Last Updated:
हिंदी सिनेमा में एक से बढ़कर एक कलाकार रहे हैं, हालांकि मल्टी टैलेंटेड सितारों को आप गिनती में गिन सकते हैं. उनमें से एक थे नीरज वोरा. हिंदी सिनेमा में जब भी साफ-सुथरी और कालजयी कॉमेडी की बात होती है, तो नीरज वोरा का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है.
नई दिल्ली: हम जिस शख्सियत की बात कर रहे हैं, वो एक अभिनेता, लेखक और निर्देशक के रूप में मशहूर ते. उन्होंने बॉलीवुड को ऐसी फिल्में दीं, जो आज भी दर्शकों के चेहरों पर मुस्कान बिखेर देती हैं. अक्षय कुमार, परेश रावल और सुनील शेट्टी की मशहूर तिकड़ी को ‘हेरा फेरी’ के जरिए घर-घर में लोकप्रिय बनाने का श्रेय काफी हद तक नीरज वोरा की कलम को ही जाता है.
22 जनवरी 1963 को गुजरात के भुज में जन्मे नीरज वोरा को कला विरासत में मिली थी. उनके पिता पंडित विनायक राय ननलाल वोरा एक मशहूर संगीतकार थे. नीरज का पालन-पोषण मुंबई में हुआ था, जहां मात्र छह साल की उम्र में उन्होंने थिएटर की दुनिया में कदम रख दिया था. कॉलेज के दिनों तक आते-आते वे अभिनय और ड्रामा में एक जाना-पहचाना नाम बन चुके थे और कई पुरस्कार अपने नाम कर चुके थे.
अभिनय से लेखन तक का सफर
नीरज वोरा ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत 1984 में फिल्म ‘होली’ से की थी, जिसमें आमिर खान और नसीरुद्दीन शाह जैसे दिग्गज शामिल थे. हालांकि, उन्हें वास्तविक पहचान 1995 की फिल्म ‘रंगीला’ से मिली, जहां उनके लिखे डायलॉग और छोटे से किरदार ने सबका ध्यान खींचा. उन्होंने इसके बाद ‘अकेले हम अकेले तुम’, ‘जोश’, और ‘बादशाह’ जैसी फिल्मों के जरिए अपनी प्रतिभा को साबित किया.
‘हेरा फेरी’ और कॉमेडी का नया दौर
साल 2000 में आई फिल्म ‘हेरा फेरी’ नीरज वोरा के करियर का टर्निंग पॉइंट साबित हुई. इस फिल्म की पटकथा और संवादों ने भारतीय कॉमेडी को एक नई दिशा दी. इसके बाद 2006 में उन्होंने ‘फिर हेरा फेरी’ का निर्देशन किया, जो बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर रही. उन्होंने ‘खिलाड़ी 420’ का निर्देशन करने के साथ-साथ ‘बोल बच्चन’ जैसी फिल्मों के लेखन में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. एक अभिनेता के तौर पर ‘मन’, ‘खट्टा-मीठा’ और ‘वेलकम बैक’ में उनकी कॉमिक टाइमिंग को दर्शकों ने भरपूर सराहा.
एक्टर की जिंदगी का स्ट्रगल
नीरज वोरा को अक्टूबर 2016 में ब्रेन स्ट्रोक हुआ, जिसके बाद वे कोमा में चले गए. इस मुश्किल दौर में उनके मित्र और निर्माता फिरोज नाडियाडवाला ने उनकी पूरी जिम्मेदारी उठाई और अपने घर में ही उनके लिए आईसीयू की व्यवस्था की. लगभग 13 महीनों तक जीवन और मृत्यु के बीच स्ट्रगल करने के बाद 14 दिसंबर 2017 को 54 साल की आयु में उनका निधन हो गया. उनके निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सहित पूरे फिल्म जगत ने शोक जाहिर किया था.
![]()










