राजस्थान के जैसलमेर बस हादसे में अब नई परतें खुलने लगी हैं। जांच में सामने आए तथ्य यह संकेत दे रहे हैं कि यह हादसा केवल एक संयोग नहीं बल्कि गंभीर लापरवाही और भ्रष्टाचार का परिणाम हो सकता है। शुरुआत में बस में पटाखे होने की बात सामने आई थी, लेकिन अब जांच का रुख बस के तकनीकी फॉल्ट और अवैध मॉडिफिकेशन की ओर मुड़ गया है।
नॉन-एसी बस को अवैध रूप से बनाया गया एसी
जांच में यह तथ्य सामने आया है कि हादसे में शामिल बस मूल रूप से एसी नहीं थी, बल्कि उसे तीन महीने पहले मॉडिफाई कर एसी बस बनाया गया था। बस मालिक ने इसे इतनी चतुराई से बदला कि परिवहन विभाग इसे पहचान नहीं सका। बस का रजिस्ट्रेशन चित्तौड़गढ़ में कराया गया था और दस्तावेजों में इसे नॉन-एसी श्रेणी में रखा गया था। इसके बावजूद बस में एसी फिट किया गया था, जो परिवहन नियमों का स्पष्ट उल्लंघन है।
हाल ही में खरीदी गई थी बस
जानकारी के मुताबिक, बस 21 मई को खरीदी गई थी, जिसके बाद उसकी बॉडी तैयार करने और मॉडिफिकेशन का काम शुरू हुआ। बस का पंजीयन 1 अक्तूबर को हुआ और महज 14 दिन बाद यह हादसे का शिकार हो गई।
जांच में यह भी सामने आया है कि फिटनेस जांच में भारी लापरवाही बरती गई और वाहन को बिना उचित तकनीकी परीक्षण के सड़क पर उतारने की अनुमति दी गई। हालांकि अभी ये पूरा मामला जांच के घेरे में है। पुलिस ने बस मालिक और ड्राइवर पर एफआईआर दर्ज कर ली है।
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चित्तौड़गढ़ परिवहन विभाग के दो अधिकारी निलंबित
मामले की गंभीरता को देखते हुए सरकार ने चित्तौड़गढ़ परिवहन विभाग के दो अधिकारियों को निलंबित कर दिया है। इनमें कार्यवाहक डीटीओ सुरेंद्र सिंह और सहायक प्रशासनिक अधिकारी चुन्नीलाल शामिल हैं।
सूत्र बताते हैं कि और भी अधिकारी इस अनियमितता में शामिल हो सकते हैं। एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) अब इस पूरे प्रकरण की जांच करेगा ताकि भ्रष्टाचार और मिलीभगत की परतें खुल सकें। यह भी जांच की जा रही है कि बस का फिटनेस सर्टिफिकेट किस अधिकारी ने जारी किया और क्या यह नियमों के अनुरूप प्रक्रिया के तहत हुआ था या नहीं।
‘नई बस थी, आग कैसे लगी, इसकी जांच होनी चाहिए’
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने भी हादसे पर सवाल उठाते हुए कहा कि बस नई खरीदी गई थी, इसलिए यह जानना जरूरी है कि आखिर उसमें आग कैसे लगी। उन्होंने कहा कि सरकार को जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई करनी चाहिए और इस हादसे की पारदर्शी जांच करानी चाहिए।
जिला कलेक्टर पहुंचे, दस्तावेज देखे
हादसे के बाद राज्य सरकार से निर्देश मिलने के बाद चित्तौड़गढ़ जिला कलक्टर आलोक रंजन बुधवार दोपहर प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां प्रादेशिक परिवहन अधिकारी नेमीचंद पारीक तथा जिला परिवहन अधिकारी नीरज शाह से बस पंजीयन के संबंध में जानकारी ली है। इसमें परिवहन विभाग के अधिकारियों ने स्पष्ट रूप से बताया है कि इस बस का पंजीयन नॉन एसी के रूप में हुआ था। लेकिन बस मालिक ने नियमों के विपरीत जाकर इस बस को एसी में मॉडिफाई करवा दिया था। बाद में चित्तौड़गढ़ जिला कलक्टर आलोक रंजन ने प्रादेशिक परिवहन अधिकारी कार्यालय का भी गहनता से निरीक्षण किया है। साथ ही बस के पंजीयन के संबंध में दस्तावेज भी मंगवाए।
इधर, परिवहन अधिकारी कार्यालय से बस के संबंध में जानकारी जुटाई है। इसमें सामने आया कि 1 अक्तूबर को ही यह बस सड़क पर आई थी, वहीं 14 अक्तूबर को ही यह हादसा हो गया। नई बस में इस तरह का हादसा होने से बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं।
बस को लेकर डीटीओ ने क्या कहा?
बस पंजीयन के बारे में जिला परिवहन अधिकारी नीरज शाह से बात की गई है। शाह ने बताया कि विभाग में तो बस यह चित्तौड़गढ़ में नॉन एसी के रूप में पंजीकृत हुई। वाहन मालिक ने इसमें क्या मोडिफिकेशन करवाया, यह तो जांच करने के बाद ही बता पाएंगे। इस बस का 21 मई का बिलिंग है। तीन महीने में बस की बॉडी तैयार हुई है। उसके बाद बस पंजीयन हुई। इसमें 15 दिन बाद उसने क्या मोडिफिकेशन करवाया, यह तो वाहन मालिक ही बता सकता है।
जिला परिवहन अधिकारी ने बताया कि बिलिंग तो 21 मई की है, 3 माह में बॉडी बनी है। नवरात्रि में 1 अक्तूबर को गाड़ी पास हुई नॉन एसी में चित्तौड़गढ़ में। कल 14 अक्तूबर की घटना बताई जा रही है। 14 दिन में वाहन मालिक ने क्या परिवर्तन किया यह तो वही बता पाएगा। बस के पंजीयन को लेकर फोन भी आए हैं। चित्तौड़गढ़ जिला कलेक्टर भी आए हैं। उन्होंने भी जानकारी ली है। उन्होंने सारे दस्तावेजों की जांच की है, जो जांच अधिकारी हैं, वहीं इसमें बता पाएंगे। उन्होंने बताया कि चित्तौड़गढ़ में बस का पंजीयन नियमानुसार नॉन एसी में ही हुआ था।
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