाव में कुशवाहा की हार हुई। इसके बाद एनडीए में दरार की स्थिति पैदा हो गई थी। बताया जाता है कि कुशवाहा समाज में भी भाजपा को लेकर नाराजगी थी। ऐसे में भाजपा विधानसभा चुनाव से पहले इस नाराजगी को खत्म करने की तैयारी कर रही थी।












