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बॉलीवुड फिल्मों के बनने के किस्से है, जिनको आज सुनते हैं तो वो हैरान कर देते हैं. आज उस फिल्म के बारे में बताते हैं, जिसको बनाने में एक-दो नहीं पूरे 24 साल लगे और ये बॉलीवुड की मनहूस फिल्म साबित हुई. कौन सी है ये फिल्म और कौन थे वो सुपरस्टार और हिट डायरेक्टर, जिनकी मौत फिल्म के मेकिंग के दौरान हुई, चलिए बताते हैं…
नई दिल्ली. बॉलीवुड में कई फिल्में ऐसी रही हैं, जिनका सफर पर्दे तक पहुंचने में ही सालों बीत गया. लेकिन 1986 में रिलीज हुई एक फिल्म का किस्सा सबसे अलग और डरावना माना जाता है. इस फिल्म को बनाने में 2-4 साल नहीं बल्कि पूरे 24 साल लग गए थे और जब यह आखिरकार सिनेमाघरों में आई, तो इसे फ्लॉप करार दिया गया. लेकिन असली सनसनी तब मची, जब लोग इसे मनहूस फिल्म कहने लगे. वजह थी इसके साथ जुड़ी दुखद घटनाएं. शूटिंग के दौरान और उसके बाद, इस फिल्म से जुड़े दो बड़े सुपरस्टार्स ने अपनी जान गंवा दी, जिससे दर्शकों और फिल्म इंडस्ट्री में अजीब सा खौफ फैल गया. इतना ही नहीं डायरेक्टर की भी मौत हो गई थी. आज भी सिनेमा के इतिहास में इस फिल्म को एक रहस्यमयी अध्याय की तरह याद किया जाता है, जिसने यह दिखा दिया कि कभी-कभी परदे पर दिखने वाला सपना, हकीकत में डरावना सच भी बन सकता है. फोटो साभार- वीडियो ग्रैब

यह फिल्म थी ‘लव एंड गॉड’. 1986 में रिलीज हुई इस फिल्म में खूबसूरत अदाकारा निम्मी और संजीव कुमार लीड रोल में थे. फिल्म को डायरेक्ट हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसे ही एक जुनूनी डायरेक्टर के. आसिफ ने किया था. ये वो डायरेक्टर थे, जो करियर में पहली दो फिल्मों से अपनी धाक जमाने में कामयाब हो गए. फिल्म ऐसी जिसने ना सिर्फ फिल्म के कलाकारों का करियर बल्कि बॉलीवुड का ही इतिहास बदल दिया था. ये फिल्में थीं साल 1944 में आई ‘फूल’ और फिर साल 1960 में ‘मुगल-ए-आजम.’ लेकिन ‘लव एंड गॉड’ के बनने की प्रोसेस इतनी दुखद रही कि इसे लोग भूल नहीं पाते.

दरअसल, के. आसिफ ने ‘लव एंड गॉड’ को ‘मुगल-ए-आजम’ की तरह एक ऐतिहासिक फिल्म बनाने का सपना देखा था. यह फिल्म लैला-मजनू की प्रेम कहानी पर आधारित थी, जिसमें लैला का किरदार निम्मी और मजनू का किरदार गुरु दत्त को निभाना था. गुरु दत्त शुरू में इस रोल के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन आसिफ ने उन्हें मना लिया. फोटो साभार- @IMDb

साल 1962 में शूटिंग शुरू हुई, लेकिन इसके बाद जो हुआ, उसने सबको चौंका दिया. ये वो दौर था, जब गुरु दत्त अपनी पर्सनल लाइफ में कई परेशानियों से जूझ रहे थे. उनकी फिल्म ‘कागज के फूल’ बॉक्स ऑफिस पर असफल रही थी, जिसके कारण वे आर्थिक तंगी में थे. उनका घर तक गिरवी रखना पड़ा था. इसके अलावा, उनकी पत्नी गीता दत्त के साथ भी उनके रिश्ते तनावपूर्ण थे. फोटो साभार- @IMDb

एक रात गीता दत्त के साथ उनके झगड़े के बाद वह घर छोड़कर चली गईं. गुरु दत्त ने खुद को कमरे में बंद कर लिया और शराब के साथ नींद की गोलियां ले लीं. अगली सुबह उनकी मौत की खबर ने सबको हिलाकर रख दिया. इसके साथ ही फिल्म की शूटिंग रुक गई. फोटो साभार- @IMDb

गुरु दत्त की मौत के बाद के.आसिफ ने संजीव कुमार को मजनू के रोल के लिए चुना. कुछ समय बाद शूटिंग दोबारा शुरू हुई, लेकिन फिल्म की किस्मत में कुछ और ही था. 1971 में संजीव कुमार कुछ समय के लिए मुंबई छोड़कर एक दूसरे प्रोजेक्ट में बिजी हो गए. जब वे लौटे तो के.आसिफ उनसे मिलने पहुंचे. बातचीत के दौरान अचानक आसिफ को सांस लेने में तकलीफ हुई और संजीव की बांहों में ही उनकी मौत हो गई. यह घटना संजीव के लिए बड़ा झटका थी और फिल्म एक बार फिर अधर में लटक गई. फोटो साभार- @IMDb

के. आसिफ की मौत के बाद संजीव कुमार ने फिल्म को पूरा करने की जिम्मेदारी ली. उन्होंने कई प्रोड्यूसर्स और यहां तक कि दिलीप कुमार से भी मदद मांगी, लेकिन कोई आगे नहीं आया. आखिरकार, प्रोड्यूसर केसी बोकाडिया ने फिल्म को फंड करने का फैसला किया. शूटिंग दोबारा शुरू हुई, लेकिन तभी संजीव कुमार की हार्ट अटैक से मौत हो गई. इन हादसों ने फिल्म को ‘मनहूस’ और ‘शापित’ का टैग दे दिया. फोटो साभार- @IMDb

24 साल के लंबे इंतजार के बाद ‘लव एंड गॉड’ 1986 में रिलीज हुई. केसी बोकाडिया ने फिल्म के बचे हिस्से की शूटिंग बॉडी डबल की मदद से पूरी की. फिल्म रिलीज हुई लेकिन दर्शकों को बिलकुल भी लुभा नहीं सकी और महाफ्लॉप साबित होने साथ बॉलीवुड की मनहूस फिल्म साबित हुई.
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