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Bollywood Blockbuster Movie : हिंदी सिनेमा के कुछ गाने-सुरीली धुन कालजयी हैं. समय के साथ ये धुनें और जवां होती गईं. हर जनरेशन के दिल में खास जगह बना ले गईं. ऐसी ही एक सुरीली धुन 71 साल पहले एक फिल्म में सुनाई दी थी. यह धुन आज भी इतनी पॉप्युलर है कि देश के कोने-कोने में होने वाले प्रोग्राम में सबसे पहले बजाई जाती है. इस धुन को बजाकर ही कलाकार कार्यक्रम की शुरुआत करते हैं. धुन बजते ही तन-मन डोलने लगता है. यह सुरीली धुन एक गाने से निकली थी.
साल था 1954. इस साल एक फिल्म रिलीज हुई जिसका म्यूजिक सुपर-डुपर हिट रहा था. फिल्म भी ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. फिल्म में 13 गाने थे लेकिन इसके दो गाने बहुत पॉप्युलर हुए. ये गाने थे : मेरा दिल ये पुकारे आ जा, मेरे गम के सहारे आ जा, भीगा-भीगा है समा, ऐसे में है तू कहां…’ यह गाना क्लासिक सॉन्ग में शुमार है. इस गाने को तैयार करने के दौरान संगीतकार हेमंत कुमार-संगीतकार रवि ने एक ऐसी धुन तैयार की जो आज भी करोड़ों दिल पर राज करती है. हम बात कर रहे हैं : ‘मेरा तन डोले..मेरा मन डोले..’. बीन की यह धुन आज भी हर प्रोग्राम में सुनाई देती है. आइये जानते हैं यह धुन कैसे तैयार हुई…

1954 में आई नागिन फिल्म एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी जिसका डायरेक्शन नंदलाल जसवंतलाल ने किया था. फिल्म की कहानी बिजन भट्टाचार्य ने लिखी थी. स्क्रीनप्ले राजेंद्र कृष्ण ने लिखा था. प्रोड्यूसर एस. मुखर्जी थे. म्यूजिक हेमंत कुमार-रवि का था. फिल्मिस्तान लिमिटेड के बैनर तले मूवी का प्रोडक्शन किया था.

नागिन फिल्म में प्रदीप कुमार-वैजयंती माला और जीवन लीड रोल में थे. फिल्म में 13 गाने रखे गए. नागिन फिल्म में एक खास तरह की बीन की धुन बनाई गई थी. संगीतकार रवि ने हारमोनियम पर यह धुन बजाई थी, जो फिल्म में सुनाई देती है. बाद में इसी धुन पर एक गाना भी लिखा गया जिसके बोल थे : ‘मेरा तन डोले, मेरा मन डोले..’. इस गाने को लता मंगेशकर ने गाया थ. गीतकार राजेंद्र कृष्ण थे. इस धुन को और खास बनाने के लिए नए म्यूजिक इंस्ट्रूमेंट कल्वायलिन का इस्तेमाल किया था. कल्वायलिन को संगीतकार कल्याणजी ने बजाया था. कल्याण जी उस समय हेमंत कुमार के निर्देशन में संगीत सीख रहे थे.

संगीतकार रवि के पूर्वज हरियाणा के रहने वाले थे. दिल्ली के कूचा पातीराम में रवि का घर था. 3 मार्च 1926 को दिल्ली में संगीतकार रवि का जन्म हुआ. मां तारावती शर्मा गृहिणी थीं. पिता कन्हैयालाल शर्मा सर्विस करते थे. रवि को गाने का बचपन से ही शौक था. फिल्मी गानों को सुनकर गाया करते थे. उन्होंने पहली बार 9 साल की उम्र में ‘पुकार’ फिल्म के भजन ‘तुम बिन हमरी कौन खबर ले, ओ गोवर्धन गिरिधारी’ कल्कि कीर्तन मंडल हॉल में गाया था.

नागिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. इस फिल्म ने वैजयंती माला को हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित किया. 1954 में सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली पांच फिल्में नागिन, नास्तिक, टैक्सी ड्राइवर, मिर्जा गालिब और आर-पार थीं.

संगीतकार रवि ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘जागृति फिल्म में काम करने के बाद मैं हेमंत कुमार के असिस्ट के तौर पर काम करने लगा. उनके साथ मैंने शर्त, सम्राट, जागृति, नागिन, चंपाकली, दुर्गेशनंदिनी में काम किया. इस दौरान मैंने अपनी पत्नी और बेटी को हरियाणा के गांव से बुलाया लिया. कांदीवली में किराए के मकान में पत्नी कांति शर्मा और बेटी वाणी के साथ रहने लगे थे.

दरियागंज स्थित एएसवीजे हाईस्कूल से दसवीं कक्षा पास की. दसवीं में एक बार संगीतकार रवि फेल हो गए थे. फिर प्राइवेट एग्जाम दिया और पास हो गए. फिर इलेक्ट्रिक का काम सीखा. 1945 से 1950 तक पोस्ट-टेलीग्राम डिपार्टमेंट में काम किया. इस दौरान वह आकाशवाणी दिल्ली में गाने लगे. 1950 में संगीतकार रवि दिल्ली से मुंबई आ गए. बेटी और पत्नी को घर पर छोड़ आए.

मुंबई में संगीतकार रवि हीराबाग में एक धर्मशाला में रहने लगे. कभी गोरेगांव रेलवे स्टेशन पर सोकर रातें गुजारीं. सिंगर बनने का सपना लेकर आए थे. सोलो सॉन्ग गाने का मौका नहीं मिला तो कोरस में गाने लगे. सबसे पहले एसडी बर्मन के साथ फिल्म ‘नौजवान’ में कोरस गाया. फिर संगीतकार हेमंत कुमार के लिए 1952 में आनंदमठ में ‘वंदे मातरम्, वंदे मातरम्’ कोरस गाया. इस गाने के बाद संगीतकार रवि की किस्मत बदल गई. वो संगीतकार हेमंत कुमार के साथ काम करने लगे.
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