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Bollywood Blockbuster Movies : फिल्म के विजन, उसकी परिकल्पना को धरातल पर उतारने वाला शख्स डायरेक्टर ही होता है. बड़े-बड़े सुपरस्टार डायरेक्टर के एक इशारे पर काम करते हैं. डायरेक्टर को जब तक कोई सीन पसंद नहीं आता, उसके रीटेक लेता है. कई बार हीरो-हीरोइन दिल से कोई सीन नहीं करना चाहते, फिर भी उन्हें डायरेक्टर की इच्छा का पालन करते हुए मन मानकर वो सीन करना पड़ता है. फेमस डायरेक्टर ने बॉलीवुड के सुपरस्टार से दो फिल्मों में ऐसे ही कुछ सीन करवाए थे. दोनों फिल्में 6 साल के अंतराल में पर्दे पर आई थीं. दोनों ही फिल्में ब्लॉकबस्टर रहीं. आइये इन दोनों फिल्मों, उस सुपरस्टार से जुड़े रोचक किस्से पर नजर डालते हैं..
ये कहानी बॉलीवुड के फेमस डायरेक्टर मनमोहन देसाई की है. उन्होंने अपने करियर में एक से बढ़कर एक फिल्में बनाईं. मनमोहन देसाई के बारे में कहा जाता था कि वो उन्होंने सुपरहिट फिल्मों का फॉर्मूला ईजाद कर लिया है. उन्होंने खोया-पाया का फॉर्मूला अपनाया. हर बार दर्शकों के सामने एक ही कहानी को नए अंदाज में पेश किया. ऐसा लगता है कि उन्होंने दर्शकों की नब्ज पकड़ ली थी. मनमोहन देसाई ने 50 के दशक में इंडस्ट्री ली थी. 1966 से 1985 के बीच 19 साल में 5 ब्लॉकबस्टर और 8 सुपरहिट फिल्में दीं. बॉलीवुड में अमिताभ बच्चन का स्टारडम स्थापित किया. मनमोहन देसाई कई बार ऐसे-ऐसे सीन अमिताभ से करवाते थे, जिनके लिए दोनों के बीच मीठी बहस हो जाती थी. दो फिल्मों में ऐसे-ऐसे सीन रखवाए जिनमें लॉजिक नहीं था. दिलचस्प बात यह है कि दोनों फिल्में बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रहीं. ये फिल्में थीं : अमर अकबर एंथोनी और कुली.

इस लिस्ट में पहला नाम 1977 में आई फिल्म ‘अमर अकबर एंथोनी’ का है. यह पहला मौका था जब अमिताम बच्चन ने मनमोहन देसाई के साथ काम किया. मनमोहन देसाई को इस फिल्म का आइडिया अखबार पेपर पढ़ने के दौरान आया था. उन्होंने अखबार में खबर पढ़ी कि एक शराबी जिसका नाम जैक्शन है, वो अपनी लाइफ से तंग आकर अपने तीन बच्चों को पार्क में छोड़कर चला गया था. उन्होंने अपने राइटर दोस्त प्रयागराज शर्मा को यह खबर सुनाई. फिर इस पर एक स्टोरी डेवलप की गई. वैसे अमर अकबर एंथोनी से मिलती जुलती कहानी पर 1965 में वक्त फिल्म बनाई गई थी, जिसे यश चोपड़ा ने डायरेक्ट किया था.

अमर अकबर एंथोनी फिल्म में विनोद खन्ना, ऋषि कपूर, अमिताभ बच्चन, नीतू सिंह, परवीन बॉबी, शबाना आजमी, निरूपा रॉय और प्राण लीड रोल में थे. डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. स्टोरी का क्रेडिट मनमोहन देसाई की पत्नी जीवनप्रभा देसाई और प्रभा शर्मा को दिया गया था. म्यूजिक लक्ष्मीकांत प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे. बतौर प्रोड्यूसर यह मनमोहन देसाई की पहली फिल्म थी. फिल्म में कुल 7 गाने थे. हर गाना सुपरहिट था. फिर भी दो गाने ‘हमको तुमसे हो गया है प्यार क्या करें’ और ‘शिर्डी वाले साईं बाबा, आया है तेरे दर पे सवाली’ आज भी पॉप्युलर हैं.
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मनमोहन देसाई किसी लॉजिक को नहीं मानते थे. सिर्फ इमोशंस पर जोर देते थे. यह फॉर्मूला भी बहुत कारगर रहा और उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर खूब चलीं. अमर अकबर एंथोनी के कई सीन लॉजिकली सही नहीं थे, फिर भी मनमोहन देसाई ने उन्हें फिल्म में रखा. अमिताभ ने एक बार ऋषि कपूर के साथ एक चैट शो में कहा था, ‘अमर अकबर एंथोनी की शूटिंग के दौरान हम लोग बोलते थे कि मन जी आप क्या करवा रहे हैं? यह ठीक नहीं है. यह गलत है, तीन प्राणी यहां लेटे हैं, उनका खून जा रहा है, एक बोतल में, बोतल से जा रहा है माता श्री को, ये मेडिकल हिस्ट्री नहीं हो सकती. ये गलत है लेकिन वो बोलते थे कि चुप बैठो. तुम लोगों को पता नहीं कि क्या होने वाला है. दो-तीन मोटी-मोटी गालियां देकर हम लोग वहां पर लेत जाते थे लेकिन वो बिल्कुल सही थे. जब थिएटर्स पर वो सीन आया, तो हल्ला मच गया. दर्शक रोमांचित हो उठते थे.’

इसी तरह ‘अमर अकबर एंथोनी’ के क्लाइमैक्स में एक गाना बजता है जिसके बोल हैं, ‘एक जगह जब जमा हो तीनों, अमर-अकबर-एंथोनी.’ दिलचस्प बात यह है कि तीनों यह गाना गा रहे हैं और विलेन को पता ही नहीं, वो उन्हें नहीं पहचानता. मनमोहन देसाई अपनी फिल्में आम आदमी के लिए बनाते थे. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि मेरा मकसद होता है कि दर्शक सीन पर ताली बजाए. जितनी तालियां बजेंगी, फिल्म उतने ही हफ्ते ज्यादा चलेगी. मैं मुझे लॉजिक की जरूरत नहीं. मैं लॉजिक पर यकीन नहीं करता. ‘जुनून’ मैथेड और इमोशन पर जोर देता हूं. फिल्म में कॉमेडी-ड्रामा-म्यूजिक पर ध्यान देता हूं.

इस लिस्ट में दूसरी फिल्म कुली है जो कि 2 दिसंबर 1983 को रिलीज हुई थी. इस फिल्म को ना तो दर्शक भूल पाए और ना ही सुपरस्टार अमिताभ बच्चन कभी भुला पाएंगे. वैसे तो फिल्म में अमिताभ बच्चन, रति अग्निहोत्री, वहीदा रहमान , ऋषि कपूर, कादर खान, पुनीत इस्सर जैसे मंझे हुए कलाकार थे लेकिन इस फिल्म से जुड़ी घटना को आज भी याद किया जाता है. यह 1983 की सबसे अधिक कमाई करने वाली फिल्म थी. मनमोहन देसाई ने इसका डायरेक्शन किया था.

फिल्म ‘कुली’ की सफलता के पीछे फिल्म की स्टोरी, एक्टर्स तो थे ही, इस फिल्म के खास पंच को देखने के लिए दर्शकों की भारी भीड़ सिनेमाघरों में उमड़ पड़ी थी. वही पंच जिसे फिल्म के एडिटर ऋषिकेश मुखर्जी ने फ्रीज कर दिया था. इसी पंच ने अमिताभ की फैमिली-फ्रेंड्स और लाखों चाहने वालों को 39 बरस पहले हलकान कर दिया था. देश भर में जिस एक्टर की जिंदगी बचाने के लिए दुआओं का दौर चला हो, भला उस फिल्म को देखने भीड़ कैसे नहीं जुटती. इस फिल्म के स्टोरी आइडिया का क्रेडिट मनमोहन देसाई की पत्नी जीवनप्रभा देसाई को दिया गया था. स्क्रीनप्ले-डायलॉग कादर खान-केके शुक्ला ने लिखे थे. कादर खान ही फिल्म में मेन विलेन के किरदार में थे.

‘कुली’ फिल्म के सेट पर ही अमिताभ बच्चन को चोट लगी थी. उन्हें एक तरह से दोबारा जीवन मिला था. दरअसल, पुनीत इस्सर और अमिताभ बच्चन के बीच एक फाइट सीन था. फाइट सीन में अपनी जगह से अमिताभ को टेबल के पार छलांग लगानी थी. पुनीत का दमदार घूंसा अमिताभ बच्चन के पेट में लगा. अमिताभ जैसे ही टेबल से दूसरी तरफ गिरे, टेबल का नुकीला हिस्सा उनके पेट में चुभ गया. जैसे-तैसे सीन पूरा हुआ. अमिताभ दर्द से छटपटाते हुए पार्क पर लेट गए. शूटिंग कई दिनों से चल रही थी. क्रू मेंबर्स को ब्रेक नहीं मिला था. ऐसे में क्रू मेंबर्स खुश थे. उन्हें लगा कि ब्रेक हो जाएगा. उन्होंने अमिताभ से ऐसे ही एक्टिंग करते रहने और पार्क में लेटे रहने के लिए कहा. किसी को अंदाजा ही नहीं था कि अमिताभ चोटिल हो गए. खैर, आनन-फानन में उन्हें अस्पताल ले जाया गया. महीनों इलाज चला. पूरे देश में दुआओं का दौर चला. आखिरकार अमिताभ हम सबके बीच लौट आए. अमिताभ बच्चन के साथ हुई इस दुखद घटना का असर फिल्म के प्रदर्शन पर पड़ा. हर किसी का लगाव फिल्म से हुआ. सिनेमाघरों में दर्शक टूट पड़े. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई.

इस फिल्म के भी कई सीन अमिताभ ने बेमन से किए थे. इस फिल्म में एक फनी सीन था जिसमें अमिताभ ने ब्रेकफास्ट आसन करते नजर आते हैं. इस सीन के बारे में अमिताभ ने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मनमोहन देसाई अद्भुत डायरेक्टर थे. हम लोग कहते थे कि ये क्या करवा रहे हो, यह पॉसिबल नहीं है. वो कहते थे कि चुप हो जाओ. देखना क्या होता है. आपने सीन में देखा कि मैंने अपनी टांग गर्दन के पीछे कर ली लेकिन वो मैंने नहीं किया. मेरी टांग वहां तक जा ही नहीं सकती. वो टांग किसी और की थी. मैं एक्सप्रेशन ऐसा दे रहा हूं कि मेरी ही टांग पीछे गई है.’
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