दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम में कई इंजीनियर और बाबू दागदार हैं। 30 करोड़ रुपये के टेंडर घोटाले में चार अधीक्षण अभियंता सहित 19 के विरुद्ध पुलिस जांच कर रही है। इससे पहले 2.10 करोड़ रुपये का एरियर घोटाला हो चुका है। दोनों मामलों में प्राथमिकी दर्ज होने के बाद भी गिरफ्तारी नहीं हुई।
कमिश्नरेट पुलिस की जांच में सुस्ती के कारण भ्रष्टाचार पर लगाम नहीं लग पा रही। टेंडर घोटाले में शामिल आरोपियों ने साक्ष्य तक जलाकर मिटा दिए। 50 से अधिक पत्रावलियां जला दी गईं। ऐसे में सवाल खड़ा हो रहा है कि बिना साक्ष्य जांच कैसे आगे बढ़ेगी। दूसरी तरफ क्या आरोपियों की गिरफ्तारी होगी। टेंडर घोटाले से पहले हुए एरियर घोटाला में आरोपी बाबू ने अपना और तीन अन्य कर्मियों का पिछले वर्षों का फर्जी एरियर दिखाकर 2.10 करोड़ रुपये निकाल लिए थे। इस मामले में विभाग की तरफ से प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। लेकिन, नतीजा सिफर रहा।
इधर, टेंडर पत्रावलियों में गड़बड़ियां पिछले साल भी सामने आई थीं। पिछले साल एक नवंबर को फतेहाबाद में तैनात बाबू नीरज पाठक को और फिर 10 नवंबर को सतीश कुमार को निलंबित किया था। इसके बाद अधिशासी अभियंता की अध्यक्षता में गठित कमेटी ने वर्ष 2023 से 2025 तक तीन साल में हुए टेंडर की जांच की। जांच में पता चला कि 30 करोड़ रुपये मूल्य के 40 से अधिक टेंडर बिना ऑनलाइन पोर्टल पर प्रकाशित कराए ही चहेते फर्मों को आवंटित कर दिए गए। इस संबंध में मुख्य अभियंता कपिल सिंधवानी का कहना है कि मामले की जांच अब पुलिस कर रही है।










