Last Updated:
प्रिया कपूर सचदेव के वकील कोर्ट सीनियर एडवोकेट राजीव नायर ने कोर्ट में बताया कि वसीयत को लेकर एक बैठक दिल्ली के ताज होटल में हुई थी. करिश्मा के बच्चों को वसीयत के बारे में सब कुछ पता है फिर भी कोर्ट को गुमराह किया गया.
नई दिल्ली. करिश्मा कपूर के एक्स पति और दिवंगत बिजनेसमैन संजय कपूर की वसीयत को लेकर दिल्ली हाईकोर्ट में चल रही कानूनी जंग ने नया मोड़ ले लिया है. संजय की तीसरी पत्नी प्रिया कपूर सचदेव ने कोर्ट में दमदार दलीलें पेश करते हुए कहा कि यह ‘पत्नी बनाम पत्नी’ का मामला है, जिसमें ‘वर्तमान पत्नी को वरीयता मिलनी चाहिए, न कि अलग रह रही पत्नी को.’ प्रिया के वकील सीनियर एडवोकेट राजीव नायर ने करिश्मा कपूर के बच्चों द्वारा दायर मुकदमे को ‘बेबुनियाद’ और ‘फर्जी’ बताते हुए इसे खारिज करने की मांग की.
वसीयत की सच्चाई पर प्रिया का तीखा वार
प्रिया कपूर सचदेव ने कोर्ट में वसीयत की प्रामाणिकता का बचाव करते हुए कहा, ‘अगर वसीयत फर्जी है, तो क्या मैं अपने खुद के बेटे का नाम गलत स्पेलिंग से लिखवाती?’ यह बयान दिल्ली हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान दिया गया, जहां राजीव नायर ने जोर देकर कहा कि संजय ने अपने बच्चों को वसीयत से बाहर नहीं किया, बल्कि उनके लिए अलग से ट्रस्ट में प्रावधान किए थे. नायर ने कहा, ‘उन्होंने बच्चों के लिए वसीयत में प्रावधान नहीं किया क्योंकि ट्रस्ट में पहले से ही व्यवस्था की गई थी.’
अदालत में गरमा-गरम बहस
राजीव नायर ने करिश्मा के बच्चों की ओर से दायर याचिका को ‘Bogus’ (झूठी) बताया और कहा कि उन्होंने पहले ही वसीयत के बारे में सब कुछ जान लिया था, फिर भी कोर्ट को गुमराह किया. वकील ने बताया वसीयत से जुड़ी बैठक दिल्ली के ताज होटल में हुई थी. नायर ने जालसाजी के आरोपों को पूरी तरह से खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ताओं ने अपने पक्ष में कोई ठोस आधार पेश नहीं किया है. उन्होंने फर्जीवाड़े के दावे की बुनियाद पर सवाल उठाते हुए कहा,’प्लेडिंग्स में बिना फाउंडेशन के फर्जीवाड़े का केस कैसे खड़ा करेंगे?’ नायर ने जोर देकर कहा, ‘ऐसी मुकदमेबाजी को शुरुआत में ही खत्म कर देना चाहिए.’
बच्चों को मिल चुके हैं 1,900 करोड़
प्रिया ने कोर्ट को बताया कि करिश्मा के बच्चों को परिवार के ट्रस्ट से पहले ही 1,900 करोड़ रुपये मिल चुके हैं. नायर ने मुकदमे की वैधता पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘यह एक फिट केस है, जहां प्लेंट को खारिज कर देना चाहिए. उन्होंने कभी वसीयत को चुनौती नहीं दी.’ उन्होंने आगे कहा कि बच्चे मुकदमा दायर करने से पहले वसीयत के बारे में जानते थे और उनका विरोध बेबुनियाद है. अब सभी की निगाहें दिल्ली हाई कोर्ट के अगली सुनवाई और फैसले पर टिकी हैं, जो तय करेगा कि इस ‘पत्नी बनाम पत्नी’ की कानूनी लड़ाई में किसके हक में फैसला होता है.

शिखा पाण्डेय News18 Digital के साथ दिसंबर 2019 से जुड़ी हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. News18 Digital से पहले वह Zee News Digital, Samachar Plus, Virat Vaibhav जैसे प्रतिष्ठ…और पढ़ें
शिखा पाण्डेय News18 Digital के साथ दिसंबर 2019 से जुड़ी हैं. पत्रकारिता के क्षेत्र में उन्हें 12 साल से ज्यादा का अनुभव है. News18 Digital से पहले वह Zee News Digital, Samachar Plus, Virat Vaibhav जैसे प्रतिष्ठ… और पढ़ें
![]()










