यूक्रेन से चल रही जंग के बीच रूस ने भारत के साथ अपने रिश्तों पर जोर दिया है। रूसी प्रधानमंत्री मिखाइल मिशुस्टिन ने मंगलवार को कहा कि भारत रूस के शीर्ष विदेशी व्यापार भागीदारों में से एक है। प्रधानमंत्री मिशुस्तिन ने अपने बयान में कहा कि भारत रूस के शीर्ष विदेशी व्यापार साझेदारों में शामिल है। उन्होंने बताया कि पश्चिमी प्रतिबंधों के बीच रूस ने अपनी ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक रुख को मित्र देशों की ओर मोड़ा है, जिसमें भारत की भूमिका तेजी से मजबूत हुई है।
चार वर्षों में पांच से छह गुना बढ़ा व्यापार
रूसी पीएम मिशुस्टिन ने बताया कि रूस के व्यापारिक कारोबार में मित्र देशों की हिस्सेदारी ऐतिहासिक रूप से 86 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गई है, जिसमें चीन, बेलारूस, भारत और कजाकिस्तान के साथ व्यापार में खासतौर पर इजाफा हुआ है। उनके मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 में भारत-रूस द्विपक्षीय व्यापार रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचकर करीब 68.7 अरब अमेरिकी डॉलर हो गया, जो वर्ष 2021 में लगभग 13 अरब डॉलर था। यानी चार वर्षों में यह व्यापार लगभग पांच से छह गुना बढ़ा है।
द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर का टारगेट
दोनों देशों ने वर्ष 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया है। ऊर्जा के अलावा फार्मास्यूटिकल्स, रक्षा और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में भी सहयोग तेजी से बढ़ रहा है। विदेशी आर्थिक गतिविधियों के विकास पर आयोजित एक रणनीतिक सत्र में टेलीविजन संबोधन के दौरान मिशुस्तिन ने कहा, ‘2025 तक मित्र देशों को आपूर्ति का लक्ष्य पहले ही पार कर लिया गया है। 86 प्रतिशत का नया ऐतिहासिक रिकॉर्ड संभव हुआ है। चीन, बेलारूस, भारत और कजाखस्तान ने उल्लेखनीय वृद्धि दिखाई है।’
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