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शारीब हाशमी ने ‘फैमिली मैन’ से सफलता का स्वाद चखा. इस सीरीज ने उन्हें घर-घर में पहचान दिलाई. फैमिली मैन वो शो है जिसने 12 साल ठोकर खाने के बाद शारीब की किस्मत पलट कर रख दी. वो कहते हैं कि अब आखिरकार उनके पास वो चॉइस है जहां वो अपनी फिल्में और प्रोजेक्ट्स का चयन खुद कर सकते हैं.
नई दिल्ली. शारीब हाशमी आज किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं. ‘फैमिली मैन’ से उन्होंने दर्शकों के दिलों पर राज किया और घर-घर में पहचान बनाई. वेब सीरीज ‘फैमिली मैन’ एक्टर शारीब हाशमी के करियर के लिए एक वरदान साबित हुई है. इस पर न्यूज18 शोशा के साथ खास बातचीत करते हुए एक्टर कहते हैं कि कैसे मनोज बाजपेयी स्टारर और राज एंड डीके द्वारा निर्देशित इस सीरीज ने उनके करियर की दिशा बदल दी. इस सीरीज से पहले करीबन 12 साल से वो इंडस्ट्री में सक्रीय थे, लेकिन उन्हें वो पहचान नहीं मिल पाई थी.
News18 Showsha से एक्सक्लूसिव बातचीत में, शारिब कहते हैं, ‘ ‘फैमिली मैन’ के बाद मेरे करियर में सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ कि मुझे चुनने की शक्ति मिली. उससे पहले, मैं जो भी काम मिल रहा था, वो कर रहा था. मेरे पास चुनने का कोई रास्ता नहीं था. लेकिन फैमिली मैन ने सब बदलकर रख दिया और मुझे चुनने की शक्ति दी कि अब मैं जो चाहूं वो काम कर सकता हूं. फिल्मिस्तान के बाद, मैं कुछ खास करना चाहता था. मैंने कुछ अच्छी फिल्मों पर काम करना शुरू किया लेकिन वे अटक गईं. शायद यह मेरी किस्मत में लिखा था.
शारीब हाशमी के कई प्रोजेक्ट्स डब्बा बंद हो गए
वो आगे बताते हैं कि उनके कुछ प्रोजेक्ट्स तो शुरू ही नहीं हो पाए और कुछ प्रोजेक्ट्स शुरू तो हुए लेकिन बीच में अटक गए, वो कभी खत्म नहीं हो पाए. कुछ प्रोजेक्ट्स तो शुरू भी नहीं हो पाए. कुछ बंद के बंद ही रह गए और अटक गए. कुछ रिलीज नहीं हो पा रही हैं.
काम न मिलने पर बदलने लगा इंडस्ट्री का बर्ताव
तब उन्होंने महसूस किया कि फिल्म इंडस्ट्री का उनके प्रति व्यवहार बदलने लगा. एक्टर ने साल 2012 में कम बजट फिल्म फिल्मीस्तान से एक्टिंग डेब्यू किया था. ये एक बेहद मामूली से कम बजट में बनी फिल्म थी जो बॉक्स-ऑफिस पर तो कोई करिश्मा नहीं दिखा पाई, लेकिन बाद में इसे सराहा जरूर गया. फिल्म दर्शकों को गुदगुदाने में सफल रही थी. लेकिन लगातार तीन साल तक कोई काम न मिलने पर शारीब हाशमी के प्रति इंडस्ट्री का रवैया बदलने लगा था.
इस बारे में वो आगे कहते हैं, ‘समय गुजरता गया. तीन साल बीत गए और मेरी कोई फिल्म रिलीज नहीं हुई. लोग मुझे भूलने लगे. मुझे याद है कि मैं इवेंट्स में जाता था. मैं लोगों के पास से गुजरता था, पर कोई पूछता भी नहीं था. फिल्म बिजनेस में वैसे भी लोगों की याददाश्त कमजोर होती है’.

प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है…और पढ़ें
प्रांजुल सिंह 3.5 साल से न्यूज18 हिंदी से जुड़ी हुई हैं. उन्होंने Manorama School Of Communication (MASCOM) से जर्नलिज्म और मास कम्यूनिकेशन में डिप्लोमा किया है. वो 2.5 साल से एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रही है… और पढ़ें
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